केंद्र सरकार का बड़ा ऐलान! 58 साल पुराना कानून बदलेगा,अब कीटनाशकों पर होगी सख़्त कार्रवाई

देश में कीटनाशकों (Pesticides) का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है, लेकिन मौजूदा कानून इतना कमज़ोर है कि नकली और घटिया दवाइयां बनाने वालों को कोई ख़ास सजा नहीं होती।

देश की खेती और किसानों के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए केंद्र सरकार ने ख़तरनाक केमिकल और नकली कीटनाशकों पर लगाम कसने की तैयारी कर ली है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Union Agriculture Minister Shivraj Singh Chouhan) ने साफ कहा है कि संसद के अगले (Winter Session) सत्र में ‘Pesticides Management Bill 2026’ पेश किया जाएगा। यानी दिसंबर 2026 तक 58 साल पुराने इंसेक्टिसाइड्स एक्ट 1968(Insecticides Act, 1968)  को बदलकर नया कानून आ जाएगा। 

क्यों ज़रूरी था कानून बदलना?

देश में कीटनाशकों (Pesticides) का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है, लेकिन मौजूदा कानून इतना कमज़ोर है कि नकली और घटिया दवाइयां बनाने वालों को कोई ख़ास सजा नहीं होती। किसानों को ज़हरीली दवाइयों के चलते फसल ख़राब हो रही है, सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है और कई बार तो जान तक चली जाती है। सरकार का कहना है कि पुराना कानून अब बेअसर हो चुका है, इसलिए नए कानून में सख्ती बरती गई है।

नए कानून में क्या होगा ख़ास?

5 साल जेल और 40 लाख जुर्माना

अगर कोई व्यक्ति या कंपनी ख़तरनाक या गैर-मानक (non-standard) कीटनाशक बनाती या बेचती है, तो उसे 5 साल तक की कैद और 40 लाख रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। पुराने कानून में ये सजा बहुत हल्की थी।

मौत होने पर होगी और सख़्त कार्रवाई

अगर किसी कीटनाशक के इस्तेमाल से किसी की मौत होती है और वो दवा मानकों पर खरी नहीं उतरती, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

तीसरी गलती पर लाइसेंस होगा रद्द

बार-बार नियम तोड़ने पर पहले जुर्माना बढ़ेगा और तीसरी बार गलती होने पर कंपनी का लाइसेंस पूरी तरह रद्द कर दिया जाएगा। कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी भी इसके लिए उत्तरदायी होंगे।

डिजिटल निगरानी और पारदर्शिता

नए कानून में तकनीक का बड़ा इस्तेमाल होगा। अब हर कीटनाशक को सरकार के डिजिटल डैशबोर्ड पर रजिस्टर करना अनिवार्य होगा। चाहे वह देश में बने या विदेश से आए, सबकी एंट्री होगी। इससे निगरानी आसान हो जाएगी और नकली दवाइयों पर शिकंजा कस सकेगा।

किसानों को मिलेगी ट्रेनिंग और सेफ्टी टूल

सरकार सिर्फ़ सजा देने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि किसानों को सही तरीके से दवा छिड़कने की ट्रेनिंग भी देगी। साथ ही, उन्हें प्रोटेक्शन गियर (सुरक्षा उपकरण) इस्तेमाल करने के लिए भी जागरूक किया जाएगा। इससे किसानों की सेहत पर पड़ने वाला निगेटिव असर कम होगा। रिटेलर्स (दवा बेचने वालों) के लिए भी सख्त नियम होंगे, ताकि वे सिर्फ मानक उत्पाद ही बेच सकें।

आख़िरी चरण में है बिल

कृषि मंत्रालय ने फरवरी 2026 में इस बिल का ड्राफ्ट जारी किया था और किसान संगठनों व इंडस्ट्री से सुझाव मांगे थे। अब सभी आपत्तियों और सुझावों की समीक्षा लगभग पूरी हो चुकी है। उम्मीद है कि नवंबर के आखिरी हफ्ते से दिसंबर 2026 तक चलने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में यह बिल पेश कर दिया जाएगा।

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

ये भी पढ़ें: बिहार सरकार दे रही प्राकृतिक खेती को बढ़ावा: किसानों को मिलेगा 4000 रुपये प्रति एकड़ अनुदान

 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top