Parliament में केंद्र सरकार ने खाद की कालाबाज़ारी पर दिये जवाब, बताया 5000 कंपनियों के लाइसेंस रद्द!

शिवसेना (UBT) के सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे (MP Bhausaheb Wakchore) ने सरकार से एक अहम सवाल पूछा। उन्होंने पूछा कि क्या Fertilizer companies  यूरिया और डीएपी जैसी जरूरी खाद के साथ, दूसरे कम ज़रूरी उत्पाद भी डीलरों पर जबरदस्ती थोपती हैं? इससे डीलरों और आखिर में किसानों को नुकसान होता है।

Parliament में केंद्र सरकार ने खाद की कालाबाज़ारी पर दिये जवाब, बताया 5000 कंपनियों के लाइसेंस रद्द!

संसद के शीतकालीन सत्र (Parliament’s winter session) में खाद की कालाबाज़ारी (Fertilizer black marketing) और किसानों के शोषण का मुद्दा गर्माया हुआ है। सरकार ने एक्सेप्ट किया है कि फर्टिलाइज़र कंपनियों की मनमानी के खिलाफ उसने कड़े कदम उठाए हैं। पिछले हफ्ते दिए गए एक जवाब में खुलासा हुआ कि नियमों का उल्लंघन करने वाली 5000 से ज्यादा खाद कंपनियों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं। ये एक बड़ी और सख्त कार्रवाई मानी जा रही है।

क्या है पूरा मामला?

शिवसेना (UBT) के सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे (MP Bhausaheb Wakchore) ने सरकार से एक अहम सवाल पूछा। उन्होंने पूछा कि क्या Fertilizer companies  यूरिया और डीएपी जैसी जरूरी खाद के साथ, दूसरे कम ज़रूरी उत्पाद भी डीलरों पर जबरदस्ती थोपती हैं? इससे डीलरों और आखिर में किसानों को नुकसान होता है।

kisan of india instagram

इसके जवाब में रसायन और उर्वरक मंत्रालय की राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल (Minister of State for Chemicals and Fertilizers, Anupriya Patel) ने साफ किया कि खाद को ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955’ (Essential Commodities Act, 1955) के तहत रखा गया है। यानी, इसकी आपूर्ति और कीमत पर नज़र रखना सरकार का काम है।

राज्य सरकारों के पास कार्रवाई का अधिकार

मंत्री ने बताया कि ‘उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985’ (‘Fertilizer Control Order, 1985’) के तहत राज्य सरकारों को कालाबाजारी और ज्यादा कीमत वसूली करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का पूरा अधिकार है। केंद्र सरकार को मिलने वाली शिकायतों को संबंधित राज्य सरकारों को भेजा जाता है, ताकि वे कानून के मुताबिक सख्त कदम उठा सकें।

टैगिंग या बंडलिंग पर बैन

समस्या की एक बड़ी जड़ है  टैगिंग या बंडलिंग (Tagging or bundling)। इसका मतलब है कि कंपनियां यूरिया/डीएपी जैसी ज़रूरी और सब्सिडी वाली खाद के साथ, अपने दूसरे (अक्सर महंगे) उत्पाद भी बेचने के लिए जबरदस्ती करती हैं। डीलर को ज़रूरी खाद तभी मिलती है, जब वह बाकी का सामान भी खरीदे। इससे खाद की कालाबाजारी होती है और किसानों को महंगे दाम पर सामान खरीदना पड़ता है।

kisan of india youtube

सरकार ने साफ कहा है कि ये प्रथा गैरकानूनी है। मंत्रालय लगातार राज्य सरकारों को पत्र लिखकर ऐसी गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई करने को कहता है। साथ ही, कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे जबरदस्ती की बिक्री या बंडलिंग में शामिल न हों।

सख़्ती जारी रहेगी

सरकार का दावा है कि किसानों और डीलरों के हितों की रक्षा के लिए वह पूरी तरह Committed है। 5000 से ज्यादा लाइसेंस रद्द करना इसी प्रतिबद्धता का संकेत है। किसानों की उम्मीद है कि संसद में उठाई गई इस आवाज का नतीजा ठोस रूप में सामने आएगा।

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

इसे भी पढ़िए: Is The Milk Real Or Fake?: सुबह की चाय से लेकर बच्चों के गिलास तक दूध की शुद्धता पहचानने के 3 आसान घरेलू टेस्ट

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top