देसावरी पान से Premium Products बनाकर महोबा की Mayankita Chaurasia ने खड़ा कर दिया ब्रांड

Kisan of India को Google पर जोड़ें पान का नाम सुनते ही और एक छोटे से कोने में खुली पान […]

पान का नाम सुनते ही और एक छोटे से कोने में खुली पान की दुकान याद आती होगी न, मगर मयंकिता चौरसिया ने पान को उसकी इस पुरानी पहचान से निकालकर एक नई पहचान दिलाई है, इसके प्रीमियम प्रोडक्ट्स बनाकर। इसे गली की छोटी सी दुकान से निकालकर बड़े स्टोर तक पहुंचा दिया है। महोबा के प्रसिद्ध देसावरी पान को साल 2021 में G1 टैग मिला था और अब मयंकिता के प्रयासों से इसी देसावरी पान को नई पहचान मिल रही है। युवा उद्यमी मयंकिता चौरसिया पान से कई तरह के दिलचस्प खाद्य पदार्थ तैयार कर रही हैं और इसे अपने स्टार्टअप “BETELYF’’ के ज़रिए देशभर में पहचान दिलाने की कोशिश में लगी हुई हैं। मयंकिता ने अपने इस सफर और देसावरी पान ने बनाए जाने वाले उत्पादों के बारे में विस्तार से बात की।

देसावरी पान बनाते हुए

कैसे आया पान से प्रोडक्ट बनाने का आइडिया?

महोबा की मयंकिता चौरसिया का जन्म किसान परिवार में हुआ और उन्होंने बचपन से ही पान की खेती देखी है और शायद यही वजह है कि उन्हें पान के बारे में ज़्यादा जानकारी है और शायद इसलिए उन्हें इसे एक मॉर्डन बिज़नेस में बदलने का आइडिया आया और इसी को अमली जामा पहनाया उन्होंने BETELYF नामक स्टार्टअप बनाकर, जो महोबा के देसावरी पान से बहुत दिलचस्प उत्पाद बनाती है। मयंकिता बताती है कि उनके घर के साथ ही आसपास के इलाके में भी पान की खेती पहले तो बहुत होती थी, मगर सही कीमत न मिलने के कारण बहुत से किसान इसे छोड़ रहे हैं।

देसावरी पान के पत्ते

मुश्किल है देसावरी पान उगाना

महोबा के देसावरी पान को 2021 में GI टैग मिला था। मयंकिता बताती है कि इसे उगाना बहुत मुश्किल होता है, क्योंकि महोबा जो बुंदेलखंड क्षेत्र में आता है, वहां गर्मी और ठंडी दोनों ही बहुत अधिक होती है। ऐसे में पान को ठंडी और गर्मी दोनों से बचाना बहुत चुनौतीपूर्ण काम होता है।

बदल रही हैं पान के प्रति नज़रिया

मयंकिता कहती हैं कि आमतौर पर पान को अच्छी नज़र से नहीं देखा जाता है, लोगों को लगता है कि ये सेहत के लिए खराब है, इसे खान से नशा होता है और आदत लग जाती है। लोगों के मन में पान को लेकर ऐसी बहुत सी गलफहमियां है जिसे मयंकिता अपने उत्पादों के ज़रिए दूर करने की कोशिश कर रही हैं। वो पान से चॉकलेट, मुखवास, गुलकंद जैसी कई चीज़ें बना रही हैं। इतना ही नहीं वो 3 सालों में 30 से ज़्यादा प्रदर्शनी कर चुकी हैं, जहां वो पान के प्रति जागरुकता फैलाने का काम करती हैं।

देसावरी पान chocolates

 

कहां से सीखा काम?

मयंकिता अपने काम की शुरुआत के बारे में बताती हैं कि उनके दिमाग में आइडियाज़ आते गए और उसे वो किचन में ही ट्राई करती थी, फिर लैब टेस्ट कराया। उसके बाद कमर्शियल लेवल पर लेकर आईं। इसके अलावा वेदों का ज़िक्र करते हुए वो कहती हैं कि हमारे वेदों में भी पान खाने और इसके इस्तेमाल को लेकर बहुत कुछ लिखा हुआ है। जैसे ये बालों के लिए फायदेमंद है तो उन्होंने शैंपू और तेल बनाया, पान का पाउडर बनाया ताकि इसे अजवाइन या हनी के साथ खाकर लोग अपना गला और डाइजेशन ठीक रख सके। पान में एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, तो स्कैल्प में किसी तरह की समस्या को दूर करने में पान शैंपू मददगार साबित हो सकता है। पान गुलकंद में उन्होंने चीनी की जगह शहद का इस्तेमाल किया है तो इसे दूध, स्मूदी या शेक में नेचुरल स्वीटनर की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

देसावरी पान gulkand

नो प्रॉफिट नो लॉस

मयंकिता कहती हैं कि फिलहाल उन्हें इस बिजनेस से मुनाफा नहीं हो रहा है, मगर नुकसान भी नहीं है, क्योंकि जो भी कमाई होती है उसे वो बिज़नेस को आगे बढ़ाने में लगा रही है। उनकी कोशिश है कि पान के किसान फिर से पान उगाना शुरू कर दे। जहां तक अपने उत्पाद के लिए पान स्टोर करने की बात है तो वो बताती हैं कि क्योंकि पान पूरे साल उगता है तो उन्हें स्टोर करने की ज़रूरत नहीं पड़ती है। पान की बुवाई मार्च मध्य में हो जाती है और फिर तीन महीने बाद पत्ते आ जाते हैं।

देसावरी पान products

 

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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