किसान ऑफ़ इंडिया सम्मान 2025 में शिव प्रसाद सहनी को मत्स्य पालन श्रेणी में मिला सम्मान

शिव प्रसाद सहनी को किसान ऑफ़ इंडिया सम्मान 2025 में मत्स्य पालन श्रेणी में सम्मानित किया गया, उनकी मेहनत ने खेती को नया आयाम दिया।

शिव प्रसाद सहनी किसान ऑफ़ इंडिया सम्मान 2025

27 नवंबर को आयोजित किसान ऑफ़ इंडिया सम्मान 2025 के मंच पर बिहार के सिवान ज़िले के महमदपुर गांव के शिव प्रसाद सहनी को मत्स्य पालन श्रेणी में सम्मानित किया गया। कभी सालाना केवल 75 हज़ार रुपये की आय कमाने वाले यह किसान आज करोड़ों रुपये के कारोबार तक पहुंच चुके हैं। उनकी मेहनत, सोच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण ने यह साबित कर दिया कि अगर लगन हो, तो मिट्टी से सोना उगाना मुमकिन है।

असंभव ज़मीन से मत्स्य पालन की शुरुआत

शिव प्रसाद सहनी की कहानी उस ज़मीन से शुरू होती है, जिस पर खेती करना लगभग असंभव था। लेकिन उन्होंने उस अनुपजाऊ ज़मीन को अवसर में बदला। लगभग 80 से 90 बीघा क्षेत्र में उन्होंने 50 से अधिक छोटे-बड़े तालाब खुदवाए और वहीं से मत्स्य पालन की दिशा में कदम बढ़ाया।

आज उनके तालाबों में कॉमन कार्प, ग्रास कार्प, कतला, रोहु, और मृगल जैसी कई प्रजातियों की मछलियां पाली जाती हैं। वे सालाना करीब 90 क्विंटल मछली बीज (फिंगरलिंग) तैयार करते हैं और उनकी सालाना फिशरी ट्रांजैक्शन वैल्यू अब करोड़ों में पहुंच चुकी है।

शिक्षा से लेकर किसान बनने तक का सफ़र

1963 में मैट्रिक की पढ़ाई पूरी करने के बाद शिव प्रसाद सहनी ने आईटीआई सारण इंजीनियरिंग, मरौहरा से जनरल मैकेनिक का डिप्लोमा किया था। तकनीकी पृष्ठभूमि के बावजूद उन्होंने जीवन का असली अर्थ खेती में पाया। शुरुआत में आय का साधन सीमित था, लेकिन जब उन्होंने मछली पालन का रास्ता चुना, तो उनकी मेहनत और तकनीक ने उनकी किस्मत ही बदल दी।

“जब मैंने पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर वैज्ञानिक तकनीकें अपनाईं, तभी असली सफलता मिली,” वे मुस्कुराते हुए कहते हैं।

वैज्ञानिक सोच से मिली नई दिशा

शिव प्रसाद सहनी ने मत्स्य पालन को सिर्फ़ आजीविका नहीं, बल्कि नवाचार का माध्यम बना दिया। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र, सिवान से प्रशिक्षण लिया और आधुनिक तरीकों को अपनाया। अब उनके यहां न सिर्फ़ मछली बीज तैयार किए जाते हैं, बल्कि फिश फीड (मछली आहार) भी स्वयं बनाया जाता है। इसके कारण उत्पादन लागत घटती है और गुणवत्ता भी बेहतर रहती है। आज उनकी मछलियां गोपालगंज, छपरा, चंपारण और वैशाली जैसे ज़िलों में सप्लाई होती हैं।

किसान ऑफ़ इंडिया सम्मान 2025 में शिव प्रसाद सहनी को मत्स्य पालन श्रेणी में मिला सम्मान

तालाब किनारे की खेती से बढ़ी आय

शिव प्रसाद सहनी ने सिर्फ़ मछली पालन पर निर्भर नहीं रहे। उन्होंने तालाबों के किनारों पर सब्ज़ी और फल की खेती भी शुरू की। बैंगन, गवारफली, मसाले और फूल जैसी फ़सलों से उन्हें हर साल लगभग 6 लाख रुपये की अतिरिक्त आमदनी होती है।
वे कहते हैं,

