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उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के किसानों के लिए मार्च का महीना कहर बनकर आया। पश्चिमी विक्षोभ (western disturbance) की मार ने एक तरफ जहां गेहूं और सरसों की लहलहाती फसलों को चपेट में लिया, वहीं दूसरी ओर किसानों के चेहरे की मुस्कान भी छीन ली। प्रदेश में बीते दिनों आई तेज आंधी, ओलावृष्टि और लगातार बारिश (Strong storm, hailstorm and continuous rain) ने कई जिलों में तबाही मचा दी।
21 जिलों में ओलों का प्रकोप
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, ओलावृष्टि (hailstorm) ने प्रदेश के 21 जनपदों में कुल 244.23 हेक्टेयर फसल को रौंद डाला। सबसे ज्यादा नुकसान उन इलाकों में हुआ जहां गेहूं की फसल पकने को थी। करीब 286 किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया। हालांकि, राहत की बात ये रही कि सरकार ने तुरंत संज्ञान लिया और अब तक 13.34 लाख रुपये की सहायता राशि पीड़ित किसानों के खाते में डाल दी गई है।
बारिश ने की और भी ज्यादा बर्बादी
अगर ओले कहर थे, तो बारिश कयामत। भारी बारिश ने 17 जनपदों में 4,053 हेक्टेयर से अधिक रकबा तबाह कर दिया। यहां तो तबाही का पैमाना और बड़ा था। कुल 14,207 किसान प्रभावित हुए, जिनमें से अकेले 9,992 किसानों को अब तक 4 करोड़ 47 लाख रुपये से अधिक की राहत राशि दी जा चुकी है।
सहारनपुर और ललितपुर में सबसे ज्यादा मार
15 से 22 मार्च के बीच हुई बेमौसम बारिश ने सहारनपुर के 5 गांवों के 44 किसानों को झकझोर दिया। यहां 11 हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई। वहीं, ललितपुर में तो मानो आसमान से आग बरसी। जिले की तीन तहसीलों में 1,650 हेक्टेयर से अधिक फसल नष्ट हो गई, जिससे 3,142 किसान बेबस हो गए।
CM योगी का सख़्त फरमान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए सख्त निर्देश दिए हैं, फील्ड में उतरो, राहत तेज करो। राज्य सरकार ने फसल क्षति का तुरंत आकलन कराने का बीड़ा उठाया है। अफसरों को आदेश है कि जिस किसान की एक बाली भी बर्बाद हुई है, उसका मुआवजा रोके नहीं। प्रशासन की लगातार निगरानी से ये देखा जा रहा है कि कोई पात्र किसान राहत से वंचित न रह जाए।
किसानों की इस मुश्किल घड़ी में सरकार की त्वरित राहत ने उन्हें नई उम्मीद दी है। अब देखना यह होगा कि शेष बचे किसानों तक ये मदद कितनी जल्दी पहुंचती है।
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