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उत्तराखंड के पहाड़ों से निकले दो युवा इंजीनियर सूरज और उनके साथी ने साल 2020 में जिस स्टार्टअप की नींव रखी थी, आज वो ‘भूकृपा फार्म’ (‘Bhu Krupa Farm’ ) न सिर्फ स्थानीय किसानों के लिए आमदनी का ज़रिया बन गया है, बल्कि पहाड़ी सब्जियों और जड़ी-बूटियों की विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने का पुल भी बन गया है। हाल ही में ‘Kisan of India Samman 2025’ के पैनल में शामिल होकर अपनी जर्नी शेयर करने वाले सूरज की कहानी पहाड़ की चुनौतियों को अवसर में बदलने की एक जिंदा मिसाल है।
इंजीनियरिंग छोड़ पहाड़ की ओर रुख
पौड़ी गढ़वाल के रहने वाले सूरज ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब नौकरी के ऑप्शन देखे, तो उनके मन में एक सवाल उठा कि अगर पहाड़ों से पलायन अब नहीं रोका गया, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी संस्कृति और संपदा सिर्फ एक ‘याद’ बनकर रह जाएगी। यही सोच उनके स्टार्टअप ‘Bhu Krupa Farm’ की प्रेरणा बनी। उन्होंने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर 2020 में मशरूम की खेती से शुरुआत की, क्योंकि इसमें कम निवेश में अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना थी।
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मशरूम से आगे बढ़ी यात्रा
शुरुआत मशरूम प्रोडक्शन और उसकी प्रोसेसिंग से हुई। लेकिन सूरज की नज़र पहाड़ की उन अनदेखी संपदाओं पर थी, जो या तो वनस्पति रूप में बर्बाद हो जाती थीं या फिर उनका सही मूल्य नहीं मिल पाता था। उन्होंने लिंगड़ा (पहाड़ी अंजीर), तिमला, शिमल, गलगल (पहाड़ी नींबू) और कुटकी, जटामासी जैसी जड़ी-बूटियों पर फोकस किया। इन पारंपरिक पहाड़ी प्रोडक्ट्स को प्रोसेस करके अचार, मसाले और स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों में तब्दील किया गया।
‘Bhu Krupa Farm’ बना ब्रांड, किसान बने साथी
आज ‘Bhu Krupa Farm’ मशरूम, शहद, पहाड़ी मसाले और कई तरह के अचारों का एक भरोसेमंद ब्रांड बन चुका है। सूरज की सबसे बड़ी सफलता स्थानीय किसानों और महिलाओं को इस Value Chain से जोड़ना रहा। वो सीधे गांव के लोगों से उनकी फसल खरीदते हैं। उन्होंने बताया, कि हमारा मकसद सिर्फ अपना बिज़नेस बढ़ाना नहीं, बल्कि पहाड़ में रोजगार के सोर्स बनाना है ताकि पलायन रुके।
चारधाम यात्रा को बनाया अवसर
सूरज और उनकी टीम ने चारधाम यात्रा मार्ग को एक बड़े अवसर के रूप में देखा। उन्होंने गांव-गांव की 1000 से 1500 महिलाओं को ट्रेनिंग देना शुरू किया कि वे स्थानीय मोटे अनाज (मिलेट्स) जैसे झंगोरा, मंडुआ वगैरह से प्रसाद के रूप में बिकने वाले लड्डू, बर्फी, कुकीज बना सकें। इससे दोहरा फायदा हुआ- यात्रियों को प्योर पहाड़ी प्रसाद मिलने लगा और गांव की महिलाओं को सीधी आमदनी होने लगी।
पहाड़ की संपदा, देश का सम्मान
किसान ऑफ इंडिया (‘Kisan of India Samman 2025’) के पैनल में शामिल होना सूरज और भूकृपा फार्म के लिए एक गर्व का पल था। उनकी कहानी साबित करती है कि पहाड़ की चुनौतियों में भी विशाल अवसर छिपे हैं। बस ज़रूरत है सूरज जैसे जुनून, स्थानीय संसाधनों के ज्ञान और आधुनिक तकनीक के मेल की। आज उनका स्टार्टअप न सिर्फ एक बिज़नेस है, बल्कि उत्तराखंड की कृषि विरासत को सहेजने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक सामाजिक अभियान भी है। उनकी सफलता युवाओं के लिए एक संदेश है ‘कभी भी अपनी जड़ों से दूरी, सफलता की राह में बाधक नहीं बल्कि सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।’
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।
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