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भारत सरकार ने कृषि क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी पायलट प्रोजेक्ट (Weather Forecast pilot project) की शुरूआत की है। इस पहल के तहत Artificial Intelligence (AI) की मदद से मानसून के स्थानीय आगमन की सटीक भविष्यवाणी (Weather Forcast) की गई और इसकी जानकारी सीधे 13 राज्यों के 3 करोड़ 88 लाख से अधिक किसानों तक पहुंचाई गई।
क्या है ये नई तकनीक?
ये कोई साधारण मौसम पूर्वानुमान (Weather Forecast pilot project) नहीं है। इसे ‘स्थानीय मानसून आगमन’ (‘Local monsoon arrival’) का विशेष पूर्वानुमान कहा जाता है। किसानों के लिए बुआई की सही तारीख तय करना सबसे अहम होता है। एक दिन की देरी या जल्दबाजी पूरी फसल को चौपट कर सकती है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए, विकास नवाचार प्रयोगशाला-भारत (Vikas Innovation Lab-India) के सहयोग से AI-based models तैयार किया गया।
इस मॉडल ने गूगल के ‘न्यूरलजीसीएम’, यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट्स (Google’s ‘NeuralGCM’, European Centre for Medium-Range Weather Forecasts) यानि ECMWF के AIFS सिस्टम और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 125 सालों के ऐतिहासिक Rainfall Data को मिलाकर एक शक्तिशाली ‘Blended Model’ बनाया। यानी, दुनिया की सबसे एडवांस तकनीक और देश के अपने 125 साल के अनुभव का जब़रदस्त मेल।
कैसे मिली जानकारी किसानों तक?
इन Complex Forecasts को आम किसान की समझ में आने लायक बनाया गया। ‘m-Kisan’ portal के जरिए इन्हें एसएमएस द्वारा सीधे किसानों के मोबाइल फोन पर हिंदी, ओडिया, मराठी, बांग्ला और पंजाबी – इन पांच क्षेत्रीय भाषाओं में भेजा गया। ध्यान देने वाली बात ये है कि इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए किसानों से कोई फीस नहीं ली गई और न ही उन्हें किसी तरह की वित्तीय सहायता दी गई।
क्या मिले नतीजे? क्या बदलाव आया?
भेजे गए पूर्वानुमानों के बाद, मध्य प्रदेश और बिहार में किसान कॉल सेंटरों के माध्यम से Telephonic survey किए गए। इसके नतीजे हैरान करने वाले थे:
- 31फीसदी से 52 फीसदी किसानों ने इन भविष्यवाणियों के आधार पर अपनी बुआई के निर्णयों में बदलाव किया।
- इस बदलाव में मुख्य रूप से खेत की तैयारी का समय बदलना, बुआई की तारीख सही करना, और यहां तक कि फसल व उर्वरकों के चुनाव में भी बदलाव शामिल था।
क्यों है ये बड़ी ख़बर?
कृषि मंत्रालय में राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने आज लोकसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी। इस पायलट की सफलता के मायने बहुत गहरे हैं-
1.ये तकनीक भारत को मानसून पर निर्भर कृषि में एक नई वैज्ञानिक सोंच देती है।
2. सटीक पूर्वानुमान से फसल बर्बाद होने, कर्ज और आत्महत्या के जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी।
3.सही समय पर बुआई से पैदावार और गुणवत्ता दोनों बेहतर होंगे।
4.ये साबित करता है कि मॉर्डर्न AI तकनीक गांव-गांव के खेत तक पहुंच सकती है और जीवन बदल सकती है।
ये पहल सिर्फ एक ‘Pilot Project’ नहीं, बल्कि भारतीय कृषि के भविष्य की एक मजबूत नींव है। ये वो दिशा है जहां विज्ञान और तकनीक सीधे खेत और किसान की सेवा में लग जाते हैं। अगर इसका विस्तार होता है, तो यह भारत को Food security and agricultural prosperity के नए शिखर पर ले जा सकता है।
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