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दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित Kisan of India Samman 2025 बेहद ख़ास रहा। जहां देशभर से आए सात प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया, वहीं मंच पर किसानों का हौसला बढ़ाने पहुंचे अभिनेता राजेश कुमार उन्होंने न सिर्फ़ पुरस्कार वितरण किया बल्कि खेती, मिट्टी और प्राकृतिक जीवनशैली पर अपने विचार साझा कर सबका दिल जीत लिया।
मनोरंजन से मिट्टी तक – अभिनेता राजेश कुमार का सफ़र
करीब 20 साल पहले गया जिले के बरमा गांव से निकलकर मुंबई पहुंचे अभिनेता राजेश कुमार आज टीवी जगत का जाना-माना नाम हैं। उन्होंने ‘साराभाई वर्सेस साराभाई’, ‘मिस्टर एंड मिसेज शर्मा इलाहाबाद वाले’, ‘नीली छतरी वाले’ जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों में अपनी अदाकारी से हर घर में पहचान बनाई।
लेकिन अभिनय के साथ-साथ उनका मन मिट्टी की ओर भी खिंचता गया। उन्होंने महसूस किया कि मनोरंजन की दुनिया जितनी जरूरी है, उतनी ही जरूरी है प्राकृतिक खेती जैसी पहल जो धरती और समाज दोनों को बचा सके।
प्राकृतिक खेती की ओर लौटे अभिनेता राजेश कुमार
राजेश कुमार बताते हैं कि मिट्टी की गिरती गुणवत्ता, जल की कमी और रासायनिक खेती के बढ़ते प्रभाव ने उन्हें गहराई से सोचने पर मजबूर किया। उन्होंने कहा –
“हमारे पास जानकारी तो बहुत है, पर जागरूकता बहुत कम है। अगर यही स्थिति रही तो आने वाले वर्षों में भारत का बड़ा हिस्सा रेगिस्तान में बदल जाएगा। यही सोचकर मैंने खेती शुरू करने का निर्णय लिया।”
उन्होंने रासायनिक खादों से दूरी बनाकर केवल ऑर्गेनिक खाद और प्राकृतिक खेती तकनीक अपनाई। उनका फार्म आज ‘Farm to Table’ मॉडल पर काम कर रहा है – जहां खेत से सब्जियां सीधे उपभोक्ताओं के घर तक पहुंचती हैं।
कला के साथ खेती – दोनो में संतुलन का उदाहरण
लोगों के मन में सवाल था कि क्या अभिनेता राजेश कुमार ने एक्टिंग छोड़ दी है? इस पर वे हंसते हुए कहते हैं,
“मैंने कुछ छोड़ा नहीं, बस जोड़ा है। इंसान मल्टी-टास्किंग कर सकता है। मैं एक्टिंग भी करता हूं और खेती भी। दोनों से मुझे सुकून मिलता है।”
उनका यह दृष्टिकोण बताता है कि अगर इच्छाशक्ति हो तो शहर की चमक और मिट्टी की खुशबू — दोनों के बीच संतुलन संभव है।
Kisan of India Samman 2025 में किसानों के बीच बने प्रेरणा स्रोत
कार्यक्रम के दौरान अभिनेता राजेश कुमार ने सात प्रगतिशील किसानों को Kisan of India Samman 2025 से सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि ये किसान असली नायक हैं, जो खेतों में काम करके न सिर्फ़ अपना बल्कि देश का भविष्य संवार रहे हैं।
उन्होंने किसानों से कहा –
“मैं सिर्फ़ मंच से नहीं बोलना चाहता, बल्कि आपके साथ खेत में खड़ा होना चाहता हूं। अगर हम सब मिलकर मिट्टी की सेहत सुधारें तो आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती को बचा सकते हैं।”
उनकी इस बात पर हॉल तालियों से गूंज उठा।
प्राकृतिक खेती पर बोले अभिनेता राजेश कुमार
कार्यक्रम में उन्होंने प्राकृतिक खेती को भविष्य की जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि मिट्टी में जीवंतता बनाए रखने के लिए केमिकल्स की जगह जीवामृत, घनजीवामृत और ऑर्गेनिक खाद का उपयोग जरूरी है। उन्होंने बताया कि अपने खेतों में उन्होंने बिना किसी रासायनिक खाद के बेहतरीन सब्जियां उगाई हैं, जिन्हें लोग “ब्रांडेड वेजिटेबल्स” की तरह पहचानने लगे हैं।
“लोग अब सब्जियों की भी ब्रांड वैल्यू तय करेंगे – जैसे वे अन्य चीज़ों की करते हैं। मैं चाहता हूं कि हर किसान अपने उत्पाद को पहचान दिलाए और सीधे ग्राहकों तक पहुंचाए।”
अभिनेता राजेश कुमार का संदेश – कृषि है देश की रीढ़
उन्होंने कहा कि किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि प्रकृति के रक्षक भी हैं। उनका मानना है कि जब तक किसान की स्थिति मज़बूत नहीं होगी, देश की अर्थव्यवस्था भी स्थिर नहीं रह सकती। उन्होंने यह भी बताया कि वे गया जिले में लोगों को नदियों की बदहाली और मिट्टी की गिरावट के प्रति जागरूक करने की मुहिम चला रहे हैं।
“लोगों को जोड़ना और खेती करना दोनों कठिन हैं, लेकिन बदलाव की शुरुआत हमेशा एक कदम से होती है — और वह कदम अब उठ चुका है।”
मनोरंजन से मिट्टी तक – एक नई सोच की शुरुआत
अभिनेता राजेश कुमार ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि खेती सिर्फ़ पेशा नहीं, बल्कि जीवन की जड़ है। अगर हम इसे समझ लें तो न सिर्फ़ हमारी सेहत, बल्कि समाज की आत्मा भी सुरक्षित रहेगी। उनकी उपस्थिति ने Kisan of India Samman 2025 को एक नई ऊंचाई दी — जहां कला, खेती और कर्म का सुंदर संगम दिखा।
निष्कर्ष
अभिनेता राजेश कुमार की यह कहानी ये साबित करती है कि बदलाव केवल विचारों से नहीं, बल्कि कर्म से आता है। उन्होंने दिखाया कि अगर दिल में लगन हो तो फिल्मी दुनिया का सितारा भी खेतों में उगती फ़सलों के बीच नई प्रेरणा बन सकता है। कला और खेती के इस संगम ने “Kisan of India Samman 2025” को एक यादगार आयोजन बना दिया — जहां मिट्टी, मेहनत और मन, तीनों का सच्चा सम्मान हुआ।
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