Kisan of India Samman 2025 से सम्मानित: बंजर भूमि से सोना उपजाने वाले, देसी गायों के संरक्षक सुरेंद्र अवाना का कृषि सफ़र

27 नवंबर 2025 को ‘किसान सम्मान 2025’ (Kisan of India Samman 2025)से सम्मानित सुरेंद्र अवाना से हुई इस ख़ास बातचीत के मुख्य अंश यहां पेश हैं।

Kisan of India Samman 2025 से सम्मानित: बंजर भूमि से सोना उपजाने वाले, देसी गायों के संरक्षक सुरेंद्र अवाना का कृषि सफ़र

Kisan of India की टीम ने जयपुर से 50 किलोमीटर दूर भेराणा गांव में प्रगतिशील किसान सुरेंद्र अवाना (Progressive farmer Surendra Awana) के एकीकृत प्राकृतिक फार्म (Integrated natural farm) का दौरा किया। उनकी कहानी केवल सफलता की नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प, इनोवेशन और मज़बूती की मिसाल है। 27 नवंबर 2025 को ‘किसान सम्मान 2025’ (Kisan of India Samman 2025)से सम्मानित सुरेंद्र अवाना से हुई इस ख़ास बातचीत के मुख्य अंश यहां पेश हैं।

जयपुर के निकट भेराणा गांव में 15 एकड़ बंजर ज़मीन को देखकर आज कोई अंदाज़ा नहीं लगा सकता कि ये कभी उपजाऊपन से कोसों दूर थी। आज यहां हरियाली, तालाबों में मछलियां, गौशाला, फलदार पेड़ और ऑर्गेनिक सब्ज़ियों के साथ-साथ Agro-tourism की झलक मिलती है। इस चमत्कार के पीछे हैं किसान सुरेंद्र अवाना, जिन्होंने महज 19 साल की उम्र में पिता द्वारा शुरू किए गए स्कूल की ज़िम्मेदारी संभाली और बाद में खेती के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की।

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बंजर से उपजाऊ की ओर: एक मॉडल का जन्म

साल 2016 में सुरेंद्र अवाना (Surendra Awana) ने इस बंजर ज़मीन को खरीदा और सरकारी सब्सिडी का सही इस्तेमाल करते हुए Rainwater harvesting के लिए तालाब बनवाए। वो बताते है- ‘मेरे सामने सबसे बड़ी चुनौती पानी थी। हमने 18 ट्यूबवेल लगाए, पर समाधान नहीं मिला। फिर तालाबों के ज़रीये से वर्षा जल संचयन ही परमानेंट रास्ता निकला’ । आज उनके पास दो तालाब हैं, जिनकी कुल क्षमता एक करोड़ लीटर है और यही उनकी समस्त कृषि एवं पशुपालन गतिविधियों की लाइफ लाइन हैं।

एकीकृत खेती: प्रकृति का संतुलन

सुरेंद्र ने जैविक खेती से शुरुआत कर अब पूरी प्राकृतिक खेती और ‘एकीकृत खेती मॉडल’ अपना लिया है। उनके फार्म पर 4 तालाबों में मछली व बत्तख पालन, मधुमक्खी पालन, मुर्गी पालन और 60 से अधिक गिर गायों की एक डेयरी इकाई है। ‘हम अपने खेत से निकलने वाले हर कचरे का Recycle करते हैं। हमारा टारगेट ज़ीरो वेस्ट है। ‘वे जोड़ते हैं। बिजली की ज़रूरत 42 किलोवाट के सोलर सिस्टम से पूरी होती है, जिससे लागत कम हुई है।’ 

सहयोग और संगठन की शक्ति: एफपीओ का रोल

सुरेंद्र का मानना है कि अकेले सफलता लिमिटेड है। इसलिए उन्होंने एक एफपीओ (Farmer Producer Organization) बनाया है, जिससे 1200 से अधिक किसान जुड़े हैं। ‘हम छोटे किसानों की फसलों, सब्ज़ियों और दूध की सम्मिलित रूप से प्रोसेसिंग और विपणन करते हैं, जिससे परिवहन लागत कम होती है और बाज़ार में बेहतर दाम मिलते हैं। सरकार प्रोसेसिंग मशीनों पर 50% तक सब्सिडी दे रही है, हम किसानों को इसका लाभ उठाने के लिए प्रेरित करते हैं।’

