Carbosulfan पर बैन की तैयारी: सेहत के लिए राहत या किसानों के लिए संकट?

कार्बोसल्फान बहुत ही ख़तरनाक कार्बामेट Pesticide है, जो इंसानों के शरीर में जाकर कार्बोफ्यूरान में बदल जाता है। जो और भी जहरीला केमिकल है।

केंद्र सरकार ने किसानों के बीच फेमस कीटनाशक कार्बोसल्फान पर पूरी तरह से बैन लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह कदम इंसानों, जानवरों और पर्यावरण पर इसके ज़हरीले असर को देखते हुए उठाया है। दरअसल, कृषि मंत्रालय ने 14 जनवरी 2026 को इसकी जांच के लिए एक एक्सपर्ट समिति बनाई थी। समिति ने 12 जून 2026 को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी, जिसमें कार्बोसल्फान पर पूर्ण प्रतिबंध की सिफारिश की गई। 

समिति ने पाया कि कार्बोसल्फान बहुत ही ख़तरनाक कार्बामेट Pesticide है, जो इंसानों के  शरीर में जाकर कार्बोफ्यूरान में बदल जाता है। जो और भी जहरीला केमिकल है। ये पक्षियों, परागण करने वाले कीड़ों, मछलियों और दूसरे जीवों के लिए भी काफी हानिकारक है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि Carbosulfan के ज़हर का कोई Special antidote यानी की इलाज नहीं है। हालांकि एट्रोपिन जैसी मेडिसिन लक्षणों को कम कर सकती हैं, लेकिन ज़हर को पूरी तरह खत्म करने वाली कोई दवा मौजूद नहीं है। 

किसानों और बिज़नेस पर क्या होगा असर?  

कार्बोसल्फान (Carbosulfan) का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर धान, कपास, मिर्च, बैंगन और जीरे की फसलों में होता है। यह स्टेम बोरर, लीफ फोल्डर, एफिड्स, थ्रिप्स जैसे कीटों को कंट्रोल करने में कारगर है।

अनुमानों के अनुसार, भारत में कार्बोसल्फान (Carbosulfan) का बाजार 250-400 करोड़ रुपये सालाना का है। इससे 30-50 कंपनियां जुड़ी हैं। इस बैन से किसानों को महंगे ऑप्शन अपनाने पड़ सकते हैं, जिससे प्रोडक्शन  लागत बढ़ेगी। 

क्या कहती है इंडस्ट्री?  

रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों का कहना है कि ‘भारत में कीटों का ख़तरा बढ़ रहा है, कीटों में Resistance capacity  पनप रही है और फसल सुरक्षा के ऑप्शन कम हो रहे हैं।’  उनका मानना है कि पूरी तरह बैन की बजाय सुरक्षित इस्तेमाल पर ध्यान देना चाहिए।

आगे क्या होगा?  

सरकार ने इस प्रस्ताव का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, जो 30 दिनों के लिए लोगों की राय और सुझावों के लिए खुला रहेगा।  इसके बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।

 

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