Table of Contents
योजनाओं का फायदा फाइलों में नहीं, किसानों की जिंदगी में दिखना चाहिए- कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Agriculture Minister Shivraj Singh Chouhan) का ये एक वाक्य पूरी कृषि नीति का सार है। कृषि भवन में हुई पहली समग्र मासिक समीक्षा बैठक (First comprehensive monthly review meeting) में एक के बाद एक ऐसे आंकड़े सामने आए, जो साबित करते हैं कि देश की कृषि व्यवस्था खोखली घोषणाओं से निकलकर ज़मीनी बदलाव की ओर बढ़ चुकी है।
डिजिटल क्रांति का मील का पत्थर
सबसे बड़ी उपलब्धि है 10.77 करोड़ फार्मर आईडी। यानी हर किसान की अपनी डिजिटल पहचान। अब सब्सिडी, केसीसी लोन, एमएसपी खरीद और फसल बीमा सब सीधे बैंक खाते में। बिचौलियों का खेल ख़त्म। Digital Crop Survey में 26.73 करोड़ खेतों का सर्वे और 8.03 मिलियन हेक्टेयर का Digital Soil Map ये दिखाता है कि सरकार डेटा के सहारे खेती चला रही है।
दाल-तेल में आत्मनिर्भरता की ओर
दलहन उत्पादन लक्ष्य 266 लाख टन के मुकाबले 274.09 लाख टन। तिलहन में 427 लाख टन के लक्ष्य के सामने 430.59 लाख टन। Domestic edible oil production 121.75 लाख टन से बढ़कर 129.96 लाख टन। यानी विदेशी तेल पर निर्भरता घट रही है, किसान की आमदनी बढ़ रही है।
प्राकृतिक खेती और FPO का विस्तार
प्राकृतिक खेती से 27.32 लाख किसान जुड़े, 12.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र कवर। 33,257 कृषि सखियां गांव-गांव तकनीक पहुंचा रही हैं। FPO से 30 लाख किसान जुड़े और औसत टर्नओवर 38 लाख से 141.76 लाख रुपये तक पहुंचा।
फसल बीमा में 23 फीसदी उछाल
पीएम फसल बीमा योजना में नामांकन 2.30 करोड़ से बढ़कर 2.83 करोड़। बीमित राशि 1.45 लाख करोड़ रुपये से 1.86 लाख करोड़ रुपये तक। किसानों का भरोसा ही सबसे बड़ा प्रमाण है।
नया ‘खेत बचाओ अभियान’
इसी महीने की 22 तारीख से पूरे देश में ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू होगा। मिट्टी की सेहत, पराली प्रबंधन और संतुलित उर्वरक वैज्ञानिक सीधे खेतों तक पहुंचेंगे।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई ये बैठक सिर्फ रिव्यू नहीं, बल्कि एक रोडमैप है। डिजिटल आईडी से लेकर एआईएफ के 1.01 लाख करोड़ के लोन तक।
ये भी पढ़ें : लद्दाख में पहली बार बड़े पैमाने पर केसर की खेती शुरू,लेह में 90 हजार ईरानी कॉर्म्स लगाए गए
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुंचाएंगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

