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छत्तीसगढ़ के कोरबा ज़िले में खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। यहां के किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर सब्ज़ी की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। इस बदलाव के पीछे केंद्र सरकार की राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना की बड़ी भूमिका है, जिसने किसानों को नई तकनीक और संसाधनों से जोड़ा है।
सब्ज़ी की खेती से बढ़ रही किसानों की आय
कोरबा जैसे आदिवासी बहुल ज़िले में राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत किसानों को सब्ज़ी उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे सब्ज़ी की खेती अब किसानों के लिए एक भरोसेमंद आय का स्रोत बन चुकी है।
ग्राम पंचायत कोरकोमा के किसान मेलाराम केशरवानी इस बदलाव का एक बड़ा उदाहरण हैं। उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत मिलने वाली सुविधाओं का उपयोग करते हुए सब्ज़ी की खेती को अपनाया और आज वे हर महीने 60 से 70 हज़ार रुपये तक की आय कमा रहे हैं।
आधुनिक तकनीक से खेती में आया सुधार
राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत किसानों को सोलर पंप, सेट-नेट और पैक हाउस जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन सुविधाओं से सब्ज़ी की खेती करना पहले से आसान और सस्ता हो गया है।
मेलाराम केशरवानी बताते हैं कि सोलर पंप की मदद से उनका बिजली ख़र्च पूरी तरह ख़त्म हो गया है। इससे उनकी बचत बढ़ी है और खेती में मुनाफ़ा भी ज़्यादा हुआ है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के कारण किसानों को आधुनिक तकनीक का लाभ मिल रहा है।
रोज़गार के नए अवसर भी बने
राष्ट्रीय बागवानी मिशन का असर सिर्फ़ किसानों की आय तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे गांव में रोज़गार के अवसर भी बढ़े हैं। मेलाराम के खेतों में करीब 12 लोग काम कर रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोज़गार भी मिल रहा है।
इस तरह सब्ज़ी की खेती अब केवल एक खेती नहीं, बल्कि गांव के लोगों के लिए रोज़गार का साधन भी बनती जा रही है।
उद्यान विभाग की पहल से बढ़ा रकबा
कोरबा ज़िले में उद्यान विभाग की सक्रियता से राष्ट्रीय बागवानी मिशन को ज़मीन पर उतारा जा रहा है। सहायक संचालक उद्यान पतराम सिंह के अनुसार, ज़िले में 5 हज़ार से अधिक किसान रबी सीजन में सब्ज़ी की खेती कर रहे हैं।
राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत दी जा रही सुविधाओं से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ है। इससे किसानों को बाज़ार में बेहतर क़ीमत मिल रही है और उनकी आय में लगातार वृद्धि हो रही है।
कम लागत में ज़्यादा मुनाफ़ा
राष्ट्रीय बागवानी मिशन की सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि इससे खेती की लागत कम हो रही है और मुनाफ़ा बढ़ रहा है। सब्ज़ी की खेती में कम समय में अच्छी पैदावार मिलती है, जिससे किसानों को जल्दी आय प्राप्त होती है।
सोलर पंप और अन्य सुविधाओं के कारण ख़र्च कम हुआ है, जिससे किसान ज़्यादा बचत कर पा रहे हैं। यही वजह है कि अब अधिक किसान इस योजना से जुड़ने के लिए आगे आ रहे हैं।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते किसान
कोरबा ज़िले में राष्ट्रीय बागवानी मिशन ने किसानों को आत्मनिर्भर बनने का मौका दिया है। अब किसान सब्ज़ी की खेती के जरिए हर साल लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं। यह पहल दिखाती है कि सही योजना और तकनीक के साथ खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के कारण किसानों का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे नई दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
गांव में खेती से बदल रहा भविष्य
आज कोरबा के गांवों में राष्ट्रीय बागवानी मिशन एक सकारात्मक बदलाव का प्रतीक बन चुका है। सब्ज़ी की खेती ने किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है और उन्हें बेहतर जीवन की ओर ले जा रही है।
यह मॉडल अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है, जहां किसान आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं के सहयोग से अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
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Pic Credit: PB-SHABD

