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दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित किसान ऑफ़ इंडिया सम्मान 2025 के दूसरे सत्र “Agri-Tech Startups” में जोधपुर, राजस्थान के युवा उद्यमी अमित सोनी ने अपनी सफलता की प्रेरक कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने और उनके भाई सुमित सोनी ने मिलकर बाजरे से हेल्दी बेकरी प्रोडक्ट्स बनाने की अनोखी पहल की।
आज उनका ब्रांड RDz 1983 Bakery न केवल राजस्थान बल्कि पूरे भारत में पहचान बना चुका है। इतना ही नहीं, उनके द्वारा बनाए गए मिलेट्स केक संसद भवन तक पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद उनके बाजरे से बने चॉकलेट ट्रफल केक की सराहना की।
जोधपुर से संसद तक पहुंची उनके मिलेट्स की ख़ुशबू
अमित सोनी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि यह सफर आसान नहीं था। जोधपुर की मिट्टी से शुरू हुई यह पहल आज वैश्विक मंचों तक पहुंच चुकी है। वे बताते हैं कि “हमने मिलेट्स जैसे पारंपरिक अनाज को एक आधुनिक रूप देने का प्रयास किया। शुरुआत में लोगों को यह समझाना मुश्किल था कि बाजरे से भी स्वादिष्ट और हेल्दी केक बनाए जा सकते हैं।”
लेकिन उनकी मेहनत रंग लाई — अमित सोनी की बेकरी अब संसद से लेकर अंतरराष्ट्रीय फूड एक्सपो तक चर्चा का विषय है।
बेकरी व्यवसाय की प्रेरणा और शुरुआत
अमित सोनी पेशे से एक शेफ हैं। खाना बनाने के प्रति उनके जुनून और मार्केटिंग की समझ ने उन्हें बेकरी की ओर प्रेरित किया। वहीं उनके भाई सुमित सोनी, जो एक फिजियोथेरेपिस्ट डॉक्टर हैं, ने स्वस्थ जीवनशैली की दिशा में यह सुझाव दिया कि अगर हम हेल्दी डायट को स्वाद के साथ जोड़ दें, तो लोग इसे अपनाएंगे। इसी सोच से उन्होंने मिलेट आधारित बेकरी की शुरुआत की। उनका मकसद था कि लोगों को सेहतमंद विकल्प मिलें और साथ ही किसानों को भी बाजरे जैसी फ़सलों से बेहतर आमदनी प्राप्त हो सके।
RDz 1983 Bakery नाम के पीछे की कहानी
अमित सोनी ने बताया कि “RDz” नाम उनके माता-पिता “रमेश” और “दुर्गा” के नाम से लिया गया है, और “1983” उनके माता-पिता की शादी का वर्ष है। यह नाम उनके परिवार के प्रति प्रेम और सम्मान का प्रतीक है। उनकी यह बेकरी पूरी तरह शाकाहारी और ऑर्गेनिक मिलेट प्रोडक्ट्स पर आधारित है। उन्होंने बताया कि “हमने शुरुआत में छोटे स्तर से काम शुरू किया था, लेकिन आज हमारे उत्पाद संसद भवन तक पहुंच चुके हैं। एक दिन हमने 60 किलो बाजरे का केक संसद भेजा था, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने चखा और सराहा। वह पल हमारी मेहनत का सबसे बड़ा पुरस्कार था।”
किसानों को फ़ायदा पहुंचाने वाली सोच
अमित सोनी ने कहा कि उनका लक्ष्य सिर्फ़ व्यवसाय बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों को लाभ पहुंचाना भी है। उन्होंने बताया कि –
“जितना ज़्यादा हम अपने मिलेट्स प्रोडक्ट्स को बड़े बाज़ार में बेचेंगे, उतना ही ज़्यादा फ़ायदा किसानों को मिलेगा। जब हमारी बेकरी बढ़ेगी, तब किसानों से अधिक मात्रा में बाजरा खरीदा जाएगा और उन्हें सही मूल्य मिलेगा।”
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 200 पैकेट बिस्किट बनाने में लगभग 4–5 किलो बाजरा लगता है। जैसे-जैसे बिक्री बढ़ेगी, बाजरे की मांग भी बढ़ेगी और किसानों के लिए यह एक स्थायी आय का जरिया बनेगा।
अमित सोनी का संदेश – मिलेट्स को बनाएं भारत का गौरव
अमित सोनी ने कहा कि राजस्थान जैसे राज्यों में बाजरे की खेती बहुत होती है, लेकिन किसान इसे लाभदायक नहीं मानते क्योंकि इसकी मांग कम है। लेकिन अगर बाजरे को आधुनिक तरीके से उपयोग में लाया जाए, जैसे कि बेकरी प्रोडक्ट्स, कुकीज़, पिज्ज़ा बेस और केक में, तो इसकी मार्केट वैल्यू कई गुना बढ़ सकती है।
उन्होंने कहा –
“हमारा उद्देश्य सिर्फ़ उत्पाद बनाना नहीं है, बल्कि एक ऐसी प्रणाली खड़ी करना है जो किसान, ग्राहक और उद्यमी — तीनों के लिए फायदेमंद हो। मिलेट्स भारत का सुपरफूड हैं, और अगर सही दिशा में काम हो तो यह हमारे देश की सेहत और अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूत बना सकता है।”
किसान ऑफ़ इंडिया सम्मान 2025 में अमित सोनी की प्रेरक भूमिका
किसान ऑफ़ इंडिया सम्मान 2025 के मंच पर अमित सोनी ने यह साबित कर दिया कि खेती और उद्यमिता का मेल देश के कृषि भविष्य को नई दिशा दे सकता है। उन्होंने युवा उद्यमियों और किसानों से अपील की कि वे मिलेट्स जैसे पारंपरिक अनाजों को आधुनिक तकनीक और नए विचारों से जोड़ें।
उनकी उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया, जहां नवाचार, परंपरा और प्रेरणा तीनों का अद्भुत संगम देखने को मिला।
निष्कर्ष
अमित सोनी की कहानी केवल एक उद्यमी की सफलता नहीं, बल्कि उस सोच का परिणाम है जिसमें परंपरा और आधुनिकता साथ चलती है। उन्होंने साबित किया कि अगर नीयत साफ हो और मकसद समाज के हित में हो, तो एक साधारण अनाज भी राष्ट्रीय पहचान बना सकता है। किसान ऑफ़ इंडिया सम्मान 2025 में अमित सोनी की मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि भारत का भविष्य मिट्टी और नवाचार के मेल में छिपा है।
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