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पूर्वोत्तर भारत की कृषि और किसानों के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने अरुणाचल कीवी: अरुणाचल प्रदेश की यूएसपी मिशन की शुरुआत की। यह मिशन अरुणाचल प्रदेश में क्लस्टर आधारित कीवी की खेती और पूरी वैल्यू चेन को मज़बूत करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इस पहल के जरिए अरुणाचल की जैविक कीवी को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में पहचान दिलाने की तैयारी की जा रही है।
इस कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू, MDONEER के सचिव संजय जाजू और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
167 करोड़ रुपये के मिशन से मिलेगा किसानों को लाभ
करीब 167 करोड़ रुपये की लागत वाला अरुणाचल कीवी: अरुणाचल प्रदेश की यूएसपी मिशन कई मंत्रालयों और संस्थानों के सहयोग से तैयार किया गया है। इसमें कृषि मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय, नाबार्ड, आईसीएआर, एपीडा और निजी निवेशकों की भागीदारी शामिल है।
इस मिशन का मुख्य उद्देश्य कीवी की खेती से जुड़े किसानों को बेहतर बाज़ार, मूल्य संवर्धन और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
6 क्लस्टर में बनेगा पोस्ट हार्वेस्ट नेटवर्क
मिशन के तहत जीरो वैली, दिरांग, कलाकतांग, शि योमी और दिबांग घाटी जैसे क्षेत्रों में छह क्लस्टर आधारित पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट हब बनाए जाएंगे।
अरुणाचल कीवी: अरुणाचल प्रदेश की यूएसपी के जरिए कोल्ड चेन, प्रसंस्करण, भंडारण और मार्केटिंग सुविधाओं को मज़बूत किया जाएगा ताकि किसानों को फ़सल बेचने में मजबूरी का सामना न करना पड़े।
मौजूदा समय में कीवी की खेती करने वाले किसानों को सीमित समय में फ़सल बेचनी पड़ती है, जिससे उन्हें कम दाम मिलते हैं।
किसानों की आय बढ़ाने पर मिशन का फ़ोकस
केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि यह मिशन केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को पूरी वैल्यू चेन का हिस्सा बनाने का प्रयास है।
अरुणाचल कीवी: अरुणाचल प्रदेश की यूएसपी के तहत किसानों को पौधारोपण, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, ट्रेसबिलिटी, निर्यात और कृषि पर्यटन से जोड़ा जाएगा।
मिशन का लक्ष्य किसानों की आय में चार से छह गुना तक वृद्धि करना है। इसके साथ कीवी की खेती से जुड़े स्टार्टअप्स को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
अरुणाचल बनेगा जैविक कीवी का बड़ा केंद्र
सिंधिया ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश भारत के कुल कीवी उत्पादन का 50 प्रतिशत से अधिक योगदान देता है। राज्य में हर साल 7,050 मीट्रिक टन से ज़्यादा उत्पादन होता है।
इसके बावजूद किसानों को ग्रेड सी कीवी के लिए केवल 20 से 40 रुपये प्रति किलो और ग्रेड ए के लिए लगभग 120 रुपये प्रति किलो मिलते हैं।
अरुणाचल कीवी: अरुणाचल प्रदेश की यूएसपी मिशन का उद्देश्य इस अंतर को कम करना और किसानों को बेहतर दाम दिलाना है।
निर्यात और ब्रांडिंग को मिलेगा बढ़ावा
मिशन के तहत “अरुणाचल ऑर्गेनिक कीवी” ब्रांड को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए मीडिया अभियान, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भागीदारी और पर्यटन गतिविधियों का सहारा लिया जाएगा।
अरुणाचल कीवी: अरुणाचल प्रदेश की यूएसपी मिशन नवंबर से जनवरी के उत्पादन सीजन का लाभ उठाएगा, जो न्यूजीलैंड के ऑफ सीजन के दौरान आता है। इससे दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और यूरोपीय बाज़ारों में नए अवसर बन सकते हैं। कीवी की खेती से जुड़े किसानों के लिए यह बड़ा बाज़ार अवसर माना जा रहा है।
कृषि पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा
इस मिशन में केवल उत्पादन और निर्यात ही नहीं, बल्कि कृषि पर्यटन को भी शामिल किया गया है। जीरो वैली और दिरांग में फार्म स्टे और फार्म टू फोर्क पर्यटन गतिविधियां शुरू करने की योजना है।
अरुणाचल कीवी: अरुणाचल प्रदेश की यूएसपी के जरिए अरुणाचल प्रदेश को जैविक बागवानी पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने बताया ऐतिहासिक कदम
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश देश का सबसे बड़ा कीवी उत्पादक राज्य है और यह देश का पहला राज्य है जिसे जैविक कीवी प्रमाणन मिला था।
उन्होंने कहा कि अरुणाचल कीवी: अरुणाचल प्रदेश की यूएसपी मिशन किसानों की समृद्धि और वैश्विक बाज़ार से जुड़ने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि कीवी की खेती राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में झूम खेती का टिकाऊ विकल्प बनकर उभरी है।
निष्कर्ष
यह मिशन अरुणाचल प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। अरुणाचल कीवी: अरुणाचल प्रदेश की यूएसपी के जरिए उत्पादन, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और निर्यात को एक साथ जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
साथ ही कीवी की खेती से जुड़े युवाओं, FPO और उद्यमियों के लिए भी नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
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