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केरल का तटीय शहर कोची (Kochi, the coastal city of Kerala) एक बार फिर दुनिया की नजरों में होगा। यहां 29 और 30 जनवरी, 2026 को 7वां भारत अंतर्राष्ट्रीय सीवीड एक्सपो और शिखर सम्मेलन (7th India International Seaweed Expo and Summit) आयोजित होगा, जिसे दुनिया के Seaweed industry के सबसे बड़े जमावड़ों में से एक माना जा रहा है। ये आयोजन भारत की ‘नीली अर्थव्यवस्था’ (Blue Economy) पर बढ़ते जोर और समुद्री शैवाल क्षेत्र में उभरते अपार अवसरों का आईना है।
ब्राजील से स्वीडन तक का सफ़र
इस शिखर सम्मेलन में ब्राजील, श्रीलंका, नीदरलैंड्स और स्वीडन सहित कई देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। रिसर्चर्स, उद्योग संगठन और गवर्नमेंट बॉडी, प्रदर्शनियों और सहयोग के ज़रीये से एक-दूसरे से जुड़ेंगे, जिससे कोची इस क्षेत्र में Global Networking and Innovation का सेंटर बन जाएगा।
मजबूत आधार: देश के प्रमुख संस्थानों का सहयोग
इस महत्वपूर्ण आयोजन का आधार देश के तीन प्रतिष्ठित संस्थान हैं, जो अपने-अपने क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाते हैं:
1.भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद: केंद्रीय समुद्रीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-सीएमएफआरआई) (Indian Council of Agricultural Research-Central Marine Fisheries Research Institute (ICAR-CMFRI) )
2.इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) (Indian Chamber of Commerce (ICC)
3.वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद: केंद्रीय लवण एवं समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीएसएमसीआरआई) (Council of Scientific and Industrial Research- Central Salt and Marine Chemicals Research Institute (CSIR-CSMCRI))
समुद्री जैव प्रौद्योगिकी, जलीय कृषि और औद्योगिक नवाचार में इन संस्थानों की Joint expertise इस कार्यक्रम की Scientific relevance को दिखाती है।
मेन फोकस: Innovation, Sustainability and Employment
एक्सपो के मुख्य सत्र इन चार प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित होंगे:
1.समुद्री शैवाल खेती की आधुनिक तकनीकें (Modern techniques of seaweed farming): कैसे वैज्ञानिक तरीकों से उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।
2.प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन (Processing And Value Addition): शैवाल से कैसे और ज्यादा मूल्यवान उत्पाद बनाए जा सकते हैं।
4.औद्योगिक अनुप्रयोग (Industrial Applications): यहां सबसे रोमांचक संभावनाएं हैं- पोषक आहार (न्यूट्रास्यूटिकल्स), जैव ईंधन, बायोप्लास्टिक (प्लास्टिक का टिकाऊ विकल्प), स्वास्थ्य उत्पाद और जैविक उर्वरक।
5.तटीय आजीविका विकास (Coastal Livelihood Development): इस पूरे क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण पहलू- कैसे समुद्री शैवाल की खेती तटीय समुदायों के लिए अतिरिक्त आय और रोजगार का स्रोत बन सकती है।
भारत के लिए अवसरों का सुनहरा दरवाज़ा
ये शिखर सम्मेलन एक ऐसे वक्त में आयोजित हो रहा है जब भारत के तटीय क्षेत्र, ख़ासतौर से दक्षिण और पश्चिम, समुद्री शैवाल की खेती का विस्तार कर रहे हैं।
समुद्री शैवाल क्यों है फ्यूचर?
वैश्विक स्तर पर पोषण, पैकेजिंग, स्वास्थ्य उत्पादों और उर्वरकों के लिए समुद्री शैवाल की मांग तेजी से बढ़ रही है। भारत का लक्ष्य घरेलू क्षमता बढ़ाना और बड़े पैमाने पर निवेश को आमंत्रित करना है। इस एक्सपो की मेजबानी कोची को समुद्री नवाचार, शोध सहयोग और नीली अर्थव्यवस्था में उद्योग नेतृत्व का केंद्र बना देगी।
आयोजन के बारें में:
- आयोजन: 7वां भारत अंतर्राष्ट्रीय सीवीड एक्सपो एवं शिखर सम्मेलन
- डेट: 29-30 जनवरी, 2026
- प्लेस: कोची, केरल
- प्रमुख संस्थान: आईसीएआर–सीएमएफआरआई
- हिस्सा लेने वाले देश: ब्राजील, श्रीलंका, स्वीडन, नीदरलैंड्स
कोची में होने वाला ये समागम न केवल समुद्री शैवाल उद्योग का भविष्य तय करेगा, बल्कि भारत की ‘नीली क्रांति’ में एक मजबूत आधारस्तंभ भी साबित होगा।
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