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किसानों को फ्री ट्रेनिंग 

वे महीने में एक बार निशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करते हैं, जिसमें 30-35 किसान हिस्सा लेते हैं। ‘हम केवल 200 रुपये भोजन के लिए लेते हैं। युवाओं को यूट्यूब देखकर डेयरी शुरू करने के बजाय किसी अच्छे संस्थान से प्रशिक्षण लेकर, धैर्य के साथ काम शुरू करना चाहिए। इसमें 2-3 साल लग सकते हैं, पर स्थायी सफलता मिलेगी।’

पीएम मोदी चाहते हैं किसानों की आय डबल हो 

वो कहते हैं कि ‘मोदी जी चाह रहे हैं कि किसानों की इनकम डबल हो। किसान सरकारी योजनाओं का लाभ, प्रोसेसिंग करके ज़रूर किसानों की इनकम डबल होगी। अगर Sex Sorted Semen Facility का इस्तेमाल करेंगे तो आमदनी 4 गुना हो जाएगी। 

सुरेंद्र अवाना कहते हैं कि ‘डेयरी को किसानों को इसे उद्योग समझना चाहिए। वो आगे कहते हैं कि आज कल के युवा यूट्यूब को  देखकर डेयरी खोल लेते हैं। लेकिन सही तरह से ट्रेनिंग ना होने से उनको नुकसान हो जाता है। उनको सही तरह से ट्रेनिंग लेने, और किसी सरकारी संस्थान से सीख कर इस काम में आगे बढ़ना चाहिए। Patience  के साथ काम करें, दो तीन साल लगाएं इसमें इसके बाद ही उनको प्रोफिट मिलना शुरू होगा।’

उनके सफर के बड़े चैलेंज 

बंजर भूमि सबसे बड़ा चैलेंज था। वो कहते हैं कि ‘हमने 18 ट्यूबवेल लगवाए लेकिन पानी की परेशानी रही। उन्होंने सरकारी सहायता से तालाब बनवाया और आज आप खुद देख रहे हैं सब। वो आगे कहते हैं कि अगर कोई जूनुन के साथ कोई भी चैलेंज स्वीकार करें वो ज़रूर पूरा होता है।’

सुरेद्र जी आगे कहते हैं, ‘जिस तरह से एक फौजी अपनी ड्यूटी का Punctual होता है। वैसे ही किसान होता है, मौसम कैसा भी हो उसको अपना काम करना होता है। तेज धूप से लेकर तापमान में गिरावट तक में किसान को काम करना होता है। उन्होंने बताया कि उनको देसी गायों की नस्ल सुधार के लिए गोपाल रत्न अवॉर्ड मिला था,जो राजस्थान का पहला अवॉर्ड था।’ 

खेती को बिज़नेस बनाएं: आय बढ़ाने का मंत्र

सुरेंद्र अवाना ज़ोर देकर कहते हैं, ‘जब तक किसान खेती को बिजनेस मॉडल नहीं बनाएगा, आय नहीं बढ़ेगी। हमें अपनी उपज को सीधे बाज़ार से जोड़ना होगा, प्रोसेसिंग कर मूल्यवर्धन करना होगा। हमारी डेयरी में जुड़े किसानों को दूध के 40 रुपये लीटर मिलते हैं, जो पारंपरिक खेती से कहीं अधिक है।’

भविष्य की योजना: एग्रो-टूरिज्म

उनकी निगाह अब Agro-tourism पर है। ‘हमने 12 कमरे, ऊंट, घोड़े और नाव की सुविधा विकसित की है। शहरी बच्चों को ग्रामीण जीवन और कृषि से जोड़ने से उनका संपूर्ण विकास होगा।’

सम्मान और पहचान

सुरेंद्र अवाना की इस अनूठी यात्रा को राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार, आईसीएआर के जगजीवन राम अभिनव किसान पुरस्कार सहित देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाज़ा जा चुका है। अब ‘किसान सम्मान 2025’ उनकी लिस्ट में एक और मील का पत्थर है।

सुरेंद्र अवाना का संदेश साफ है- चुनौतियां होंगी, पर इनोवेशन, सरकारी योजनाओं का समुचित उपयोग, सहयोग और व्यवसायिक नज़रिए से कृषि को न केवल लाभ का स्रोत बनाया जा सकता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अहम योगदान दिया जा सकता है। उनकी कहानी हर उस किसान के लिए प्रेरणा है, जो बदलाव की शुरुआत अपने खेत से करना चाहता है।

 

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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