Table of Contents
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा ने भारतीय कृषि क्षेत्र को एक नई दिशा दी है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों (India-New Zealand Agriculture Partnership) ने कृषि, बागवानी, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में सहयोग (Cooperation in the agriculture, horticulture, animal husbandry, and dairy sectors) को लेकर कई अहम पहलों पर सहमति जताई है। सबसे बड़ी बात ये है कि दोनों देशों ने मुक्त व्यापार समझौते के तहत एग्रीकल्चरल प्रोडक्टिविटी पार्टनरशिप को आगे बढ़ाने का फैसला किया है, जिसके ज़रीये से कृषि उत्पादकता बढ़ाने, आधुनिक कृषि तकनीकों के आदान-प्रदान, बागवानी फसलों की गुणवत्ता सुधारने और डेयरी क्षेत्र में तकनीकी सहयोग को मजबूत करने पर काम किया जाएगा।
भारत में डेयरी क्षेत्र किसानों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार
विदेश मंत्रालय के सचिव रुद्रेंद्र टंडन ने इस दौरान साफ किया कि भारत में डेयरी क्षेत्र छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है और यहां डेयरी व्यवस्था मुख्य रूप से सहकारी मॉडल पर आधारित है। उन्होंने बताया कि न्यूजीलैंड कृषि प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी देशों में शामिल है, इसलिए दोनों देशों के बीच आधुनिक एग्रीटेक, नवाचार और तकनीकी सहयोग से भारतीय कृषि और डेयरी क्षेत्र को बहुत लाभ पहुंचेगा। सरकार नई तकनीकों को अपनाकर किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है और इस साझेदारी से यह लक्ष्य और आसान हो जाएगा।
कीवी, सेब और शहद की उत्पादकता बढ़ाने पर फोकस
बागवानी क्षेत्र में विशेष रूप से कीवी, सेब और शहद की उत्पादकता बढ़ाने पर फोकस किया जाएगा। दोनों देशों ने इन फसलों के लिए साझा वर्कप्लान तैयार करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा, सबसे बड़ी सौगात यह है कि नगालैंड और उत्तराखंड में कीवी उत्पादन के लिए दो उत्कृष्टता केंद्र बनाए जाएंगे। इन केंद्रों पर किसानों को आधुनिक उत्पादन तकनीक, विशेष प्रशिक्षण और बेहतर प्रबंधन की पूरी जानकारी दी जाएगी, जिससे वे अपनी उपज की गुणवत्ता और मात्रा दोनों बढ़ा सकेंगे।
डेयरी और पशुपालन क्षेत्र में महत्वपूर्ण समझौता
डेयरी और पशुपालन क्षेत्र में भी दोनों देशों ने महत्वपूर्ण समझौता किया है। इसके तहत तकनीकी सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान और बेहतर प्रबंधन पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही खाद्य सुरक्षा, पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन, टिकाऊ कृषि और वैल्यू चेन विकास जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। इससे कृषि क्षेत्र को आधुनिक और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी, साथ ही किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य भी मिल सकेगा।
शैक्षणिक संस्थानों और शोध संगठनों के बीच सहयोग
कृषि अनुसंधान, इनोवेशन, कौशल विकास और जलवायु-अनुकूल कृषि प्रणालियों पर मिलकर काम करने का भी फैसला हुआ है। इसके लिए दोनों देशों के शैक्षणिक संस्थानों और शोध संगठनों के बीच सहयोग बढ़ाया जाएगा, ताकि टिकाऊ और अधिक उत्पादक कृषि प्रणाली विकसित की जा सके। बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच यह कदम भारतीय किसानों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा।
दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी पर सहमति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने पर सहमति जताई है। दोनों नेताओं ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर यानी करीब 35,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। इस साझेदारी में कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, शिक्षा, नवाचार और पर्यटन जैसे क्षेत्रों को अहम स्थान दिया गया है। यह सहयोग भारतीय किसानों के लिए एक नई सुबह की तरह है, जहां आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और वैश्विक स्तर की साझेदारी से उनकी आय बढ़ेगी और भारतीय कृषि विश्व स्तर पर और अधिक मजबूत होगी।
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।
ये भी पढ़ें: स्ट्रॉबेरी की खेती (Strawberry Farming): वो किसान जिन्होंने स्ट्रॉबेरी उगाई और कामयाबी पाई

