Table of Contents
देश में खरीफ फसलों की बुवाई का काम लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन अब किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें और गहरी हो गई हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की CREAMS लैब की सैटेलाइट तस्वीरों (Satellite images from the CREAMS lab )ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। 12 अगस्त तक देश के 64 फीसदी कृषि क्षेत्र में सूखे जैसी गंभीर स्थिति बन गई है।
पिछले साल से 38 फीसदी ज़्यादा क्षेत्र सूखे की चपेट में
ये आंकड़े और भी चिंताजनक इसलिए हैं क्योंकि सूखे से प्रभावित क्षेत्र पिछले साल के मुकाबले 38 फीसदी ज्यादा हो गया है। यानी पिछले साल जहां कम बारिश का असर कम इलाकों में था, वहीं इस साल यह समस्या दोगुनी होकर किसानों के सामने खड़ी हो गई है। बुवाई तो हो गई, लेकिन अब खेतों में खड़ी फसलों को पानी की सख्त जरूरत है।
पंजाब से तमिलनाडु तक कहर
सैटेलाइट रिपोर्ट के अनुसार, देश के कई बड़े कृषि प्रधान राज्य इस संकट से जूझ रहे हैं। पंजाब, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, हरियाणा और तमिलनाडु के बड़े हिस्सों में अत्यंत गंभीर सूखे की स्थिति है। इन्हीं राज्यों में धान, सोयाबीन, दालें और अन्य प्रमुख खरीफ फसलें उगाई जाती हैं। अगर अब बारिश ने साथ नहीं दिया तो फसलों की बढ़वार रुक सकती है और उत्पादन पर बुरा असर पड़ेगा।
मानसून की बेरुख़ी जारी
हालांकि अगस्त के पहले हफ्ते में कुछ इलाकों में बारिश हुई, लेकिन कुल मिलाकर मानसून अब तक 12.6 फीसदी कम बरसा है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में तो बारिश की कमी 27 फीसदी तक पहुंच गई है, जबकि दक्षिणी प्रायद्वीप में 20 फीसदी और उत्तर-पश्चिम में 11 फीसदी कम वर्षा हुई है।
मिट्टी की नमी हुई ख़त्म!
बारिश की कमी ने मिट्टी की नमी को भी खत्म कर दिया है। जिन इलाकों में सिंचाई की सुविधा नहीं है, वहां तो स्थिति और भी विकट हो गई है। पौधों को जरूरी पानी नहीं मिलने से उनकी पत्तियां मुरझाने लगी हैं और बढ़वार रुक गई है। यह सीधा खतरा फसल की पैदावार और किसानों की आमदनी पर है।
रागी की बुवाई में सबसे बड़ी गिरावट
सूखे का असर बुवाई पर भी साफ दिख रहा है। कुल खरीफ फसलों के रकबे में 21 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। सबसे ज़्यादा झटका रागी (मंडुआ) को लगा है, जिसकी बुवाई 34 फीसदी घट गई। तूर की बुवाई 4 फीसदी, धान की 3.65 फीसदी और सोयाबीन की 1.44 फीसदी कम हुई है।
आगे की बारिश पर टिकी है सारी उम्मीद
फिलहाल सारी नजरें आसमान पर टिकी हैं। अगर अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश हो जाती है तो खेतों की नमी लौट सकती है और फसलों को राहत मिल सकती है। लेकिन अगर बारिश नहीं हुई तो खरीफ सीजन में भारी नुकसान हो सकता है, जिसका सीधा असर देश की खाद्य सुरक्षा और किसानों की आर्थिकी पर पड़ेगा। किसानों की इस मुश्किल घड़ी में राहत की एक बूंद की भी बहुत कीमत है।
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।
ये भी पढ़ें: बिहार सरकार दे रही प्राकृतिक खेती को बढ़ावा: किसानों को मिलेगा 4000 रुपये प्रति एकड़ अनुदान

