Tulip cultivation बना मुनाफे़ का सौदा, पुलवामा में CSIR की नई पहल सफ़ल

Council of Scientific and Industrial Research (CSIR) पुलवामा पिछले तीन वर्षों से क्षेत्र में Tulip cultivation को बढ़ावा देने के […]

Council of Scientific and Industrial Research (CSIR) पुलवामा पिछले तीन वर्षों से क्षेत्र में Tulip cultivation को बढ़ावा देने के लिए लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहा है। वैज्ञानिक हस्तक्षेपों के माध्यम से न केवल फूलों की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है, बल्कि इसे किसानों के लिए एक फ़ायदेमंद व्यवसाय के रूप में विकसित करने की दिशा में भी ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। इस कड़ी में जिले में फ्लोरीकल्चर, विशेष रूप से ट्यूलिप की खेती के विस्तार की संभावनाओं को परखने के लिए एक व्यापक सर्वेक्षण भी किया गया है।

उन्नत किस्मों के विकास पर फ़ोकस

CSIR के वैज्ञानिकों ने ट्यूलिप की खेती को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ढालने के लिए प्रजनन कार्यक्रम (ब्रिडिंग प्रोग्राम) शुरू किए हैं। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य ऐसी उन्नत किस्में विकसित करना है, जो पुलवामा की जलवायु में बेहतर उत्पादन दे सकें और व्यावसायिक रूप से अधिक लाभदायक साबित हों। इससे स्थानीय किसानों को नई तकनीकों के साथ जुड़ने का अवसर भी मिल रहा है।

आधुनिक तकनीकों से गुणवत्ता और उत्पादन में सुधार

विशेषज्ञों द्वारा नियंत्रित परागण (कंट्रोल्ड पॉलिनेशन) जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे ट्यूलिप फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार लाया जा सके। इन वैज्ञानिक तरीकों से न केवल फूलों की क्वालिटी बेहतर हो रही है, बल्कि उत्पादन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। CSIR पुलवामा के प्रभारी शाहिद रसूल के अनुसार, इन पहलों के सकारात्मक परिणाम अब ज़मीन पर दिखाई देने लगे हैं।

Tulip cultivation : किसानों के लिए बन रहा लाभ का जरिया

ट्यूलिप की खेती आज एक हाई-वैल्यू फ्लोरीकल्चर फसल के रूप में तेजी से उभर रही है। खासकर कश्मीर घाटी जैसे ठंडे क्षेत्रों में इसकी खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है, जहां की जलवायु इसके लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है। बाजार में ट्यूलिप फूलों की बढ़ती मांग के चलते किसान इसे आय बढ़ाने के एक नए विकल्प के रूप में अपना रहे हैं।

खेती की प्रक्रिया और उपयुक्त परिस्थितियां

ट्यूलिप की खेती के लिए ठंडा मौसम जरूरी होता है, जहां 7 से 20 डिग्री सेल्सियस तापमान आदर्श माना जाता है। अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी में इसकी खेती बेहतर परिणाम देती है। ट्यूलिप बीज के बजाय बल्ब के माध्यम से उगाया जाता है, जिनका रोपण अक्टूबर से नवंबर के बीच किया जाता है। बल्बों को 6 से 8 इंच की गहराई पर और 10 से 15 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाया जाता है।

फसल के दौरान हल्की सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और रोग प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना जरूरी होता है। सही देखभाल से फूलों की गुणवत्ता और उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार होता है।

उत्पादन और आय की बढ़ती संभावनाएं

ट्यूलिप की खेती में उत्पादन की अच्छी संभावनाएं देखी जा रही हैं। एक हेक्टेयर में लगभग 2 से 3 लाख बल्ब लगाए जा सकते हैं, जिससे 2 से 2.5 लाख फूल प्राप्त होते हैं। इसके साथ ही, अगले सीजन के लिए बल्बों की संख्या भी कई गुना तक बढ़ जाती है। बाजार दरों के अनुसार किसान इस खेती से 5 से 15 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक की आय अर्जित कर सकते हैं, जो इसे एक आकर्षक व्यवसाय बनाता है।

उन्नत किस्मों की बढ़ती मांग

ट्यूलिप की कई उन्नत और व्यावसायिक किस्में उपलब्ध हैं, जिनमें सिंगल अर्ली, डबल अर्ली, ट्रायम्फ, डार्विन हाइब्रिड और लिली फ्लावर्ड प्रमुख हैं। ये किस्में अपने आकर्षक रंग, आकार और टिकाऊपन के कारण बाजार में काफी लोकप्रिय हैं। खासतौर पर ट्रायम्फ और डार्विन हाइब्रिड किस्में कट फ्लावर के रूप में अधिक मांग में रहती हैं।

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

 

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