Table of Contents
सोचिए, एक ऐसा भारत जहां दालों और मोटे अनाजों (Millets) की महक वाली हमारी रसोई, दुनिया की सबसे उन्नत फूड लैब से जुड़ जाए। एक ऐसा भारत जो सिर्फ गेहूं-चावल ही नहीं, बल्कि भविष्य का प्रोटीन भी उगाए। ये सपना अब हकीकत बनने जा रहा है। 10 मार्च 2026 को नई दिल्ली के भव्य भारत मंडपम में आयोजित होने वाला चौथा प्लांट-बेस्ड फूड्स समिट (4th Plant-Based Foods Summit) सिर्फ एक इवेंट नहीं, बल्कि एक आंदोलन का केंद्र बिंदु है। इसकी थीम है ‘रूटेड इन ट्रेडिशन, इंजीनियर्ड फॉर टुमॉरो’ (Rooted in Tradition, Engineered for Tomorrow) यानी ‘जड़ें परंपरा में, निर्माण भविष्य के लिए।’
दाल और बाजरा से लेकर ग्लोबल मार्केट तक का सफ़र
गहराई से देखें तो भारत के पास सबसे बड़ा हथियार है , उसकी मिट्टी और उसकी नॉलेज। हम दुनिया में दालों के सबसे बड़े उत्पादक (India is the largest producer of pulses in the world) हैं और मिलेट्स (मोटे अनाज) की खेती में आगे हैं। यही वो चीजें हैं, जिन्हें दुनिया अब ‘Superfood’ कहकर पुकारती है। लेकिन सवाल ये है कि कच्चा माल होने से आगे बढ़कर हम ‘Brand’ कैसे बनें?
इस समिट में यही तो होगा। यहां सिर्फ बातें नहीं होंगी, बल्कि नीति निर्माता, वैज्ञानिक, किसान और निवेशक एक टेबल पर बैठकर तय करेंगे कि कैसे हमारे खेतों की फसल सीधे दुनिया की थाली में पहुंचे। संयुक्त राष्ट्र का FAO (Food and Agriculture Organization) हो या सरकार की APEDA और FSSAI जैसी ताकतवर एजेंसियां, सब इस मुहिम में साथ हैं।
क्यों जरूरी है ये समिट?
आज का युवा (Gen-Z) जानता है कि सेहत के लिए प्रोटीन कितना ज़रूरी है, लेकिन वो चाहता है कि ये प्रोटीन उसके स्वाद से समझौता न करे। ऐसे में भारत के पास मौका है कि वो छेना और पनीर के साथ-साथ सोया, मटर और दालों से बने ‘Plant-Based Meats’ का भी राजा बने।
सम्मेलन में चार अहम विषयों पर गहन मंथन होगा
1.ग्लोबल लीडरशिप: भारत से प्लांट-बेस्ड फूड का निर्यात कैसे बढ़े?
2.इनोवेशन: ‘Extrusion’ और ‘Precision Fermentation’ जैसी हाई-टेक टेक्नोलॉजी से पारंपरिक अनाज को कैसे नया रूप दें?
3.विरासत और सेहत: हमारे पुरखों का खाना यानी राजगिरा, ज्वार, बाजरा आज की लाइफस्टाइल के लिए क्यों परफेक्ट है?
4.स्केल: ये ट्रेंड सिर्फ कैफे तक सीमित न रहे, बल्कि स्कूलों, हॉस्टलों और बड़ी कंपनियों की कैंटीन तक कैसे पहुंचे?
किसान से कारोबारी तक का रोडमैप
इस समिट की सबसे खास बात ये है कि यह महज एक चर्चा नहीं है, बल्कि एक ‘रोडमैप’ तैयार करेगा। प्लांट बेस्ड फूड्स इंडस्ट्री एसोसिएशन (PBFIA) के कार्यकारी निदेशक प्रवीर श्रीवास्तव कहते हैं, ‘भारत Global Food Revolution के गेटवे पर खड़ा है। हमारी कृषि विरासत और स्टार्टअप इकोसिस्टम (Agricultural Heritage and Startup Ecosystem) मिलकर एक नया इतिहास लिख सकते हैं।
यहां सिर्फ बड़ी-बड़ी कंपनियां ही नहीं, बल्कि MSME और छोटे स्टार्टअप्स को भी सरकारी योजनाओं की जानकारी मिलेगी। कैसे मिलेगी फंडिंग? कैसे मिलेगा निर्यात को बढ़ावा? कैसे बनेंगे नियम आसान? इन सब पर मज़बूत चर्चा होगी।
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।
इसे भी पढ़िए: Is The Milk Real Or Fake?: सुबह की चाय से लेकर बच्चों के गिलास तक दूध की शुद्धता पहचानने के 3 आसान घरेलू टेस्ट

