Table of Contents
भारत एक कृषि प्रधान देश है, लेकिन आज भी लाखों किसान पुरानी तकनीकों से खेती करने को मजबूर हैं। इसी खाई को पाटने का काम करते हैं कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) जो सरकार और किसान के बीच एक पुल की तरह काम करते हैं। अब इस नेटवर्क को और मजबूत करने की तैयारी हो रही है।
मणिपुर को मिली बड़ी सौगात
हाल ही में मणिपुर (Manipur) की उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन (Deputy Chief Minister Nemcha Kipgen) ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Union Agriculture Minister Shivraj Singh Chouhan) से नई दिल्ली में मुलाकात की। उन्होंने राज्य में कृषि विकास और किसानों तक तकनीकी जागरूकता पहुंचाने के लिए नए KVK खोलने की मांग रखी।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने इस अनुरोध पर तत्काल संज्ञान लेते हुए Indian Council of Agricultural Research (ICAR) को मणिपुर में 6 नए कृषि विज्ञान केंद्र स्थापित करने का निर्देश दे दिया। इसके साथ ही राज्य में एक टिशू कल्चर लैब (Tissue Culture Lab) स्थापित करने का प्रस्ताव भेजने को भी कहा गया है, जो आधुनिक खेती की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम होगा।
नॉर्थ-ईस्ट राज्यों में बदलाव की बयार
Northeastern States में इन 6 नए केंद्रों के आने से मणिपुर में कुल केवीके की संख्या 9 से बढ़कर 15 हो जाएगी। इससे पूर्वोत्तर राज्यों की रैंकिंग में मणिपुर तीसरे स्थान पर पहुंच जाएगा।
पूर्वोत्तर राज्यों में केवीके की संख्या है-
राज्य असम में 26 है। अरुणाचल प्रदेश में 17 मणिपुर (नए के बाद) 15 नागालैंड 11 मिजोरम, 8 त्रिपुरा 8 मेघालय, 7 सिक्किम,4 पूरे पूर्वोत्तर में कुल 90 कृषि विज्ञान केंद्र हैं। और यह संख्या अब और बढ़ेगी।
देशभर में कृषि विज्ञान केंद्रों का जाल
फिलहाल देश में 731 कृषि विज्ञान केंद्र सक्रिय हैं, जो 11 ATARI जोन में बंटे हुए हैं। इन जोन के जरिए केंद्रों की निगरानी और कृषि प्रबंधन सुनिश्चित किया जाता है।
सबसे अधिक केवीके वाले राज्यों की सूची:
1.उत्तर प्रदेश-89
2.मध्य प्रदेश-54
3.महाराष्ट्र-50
4.राजस्थान- 47
5.बिहार-44
आख़िर क्या करते हैं ये केंद्र?
कृषि विज्ञान केंद्र महज एक सरकारी दफ्तर नहीं है, ये किसान का स्कूल है। यहां होता है-
- उन्नत बीज और नई किस्मों का प्रदर्शन
- मृदा परीक्षण और उर्वरक प्रबंधन की सलाह
- कीट एवं रोग नियंत्रण की वैज्ञानिक जानकारी
- जल संरक्षण और जैविक खेती को बढ़ावा
- मधुमक्खी पालन, बागवानी और सहफसली तकनीक की ट्रेनिंग
- सरकारी कृषि योजनाओं का लाभ सीधे किसान तक पहुंचाना
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

