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राजस्थान के अलवर जिले (Alwar district of Rajasthan) के प्याज किसानों (Onion farmers) के लिए एक अच्छी ख़बर सामने आई है। सरकार किसानों को प्याज भंडारण ( Onion Storage) के लिए भारी अनुदान दे रही है। इस योजना के तहत 25 मीट्रिक टन क्षमता वाली प्याज भंडारण संरचना बनाने पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी, जो अधिकतम 87,500 रुपये तक हो सकती है । इससे किसानों को अपनी उपज को सही टाइम पर बेचने का मौका मिलेगा और उन्हें सही दाम मिल सकेगा।
बारिश में किसान अपना रहे ये देसी तकनीक
इन दिनों देश में मानसून ने दस्तक दे दी है और बारिश का मौसम प्याज के बीज और कंद के लिए सबसे बड़ी चुनौती लेकर आता है। ज़्यादा नमी के कारण कंद और बीज जल्दी ख़राब होने का ख़तरा बढ़ जाता है, जिससे अगली फसल प्रभावित हो सकती है । इस समस्या से निपटने के लिए अलवर और खैरथल-तिजारा जिले के किसान एक पुरानी और कारगर तकनीक अपना रहे हैं।
किसान प्याज की गंठियों (Tubers) को छोटे-छोटे गुच्छों में बांधकर घरों के अंदर ऊंचाई पर लटका रहे हैं। इस तरीके से बीज सीधे जमीन या नमी के संपर्क में नहीं आते और बारिश के मौसम में भी सुरक्षित रहते हैं। किसान ऐसी जगहों का चयन कर रहे हैं जहां हवा का आना-जाना अच्छा हो और नमी कम हो। यह देसी जुगाड़ उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
अगस्त में होगी प्याज की रोपाई
अलवर जिले में प्याज की रोपाई का काम अगस्त महीने से शुरू होने की संभावना है। किसान इसके लिए अभी से गुणवत्तापूर्ण बीज तैयार करने में जुटे हैं। जितना अच्छा बीज, उतना बेहतर उत्पादन। इसी सोच के साथ किसान बीज की गुणवत्ता पर ख़ास ध्यान दे रहे हैं। अच्छी क्वालिटी के बीज से न केवल प्रोडक्शन बढ़ता है, बल्कि लागत से ज़्यादा कमाई भी होती है।
इन 3 उन्नत किस्मों से पाएं बंपर पैदावार
अलवर और खैरथल-तिजारा क्षेत्र (Alwar and Khairthal-Tijara region) के किसान अगर इन तीन उन्नत किस्मों को अपनाएं तो अच्छा उत्पादन पा सकते हैं:
1.पूसा सोना (Sel-126) : ये किस्म राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर के किसानों के लिए बेहतरीन विकल्प है। इसकी औसत उपज करीब 25 टन प्रति हेक्टेयर मिलती है।
2.पूसा शोभा (Sel-126) : 2018 में विकसित ये किस्म दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के किसानों के लिए अनुशंसित है। इसके कंद चपटे व सख्त होते हैं, जो भंडारण, प्रसंस्करण और निर्यात (Storage, processing, and export) के लिए बेहतर हैं। इसकी औसत उपज भी 25 टन प्रति हेक्टेयर है।
3.पूसा रिद्धि (Sel.-338) : ये किसानों के लिए बेहतरीन ऑप्शन है, क्योंकि इससे 31 टन प्रति हेक्टेयर तक उपज मिलती है। ये किस्म तीखी गंध, हाई एंटीऑक्सीडेंट मात्रा और बेहतर भंडारण व निर्यात क्षमता के कारण किसानों के बीच फेमस है।
क्यों ज़रूरी है भंडारण?
प्याज की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण किसानों को कई बार मजबूरी में कम दाम पर अपनी उपज बेचनी पड़ती है। सही भंडारण सुविधा होने पर किसान अपनी फसल को सही समय पर, जब बाजार भाव अच्छे हों, बेच सकते हैं। आमतौर पर प्याज की 60 फीसदी पैदावार रबी सीज़न में होती है, इसलिए उसे लंबे समय तक स्टोर करके रखना बहुत ज़रूरी है। इस योजना के जरिए सरकार किसानों को यही मौका दे रही है।
अप्लाई कैसे करें?
इस स्कीम का फायदा लेने के इच्छुक किसान अपने नजदीकी e-Mitra Centre पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं। आवेदन के वक्त इन दस्तावेजों की ज़रूरत होगी-
- आधार कार्ड या जनाधार कार्ड
- छह माह से अधिक पुरानी न होने वाली जमाबंदी की प्रति
- भूमि से संबंधित अन्य आवश्यक दस्तावेज
- बैंक खाते की जानकारी
- विभाग द्वारा मांगे गए अन्य जरूरी दस्तावेज
सरकार की स्कीम से मिलेगा फायदा
यह योजना राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत चलाई जा रही है और इसका मकसद किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाना है । अगर आप भी अलवर या आसपास के इलाके के प्याज किसान हैं, तो इस योजना का फायदा उठाना न भूलें। सही समय पर आवेदन करके आप अपनी मेहनत का पूरा लाभ पा सकते हैं।
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।
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