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Natural Farming को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार के कदम अब असर दिखाने लगे हैं। बढ़े हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और बेहतर बाज़ार व्यवस्था के चलते किसानों को उनकी उपज का अच्छा दाम मिल रहा है। खासतौर पर मंडी जिले में प्राकृतिक खेती से जुड़ने वाले किसानों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिससे न केवल उनकी आय में सुधार हुआ है, बल्कि टिकाऊ कृषि की दिशा में भी मजबूत पहल देखने को मिल रही है।
Natural Farming पर नई कृषि नीति का दिखने लगा असर
Natural Farming को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास अब ज़मीन पर असर दिखाने लगे हैं। राज्य में प्राकृतिक तरीके से उगाए गए अनाज पर देशभर में सबसे अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय किया गया है, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है। इसका सीधा लाभ किसानों की आय में वृद्धि के रूप में सामने आ रहा है।
मंडी जिले में किसानों को मिला बड़ा आर्थिक लाभ
जिला मंडी में पिछले दो वर्षों के दौरान Natural Farming से जुड़े किसानों को करीब 78 लाख रुपये का लाभ प्राप्त हुआ है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि प्राकृतिक खेती न केवल पर्यावरण के लिए फ़ायदेमंद है, बल्कि आर्थिक रूप से भी किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है।
तेजी से बढ़ रहा किसानों का जुड़ाव
Natural Farming की ओर किसानों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। बीते तीन वर्षों में 23,291 नए किसान इस पद्धति से जुड़े हैं। इसके साथ ही जिले में प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों की कुल संख्या बढ़कर 48,380 हो गई है। यह बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि किसान अब पारंपरिक खेती से हटकर टिकाऊ विकल्पों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
MSP में वृद्धि से बढ़ा उत्साह
सरकार ने इस वर्ष के बजट में Natural Farming से उत्पादित फसलों के MSP में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। गेहूं का समर्थन मूल्य 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्की का 40 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम और हल्दी का 90 से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया गया है। इसके अलावा, पहली बार अदरक के लिए 30 रुपये प्रति किलोग्राम का MSP निर्धारित किया गया है। इस फैसले से किसानों में खासा उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि उन्हें अब अपनी उपज का बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है।
महिला किसानों की सकारात्मक प्रतिक्रिया
मंडी जिले के विभिन्न क्षेत्रों की महिला किसानों ने इस पहल का स्वागत किया है। सरकाघाट के धनालग गांव की नीलम, सुंदरनगर की प्रेमलता, बल्ह के घट्टा गांव की लीला देवी और करसोग की गीता का कहना है कि MSP में वृद्धि से उनकी आय में सुधार हो रहा है। साथ ही, इससे उन्हें प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए और अधिक प्रेरणा मिल रही है।
टिकाऊ खेती की ओर मजबूत कदम
किसानों का मानना है कि यह पहल न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ खेती को भी बढ़ावा दे रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्राकृतिक खेती भविष्य में कृषि क्षेत्र को स्थायी और लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

