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संसद के शीतकालीन सत्र (Parliament’s winter session) में खाद की कालाबाज़ारी (Fertilizer black marketing) और किसानों के शोषण का मुद्दा गर्माया हुआ है। सरकार ने एक्सेप्ट किया है कि फर्टिलाइज़र कंपनियों की मनमानी के खिलाफ उसने कड़े कदम उठाए हैं। पिछले हफ्ते दिए गए एक जवाब में खुलासा हुआ कि नियमों का उल्लंघन करने वाली 5000 से ज्यादा खाद कंपनियों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं। ये एक बड़ी और सख्त कार्रवाई मानी जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
शिवसेना (UBT) के सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे (MP Bhausaheb Wakchore) ने सरकार से एक अहम सवाल पूछा। उन्होंने पूछा कि क्या Fertilizer companies यूरिया और डीएपी जैसी जरूरी खाद के साथ, दूसरे कम ज़रूरी उत्पाद भी डीलरों पर जबरदस्ती थोपती हैं? इससे डीलरों और आखिर में किसानों को नुकसान होता है।
इसके जवाब में रसायन और उर्वरक मंत्रालय की राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल (Minister of State for Chemicals and Fertilizers, Anupriya Patel) ने साफ किया कि खाद को ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955’ (Essential Commodities Act, 1955) के तहत रखा गया है। यानी, इसकी आपूर्ति और कीमत पर नज़र रखना सरकार का काम है।
राज्य सरकारों के पास कार्रवाई का अधिकार
मंत्री ने बताया कि ‘उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985’ (‘Fertilizer Control Order, 1985’) के तहत राज्य सरकारों को कालाबाजारी और ज्यादा कीमत वसूली करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का पूरा अधिकार है। केंद्र सरकार को मिलने वाली शिकायतों को संबंधित राज्य सरकारों को भेजा जाता है, ताकि वे कानून के मुताबिक सख्त कदम उठा सकें।
टैगिंग या बंडलिंग पर बैन
समस्या की एक बड़ी जड़ है टैगिंग या बंडलिंग (Tagging or bundling)। इसका मतलब है कि कंपनियां यूरिया/डीएपी जैसी ज़रूरी और सब्सिडी वाली खाद के साथ, अपने दूसरे (अक्सर महंगे) उत्पाद भी बेचने के लिए जबरदस्ती करती हैं। डीलर को ज़रूरी खाद तभी मिलती है, जब वह बाकी का सामान भी खरीदे। इससे खाद की कालाबाजारी होती है और किसानों को महंगे दाम पर सामान खरीदना पड़ता है।
सरकार ने साफ कहा है कि ये प्रथा गैरकानूनी है। मंत्रालय लगातार राज्य सरकारों को पत्र लिखकर ऐसी गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई करने को कहता है। साथ ही, कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे जबरदस्ती की बिक्री या बंडलिंग में शामिल न हों।
सख़्ती जारी रहेगी
सरकार का दावा है कि किसानों और डीलरों के हितों की रक्षा के लिए वह पूरी तरह Committed है। 5000 से ज्यादा लाइसेंस रद्द करना इसी प्रतिबद्धता का संकेत है। किसानों की उम्मीद है कि संसद में उठाई गई इस आवाज का नतीजा ठोस रूप में सामने आएगा।
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