‘Shakti Ki Saptadhara’ से बदलेगी कृषि और गांवों की तस्वीर, शिवराज सिंह चौहान ने लिया सामूहिक संकल्प

शिवराज सिंह चौहान ने कृषि, किसानों की आय और ग्रामीण विकास को मज़बूत करने के लिए ‘Shakti Ki Saptadhara’ पर ज़ोर दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से ‘Shakti Ki Saptadhara’ का विजन देश के सामने रखा है। इसी विजन को ज़मीन पर उतारने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्रालयों से जुड़े विभागों के लिए नई दिल्ली के पूसा स्थित सी. सुब्रमण्यम ऑडिटोरियम में एक commitment programme आयोजित किया गया। कार्यक्रम की पहल केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की।

इस दौरान शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों, कर्मचारियों, वैज्ञानिकों, किसानों, Lakhpati Didis, food processors, exporters और Farmer Producer Organisations यानी FPOs के प्रतिनिधियों को सामूहिक संकल्प दिलाया। इसका उद्देश्य भारत को विकसित, समृद्ध, आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में कृषि और ग्रामीण विकास की भूमिका को मज़बूत करना है।

कृषि और Food Processing को मिलेगा नया ज़ोर

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘Shakti Ki Saptadhara’ विकसित भारत के निर्माण का स्पष्ट roadmap देती है और इसमें agriculture तथा food processing की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि अब केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। किसानों के उत्पादों की quality, safety और global standards पर भी ध्यान देना होगा, ताकि भारतीय कृषि उत्पाद international markets में अपनी मज़बूत जगह बना सकें।

उन्होंने कहा कि किसान, वैज्ञानिक, अधिकारी, processors, exporters, SHGs और FPOs इस पूरी व्यवस्था के बराबर के stakeholder हैं। सभी को मिलकर काम करना होगा, तभी प्रधानमंत्री के विजन को ground level पर सफल बनाया जा सकेगा।

Farm से Global Market तक पहुंचाने की तैयारी

शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय कृषि को farm से global markets तक जोड़ने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। भारत में मिर्च, मसाले, फल, फूल, पारंपरिक खाद्य उत्पाद और कई तरह की कृषि उपज पैदा होती है। इन उत्पादों की quality सुधारकर, processing, packaging और branding पर काम करके किसानों के लिए नए बाज़ार तैयार किए जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि किसानों, food processors और exporters को एक common platform पर लाने की ज़रूरत है। Natural farming, organic farming और chemical-free farming से तैयार उत्पादों की मांग भारत के साथ-साथ दुनिया में भी बढ़ रही है। ऐसे में किसानों को technical guidance, market intelligence और बेहतर processing facilities उपलब्ध कराना ज़रूरी है।

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हर राज्य और ज़िले के लिए बनेगा Agriculture Roadmap

शिवराज सिंह चौहान ने national agriculture roadmap के साथ-साथ हर राज्य और ज़िले के लिए अलग agriculture roadmap तैयार करने की ज़रूरत बताई। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों में climate, soil, water availability और cropping pattern अलग हैं। इसलिए हर क्षेत्र के लिए उसी के अनुसार crop production, processing और marketing की योजना बनाई जानी चाहिए।

उन्होंने crop demand का scientific assessment करने पर भी ज़ोर दिया, ताकि किसानों को बाज़ार की ज़रूरत के अनुसार फ़सल चुनने में मदद मिल सके। Department of Agricultural Research and Education, ICAR, Krishi Vigyan Kendras और राज्य सरकारों को मिलकर नई technologies किसानों तक पहुंचाने की ज़रूरत है। Technology, mechanisation, artificial intelligence और improved seeds का इस्तेमाल उत्पादन और productivity दोनों बढ़ाने में मदद कर सकता है।

उत्पादन बढ़े, लागत घटे और किसानों को मिले बेहतर दाम

कृषि क्षेत्र के लिए सरकार की प्राथमिकताओं को बताते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उत्पादन बढ़ाने के साथ खेती की लागत कम करना, quality सुधारना और किसानों को उचित क़ीमत दिलाना ज़रूरी है। किसानों को weather, market और production से जुड़ी सही और समय पर जानकारी मिलनी चाहिए।

उन्होंने natural farming, organic farming, irrigation, water conservation और crop diversification पर भी ध्यान देने की बात कही। Local resources पर आधारित integrated farming systems और नए income sources विकसित करने से किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

तीन करोड़ Lakhpati Didis का लक्ष्य पूरा, अब छह करोड़ का लक्ष्य

ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक मज़बूती को लेकर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि तीन करोड़ ग्रामीण महिलाओं को Lakhpati Didi बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा चुका है। अब प्रधानमंत्री ने छह करोड़ Lakhpati Didis बनाने का नया लक्ष्य रखा है।

इसके लिए Self-Help Groups से जुड़ी महिलाओं को skill development, financial assistance, market access और entrepreneurship के अवसर दिए जा रहे हैं। ‘She-Marts’ और branding के जरिए ग्रामीण महिलाओं के handicrafts, food products, Ayurvedic products और traditional goods को देश और विदेश के बाज़ारों तक पहुंचाने पर भी ज़ोर दिया जाएगा।

विकसित भारत के लिए विकसित गांव ज़रूरी

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य विकसित गांवों के बिना पूरा नहीं हो सकता। ग्रामीण क्षेत्रों में pucca houses, roads, water conservation, employment, livelihoods, women empowerment और agriculture-based activities को बढ़ाने पर काम किया जा रहा है।

उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से केवल कार्यालयों तक सीमित न रहने और field में जाकर योजनाओं की वास्तविक स्थिति देखने को कहा। उनके मुताबिक government schemes की सफलता का सही assessment गांव और beneficiary के स्तर पर होना चाहिए।

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शिवराज सिंह चौहान ने बताए सफलता के चार मंत्र

कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों और कर्मचारियों को सफलता के चार मंत्र भी बताए, “पांव में चक्कर, मुंह में शक्कर, सीने में आग और माथे पर बर्फ।”

उन्होंने समझाया कि ‘पांव में चक्कर’ का मतलब लगातार field में जाकर काम की समीक्षा करना है। ‘मुंह में शक्कर’ का अर्थ लोगों और colleagues के साथ सम्मानजनक और cordial व्यवहार रखना है। ‘सीने में आग’ लक्ष्य हासिल करने के passion और determination को दर्शाता है, जबकि ‘माथे पर बर्फ’ मुश्किल परिस्थितियों में patience और balance बनाए रखने का संदेश देता है।

सामूहिक संकल्प के साथ आगे बढ़ने का संदेश

कार्यक्रम के अंत में शिवराज सिंह चौहान ने सभी उपस्थित लोगों को सामूहिक pledge दिलाया। इसमें कृषि को समृद्ध बनाने, food production मज़बूत करने, food processing बढ़ाने और भारतीय कृषि उत्पादों को global markets तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया।

साथ ही किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, छह करोड़ Lakhpati Didis के लक्ष्य को हासिल करने और national interest को personal interest से ऊपर रखने की प्रतिबद्धता जताई गई। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत का सपना देखा है और इसे resolve, capability और success में बदलना सभी की collective responsibility है।

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