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Mango of the Year: बिहार में इस वर्ष आम को ‘मैंगो ऑफ़ ईयर’ का दर्जा दिया जा रहा है, लेकिन इसके साथ ही उत्पादन में कमी की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि कम उत्पादन के कारण बाजार में आम के बेहतर दाम मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, फिर भी फलों पर बढ़ते कीट प्रकोप, खासकर फल मक्खी, एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आम की फसल पर कई तरह के कीट हमला करते हैं, लेकिन फल मक्खी सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाला कीट है। यह कीट आम के फल के अंदर अंडे देती है, जिससे फल अंदर ही अंदर सड़ने लगता है और उसकी गुणवत्ता व बाज़ार कीमत दोनों घट जाती हैं। यदि समय रहते इसका नियंत्रण नहीं किया गया, तो किसानों को 30 से 60 प्रतिशत तक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
लाइफटाइम ट्रैप बना कारगर समाधान
फल मक्खी के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए ‘लाइफटाइम ट्रैप’ को एक प्रभावी और सुरक्षित उपाय के रूप में अपनाया जा रहा है। इस ट्रैप में आकर्षित होकर फल मक्खी फंस जाती है और मर जाती है, जिससे उसके प्रजनन की प्रक्रिया रुक जाती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि रासायनिक दवाओं के मुकाबले यह तरीका अधिक सुरक्षित और लंबे समय तक प्रभावी है।
कटिहार में बड़े स्तर पर आम की खेती
कटिहार जिले में आम की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। यहां 10,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में आम के बागान फैले हुए हैं और 5 लाख से ज्यादा पौधे मौजूद हैं। ऐसे में किसानों के बीच लाइफटाइम ट्रैप का वितरण तेज़ी से किया जा रहा है। विशेषज्ञों की सलाह है कि एक पेड़ पर कम से कम 8 ट्रैप लगाए जाएं। औसतन एक एकड़ में 40 पौधे होते हैं, जिसके अनुसार लगभग 200 ट्रैप की जरूरत पड़ती है।
क्या कहती हैं अधिकारी?
कृषि विभाग की पौधा संरक्षण इकाई की सहायक निदेशक रोमी कुमारी ने बताया कि लाइफटाइम ट्रैप न केवल फल मक्खी के नियंत्रण में मददगार है, बल्कि यह पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए भी सुरक्षित है। उन्होंने कहा, “रासायनिक दवाओं के बार-बार छिड़काव से लागत बढ़ती है और इसका दुष्प्रभाव मानव शरीर व पर्यावरण पर भी पड़ता है। इसके विपरीत, ट्रैप एक बार लगाने पर लंबे समय तक प्रभावी रहता है।”
सरकार दे रही 75% अनुदान
बिहार सरकार द्वारा इस ट्रैप पर 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। किसान डीबीटी पोर्टल के माध्यम से पौधा संरक्षण विभाग में ऑनलाइन आवेदन कर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
जैविक तरीकों को अपनाने की अपील
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे रासायनिक दवाओं के बजाय जैविक और सुरक्षित उपायों को प्राथमिकता दें, ताकि बेहतर उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सके। ‘मैंगो ऑफ़ ईयर’ के इस दौर में जहां एक ओर किसानों को बेहतर कीमत की उम्मीद है, वहीं फल मक्खी का बढ़ता खतरा उनके लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। ऐसे में समय रहते वैज्ञानिक और सुरक्षित उपाय अपनाना ही फसल और मुनाफे़ दोनों की सुरक्षा की कुंजी साबित होगा।

