Agriculture Education Day: वो पहले राष्ट्रपति जिनकी पहली प्राथमिकता थी ‘किसान और खेत’

1947 में जब देश बंटवारे की त्रासदी और खाद्य संकट से जूझ रहा था, तब डॉ. राजेंद्र प्रसाद (Dr. Rajendra Prasad) कृषि मंत्रालय की कमान संभालकर राष्ट्र को भुखमरी से बचाने का ऐतिहासिक काम किया। डॉ. राजेंद्र प्रसाद (Dr. Rajendra Prasad) के जन्म दिवस को भारत में Agriculture Education Day सेलिब्रेट किया जाता है। 

Agriculture Education Day: वो पहले राष्ट्रपति जिनकी पहली प्राथमिकता थी ‘किसान और खेत’

3 दिसंबर, 1884 को जन्मे डॉ. राजेंद्र प्रसाद (Dr. Rajendra Prasad) न केवल भारत के पहले राष्ट्रपति थे, बल्कि स्वतंत्र भारत के पहले कृषि मंत्री भी थे। उनका ये दोहरा पद संयोग नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति थी। गांधीजी के सच्चे अनुयायी और ‘ग्राम स्वराज’ के पैरोकार प्रसाद जानते थे कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है और इसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि है। 1947 में जब देश बंटवारे की त्रासदी और खाद्य संकट से जूझ रहा था, तब उन्होंने कृषि मंत्रालय की कमान संभालकर राष्ट्र को भुखमरी से बचाने का ऐतिहासिक काम किया। डॉ. राजेंद्र प्रसाद (Dr. Rajendra Prasad) के जन्म दिवस को भारत में Agriculture Education Day सेलिब्रेट किया जाता है। 

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कृषि मंत्री के रूप में योगदान: नींव का पत्थर

डॉ. प्रसाद के कार्यकाल ने आधुनिक भारतीय कृषि की बुनियाद रखी। उन्होंने- 

1.खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता दी: राशनिंग व्यवस्था को मज़बूत किया और अनाज के उत्पादन व वितरण पर फोकस किया।

2.संस्थागत ढांचा बनाया: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) को मजबूती देना, कृषि विश्वविद्यालयों के विचार को बढ़ावा देना।

3.ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर जोर: उनका मानना था कि कृषि सिर्फ अनाज पैदा करने का ज़रीया नहीं, बल्कि गांवों की संपूर्ण आर्थिक-सामाजिक प्रगति का आधार है।

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कृषि शिक्षा का महत्व और आज का  वक्त 

आज कृषि शिक्षा सिर्फ खेती सिखाने तक सीमित नहीं रह गई है। यह एक बहु-आयामी विज्ञान है जिसमें जलवायु परिवर्तन, मृदा स्वास्थ्य, ड्रोन टेक्नोलॉजी, बायोटेक, एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट और मार्केट लिंकेज शामिल हैं। डॉ. प्रसाद का सपना था कि किसान सिर्फ मेहनतकाश न रहें, बल्कि वैज्ञानिक और बिजनेसमैन भी बनें।

कृषि शिक्षा दिवस का उद्देश्य

ये दिवस सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि एक पुनर्विचार का दिन है। इसका उद्देश्य है:

  • युवाओं को कृषि के व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करना।
  • कृषि शिक्षा को रोजगारोन्मुखी और नवाचार से जोड़ना।
  • सस्टेनेबल और प्रॉफिटेबल फार्मिंग के नए मॉडल्स विकसित करना।

कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

1.डॉ. प्रसाद स्वतंत्र भारत की पहली कैबिनेट के एकमात्र सदस्य थे जिनके पास दो मंत्रालय थे – कृषि और खाद्य।

2.उन्होंने 1948 में ‘ग्रामीण भारत’ नामक पत्रिका शुरू की, जो कृषि जागरूकता का माध्यम थी।

3.भारत में पहला कृषि विश्वविद्यालय (GBPUAT, पंतनगर) 1960 में, उनकी दूरदर्शिता का ही परिणाम था।

 

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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