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दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने की तैयारियों को लेकर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में दिल्ली सरकार की वायु प्रदूषण नियंत्रण योजना की समीक्षा की गई। इसमें अब तक उठाए गए कदमों, ज़मीन पर हुई प्रगति और आने वाले सर्दी के मौसम के लिए ज़रूरी नई कार्रवाइयों पर चर्चा हुई।
भूपेंद्र यादव ने कहा कि प्रदूषण को कम करने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में तय लक्ष्य के साथ काम करना ज़रूरी है। उन्होंने दिल्ली के 37 चिन्हित प्रदूषण हॉटस्पॉट पर 10 अक्टूबर तक जनभागीदारी कार्यक्रम आयोजित करने को कहा। इन जगहों के लिए अलग-अलग कार्रवाई तय की जाएगी और उसकी लगातार निगरानी होगी।
हॉटस्पॉट पर होगी सीधी निगरानी
बैठक में तय किया गया कि जनप्रतिनिधि अधिकारियों, आरडब्ल्यूए, व्यापारियों और ट्रैफिक पुलिस के साथ हॉटस्पॉट का नियमित दौरा करेंगे। दिल्ली सरकार के अनुसार अब तक 42 हॉटस्पॉट पर सुधार का काम किया जा चुका है और अक्टूबर तक आठ और जगहों पर काम पूरा करने का लक्ष्य है।
इन इलाकों में यातायात को सुचारू बनाने के लिए वन-वे और जाम कम करने के उपायों का परीक्षण भी किया जाएगा। लोगों को अतिक्रमण, गलत पार्किंग और कचरा फेंकने की जानकारी देने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। दिल्ली सरकार के मुताबिक आठ सड़क मार्गों को सिग्नल फ्री किया जा चुका है और सात अन्य पर अक्टूबर तक काम पूरा करने का लक्ष्य है।
रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रदूषण कम करने के लिए लिए गए फैसलों को ज़मीन पर प्रभावी तरीके से लागू करना ज़रूरी है। उन्होंने अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल, ख़ासकर प्रवर्तन और यातायात व्यवस्था पर ज़ोर दिया। निर्माण स्थलों पर कैमरों जैसी तकनीक के इस्तेमाल से नियमों की निगरानी बढ़ाने की बात भी कही गई।
बिना PUCC ईंधन नहीं देने की तैयारी
बैठक में ‘नो PUCC, नो फ्यूल’ अभियान को मिशन मोड में लागू करने का फैसला लिया गया। इसके तहत दिल्ली के सभी 500 एएनपीआर सुविधा वाले पेट्रोल पंपों पर जागरूकता और जांच अभियान चलाया जाएगा। नियमों का पालन नहीं करने वाले पंपों पर कार्रवाई की जाएगी।
सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए 1 से 10 अक्टूबर तक दिल्ली मेट्रो सारथी ऐप के इस्तेमाल को लेकर अभियान चलाने की योजना है। आरडब्ल्यूए और जनप्रतिनिधियों के साथ डाउनलोड कैंप भी लगाए जाएंगे। बैठक में बताया गया कि दिल्ली के सभी 228 मेट्रो स्टेशनों पर अंतिम छोर तक पहुंच की सुविधा उपलब्ध है। दिल्ली में बसों की संख्या 6,840 हो गई है, जिसमें 5,088 ई-बसें शामिल हैं।
सड़क की धूल और कचरा जलाने पर भी फ़ोकस
भूपेंद्र यादव ने सड़क और निर्माण से निकलने वाली धूल, कचरा और बायोमास जलाने, वाहनों तथा उद्योगों से होने वाले प्रदूषण पर एक साथ कार्रवाई की ज़रूरत बताई। सड़क विकास के तहत अब तक 1,193 किलोमीटर का काम पूरा होने की जानकारी दी गई। बाकी काम 15 नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
कचरा जलाने से रोकने के लिए वार्ड स्तर पर निगरानी बढ़ाई जाएगी। 15 अक्टूबर तक वार्ड और जिला स्तर की निगरानी टीमें तैनात करने की योजना है। दिल्ली सरकार के अनुसार एमआरएसएम की संख्या पिछले साल के 76 से बढ़कर 98 हो गई है।
रेखा गुप्ता ने श्मशान घाटों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए तकनीकी उपाय तलाशने और इलेक्ट्रिक श्मशान सुविधाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने की बात भी कही।
हरित क्षेत्र बढ़ाने और निर्माण धूल रोकने पर ज़ोर
बैठक में हरित क्षेत्र बढ़ाने और पहले से विकसित किए गए क्षेत्रों में पौधों के संरक्षण पर भी ज़ोर दिया गया। दिल्ली सरकार के अनुसार 71 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं और चिन्हित 434 एकड़ में से 433 एकड़ क्षेत्र को हरा किया जा चुका है।
निर्माण और तोड़फोड़ से होने वाली धूल को कम करने के लिए मालबा ऐप पर पंजीकरण को भवन योजना की मंजूरी से जोड़ने का निर्णय लिया गया है। 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल पैदा करने वाली तोड़फोड़ और खुले में होने वाले निर्माण कार्यों पर रोक रहेगी। वहीं, 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर पूरी रोक का प्रावधान रखा गया है।
सर्दियों के लिए पहले से तैयार होगा दिल्ली
सर्दियों के लिए प्रदूषण नियंत्रण के तहत प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर प्रतिबंध, पार्किंग शुल्क दोगुना करने, कार्यालयों के समय में बदलाव और 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम जैसी व्यवस्थाएं तय की गई हैं। 1 नवंबर 2026 से दिल्ली के बाहर पंजीकृत और बीएस-VI से नीचे के उत्सर्जन मानक वाले वाहनों के प्रवेश पर भी रोक लगाने का फैसला किया गया है। सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को इससे छूट दी जाएगी।
भूपेंद्र यादव ने कृषि से जुड़े प्रदूषण को कम करने के लिए एनसीआर राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ बैठक और ठोस कार्ययोजना बनाने पर भी ज़ोर दिया। रेखा गुप्ता ने भी सभी संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल की ज़रूरत बताई।
औद्योगिक प्रदूषण पर निगरानी मजबूत करने के लिए एआई आधारित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को सक्रिय करने, निगरानी केंद्रों की संख्या 47 से बढ़ाकर 60 करने और 334 प्रवर्तन टीमों की तैनाती का फैसला लिया गया है। भूपेंद्र यादव ने लगातार समीक्षा, सख्त कार्रवाई और लोगों की भागीदारी को प्रदूषण नियंत्रण की इस रणनीति का अहम हिस्सा बताया।
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