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मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में एक ऐसा बदलाव देखने को मिल रहा है, जिसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। यहां बहेड़ा (Baheda) अब सिर्फ़ एक जंगल में मिलने वाला फल नहीं रहा, बल्कि यह किसानों और ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का मज़बूत जरिया बन गया है। ख़ासकर कृषि नमामि पहल से जुड़े समूहों ने बहेड़ा को एक नई पहचान दिलाई है।
पहले नज़रअंदाज, अब बन गया कमाई का साधन
कुछ समय पहले तक बहेड़ा (Baheda) को ज़्यादा महत्व नहीं दिया जाता था। ग्रामीण इसे सामान्य वन उत्पाद मानकर छोड़ देते थे। लेकिन जब लोगों को पता चला कि बहेड़ा आयुर्वेद में बहुत उपयोगी है, तो इसकी मांग बढ़ने लगी।
अब ग्रामीण खाली समय में बहेड़ा का संग्रहण कर रहे हैं और इसे बेचकर अच्छी आमदनी कमा रहे हैं। इस बदलाव ने गांवों में एक नई आर्थिक गतिविधि को जन्म दिया है।
महिलाओं की भागीदारी से बढ़ा दायरा
खंडवा जिले में बहेड़ा (Baheda) के संग्रहण और बिक्री में महिलाओं की भागीदारी ख़ास तौर पर देखने को मिल रही है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अब बड़े स्तर पर बहेड़ा इकट्ठा कर रही हैं।
इन महिलाओं का कहना है कि पहले उनके पास आय का सीमित साधन था, लेकिन अब बहेड़ा ने उन्हें एक अतिरिक्त कमाई का मौक़ा दिया है। इससे उनके जीवन स्तर में भी सुधार हुआ है।
कृषि नमामि पहल से मिला सहारा
बहेड़ा (Baheda) को आय का स्रोत बनाने में ‘कृषि नमामि आजीविका फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी’ की अहम भूमिका रही है। इस पहल के तहत बहेड़ा की व्यवस्थित खरीदी शुरू की गई, जिससे ग्रामीणों को बाजार की चिंता नहीं करनी पड़ती।
अब किसान और महिलाएं आसानी से बहेड़ा बेच पा रहे हैं और उन्हें इसका सही दाम भी मिल रहा है। इस व्यवस्था ने पूरे मॉडल को मज़बूत बनाया है।
बढ़ती मांग से मिल रहा फ़ायदा
आयुर्वेद में बहेड़ा (Baheda) का उपयोग त्रिफला और तेल बनाने में किया जाता है, जिससे इसकी बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है। यही कारण है कि अब ग्रामीण इसे एक कैश क्रॉप की तरह देख रहे हैं।
बहेड़ा की बढ़ती मांग ने इसे एक स्थायी आय का स्रोत बना दिया है। इससे ग्रामीणों को नियमित रूप से कमाई का अवसर मिल रहा है।
बड़े स्तर पर हो रहा संग्रहण
निमाड़ क्षेत्र में बहेड़ा (Baheda) का संग्रहण तेजी से बढ़ा है। जानकारी के अनुसार, यहां करीब 1000 टन तक बहेड़ा का संग्रह किया जा चुका है। यह आंकड़ा इस मॉडल की सफलता को साफ़ तौर पर दिखाता है।
आगे के लिए इससे भी ज़्यादा संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है, जिससे अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही मज़बूती
खंडवा में बहेड़ा (Baheda) ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने में अहम भूमिका निभाई है। अब लोग इसे एक अतिरिक्त काम के रूप में अपनाकर अपनी आय बढ़ा रहे हैं।
यह पहल दिखाती है कि अगर सही दिशा और बाजार मिले, तो बहेड़ा जैसे साधारण उत्पाद भी बड़ी कमाई का जरिया बन सकते हैं।
आगे बढ़ते कदम और नई उम्मीद
आज बहेड़ा (Baheda) खंडवा के ग्रामीणों के लिए एक नई उम्मीद बन चुका है। इससे न केवल उनकी आय बढ़ रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने का मौक़ा भी मिल रहा है। इस तरह के प्रयास आने वाले समय में अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक उदाहरण बन सकते हैं, जहां स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग कर लोगों की ज़िंदगी बदली जा सकती है।
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Pic Credit: PB-SHABD

