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हिमाचल प्रदेश सरकार (Government of Himachal Pradesh) ने मछुआरों की आमदनी (fishermen’s income) को बढ़ाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। पहली बार राज्य सरकार ने जलाशयों से पकड़ी जाने वाली मछली के लिए Minimum Support Price (MSP) तय किया है। ये कदम मछुआरों के चेहरे पर मुस्कान लाने वाला है। सरकार ने मछली का MSP 100 रुपये प्रति किलो तय किया है। यानी अगर बाज़ार में मछली के दाम गिर भी जाते हैं, तो मछुआरे को 100 रुपये प्रति किलो से कम नहीं मिलेंगे। अगर नीलामी में कीमत MSP से कम रहती है, तो सरकार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए प्रति किलो 20 रुपये तक की सब्सिडी देगी।
रॉयल्टी में बड़ी कटौती
सरकार ने मछुआरों को और राहत देते हुए रॉयल्टी दरों में भी भारी कमी की है। पहले जलाशयों की मछली पर 15 फीसदी रॉयल्टी लगती थी, जिसे घटाकर 7.5 फीसदी किया गया था। अब इसे चालू वित्त वर्ष के लिए और कम करके सिर्फ 1 फीसदी कर दिया गया है। यानी मछुआरों की जेब में अब ज्यादा पैसे बचेंगे।
6 हज़ार से ज्यादा मछुआरों को फायदा
इस ऐलान से राज्य के 6,000 से अधिक जलाशय मछुआरों को सीधा फायदा मिलेगा। इनमें से ज़्यादातर मछुआरे छोटे स्तर पर मछली पकड़कर अपना गुजर-बसर करते हैं। अब उनकी शुद्ध कमाई बढ़ेगी और वे आत्मनिर्भर बनेंगे।
मुख्यमंत्री के बजट का हिस्सा
मत्स्य विभाग के अनुसार, ये योजना मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू (Chief Minister Sukhwinder Singh Sukhu) द्वारा बजट 2026-27 में की गई घोषणा से जुड़ी है। इसे ज़मीन पर लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार का मुख्य लक्ष्य बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव के असर को कम करना है।
बिचौलियों से मिलेगी निजात
इस व्यवस्था से मछुआरों को समय पर और सीधी मदद मिलेगी। बिचौलियों की भूमिका भी कम होगी, जो अक्सर मछुआरों को उचित दाम नहीं दिलाते थे। अब सरकार सीधे DBT के जरिए सब्सिडी मछुआरों के खाते में डालेगी।
हिमाचल में बढ़ा मछली उत्पादन
हिमाचल प्रदेश में मछली उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। आंकड़े बताते हैं कि जलाशयों में मछली उत्पादन 2022-23 में 549.35 मीट्रिक टन था, जो 2025-26 में बढ़कर 818.02 मीट्रिक टन हो गया। राज्य का कुल मछली उत्पादन भी 2024-25 में 19,019 मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 20,005 मीट्रिक टन पहुंच गया है।
मछुआरों के लिए क्यों जरूरी है MSP?
मछुआरे अक्सर मौसम, बाजार और नीलामी के उतार-चढ़ाव से परेशान रहते थे। कभी मछली के दाम आसमान छूते थे, तो कभी जमीन पर आ जाते थे। ऐसे में उनकी आय अनिश्चित बनी रहती थी। MSP मिलने से अब उन्हें न्यूनतम कीमत की गारंटी मिल जाएगी।
मछली पालकों की संख्या बढ़ाने की कोशिश
सरकार को उम्मीद है कि इस फैसले से राज्य में मछली पालकों की संख्या में भी इजाफा होगा। जब मछुआरों को स्थिर आय और कम रॉयल्टी का लाभ मिलेगा, तो नए लोग भी इस धंधे से जुड़ेंगे।