“तालाब के चारों ओर की ज़मीन को खाली छोड़ना सही नहीं था। मैंने इसे सब्ज़ियां उगाने में लगाया और इससे न सिर्फ़ लागत घटी बल्कि आमदनी भी दोगुनी हुई।”

समेकित कृषि प्रणाली का सफल मॉडल

शिव प्रसाद सहनी ने अपने खेतों को समेकित कृषि प्रणाली (Integrated Farming System) का उत्कृष्ट उदाहरण बना दिया है। इस मॉडल में मछली पालन के साथ-साथ फ़सल उत्पादन, पशुपालन, बागवानी, वर्मी-कम्पोस्ट, और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियां जुड़ी हुई हैं।

इससे उन्हें न केवल कई आय स्रोत मिले, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग भी संभव हुआ। आज उनका फ़ार्म एक लाइव ट्रेनिंग मॉडल बन चुका है, जहां आसपास के किसान आकर सीखते हैं कि कैसे एक ही ज़मीन से कई तरह की कमाई की जा सकती है।

सरकारी सहयोग और प्रशिक्षण से मिली ताक़त

शिव प्रसाद सहनी ने सरकार और कृषि संस्थानों द्वारा दी जा रही योजनाओं का पूरा लाभ उठाया। उन्होंने ड्रिप सिंचाई प्रणाली, वर्मी-कम्पोस्ट यूनिट, और मछली बीज उत्पादन में अनुदान का लाभ लिया। साथ ही उन्होंने जलगांव (महाराष्ट्र) और आरएयू, पूसा जैसे संस्थानों से उन्नत प्रशिक्षण प्राप्त किया। इन तकनीकी प्रयासों का परिणाम यह हुआ कि उनकी वार्षिक आय अब 1.02 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।

पुरस्कार और उपलब्धियां

शिव प्रसाद सहनी को मत्स्य पालन में उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कई पुरस्कार प्राप्त हुए हैं, जैसे –

  1. जगजीवन राम अभिनव किसान पुरस्कार (2020)
  2. IARI इनोवेटिव फ़ार्मर अवार्ड (2020)
  3. डॉ. हीरा लाल चौधरी बेस्ट फिश फ़ार्मर अवार्ड
  4. ग्रासरूट इनोवेशन अवार्ड

और अब, उनकी मेहनत को एक और पहचान मिली है — किसान ऑफ़ इंडिया सम्मान 2025, जिसने उनके दशकों की मेहनत को राष्ट्रीय गौरव में बदल दिया।

भविष्य की योजनाएं और प्रेरणा

शिव प्रसाद सहनी का सपना है कि वे अपने अनुभवों को साझा कर अधिक से अधिक किसानों को इस राह पर ले आएं। वे कहते हैं –

“अगर एक किसान आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सोच अपनाए, तो खेती और मत्स्य पालन दोनों में क्रांति लाना संभव है। मेरा लक्ष्य है कि मैं अन्य किसानों को आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाऊं।”

उनका विश्वास है कि समेकित कृषि प्रणाली और मत्स्य पालन मिलकर ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को नई मज़बूती दे सकते हैं।

निष्कर्ष 

शिव प्रसाद सहनी की कहानी केवल एक किसान की सफलता नहीं, बल्कि उस सोच की मिसाल है जिसमें धरती, पानी और तकनीक मिलकर समृद्धि का मार्ग बनाते हैं। उनकी उपलब्धि ने यह साबित किया कि उम्र कभी बाधा नहीं होती — अगर सोच नई हो तो हर उम्र सफलता की मिसाल बन सकती है।

किसान ऑफ़ इंडिया सम्मान 2025 में शिव प्रसाद सहनी का सम्मान होना केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि उन लाखों किसानों की प्रेरणा है जो खेती और मत्स्य पालन के माध्यम से भारत को आत्मनिर्भर बना रहे हैं।

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