भारत सरकार का बड़ा कदम: ‘Paraquat Dichloride’ पर लगाया बैन, नए रजिस्ट्रेशन पर तुरंत रोक

सरकार ने ये कदम एक्सपर्ट्स की सलाह और रजिस्ट्रेशन कमेटी से लंबी चर्चा के बाद उठाया है। रजिस्ट्रेशन समिति ने अपनी रिपोर्ट में साफ किया कि पैराक्वाट डाइक्लोराइड को दुनिया के 70 से ज़्यादा देशों में पहले ही प्रतिबंधित या गंभीर रूप से कंट्रोल किया जा चुका है।

भारत सरकार ने एक बेहद ज़हरीले खरपतवारनाशक पैराक्वाट डाइक्लोराइड (‘Paraquat dichloride’ ) के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। ये फैसला देश के करोड़ों किसानों, आम नागरिकों और पर्यावरण की सुरक्षा के लिहाज से एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। केंद्र सरकार ने कीटनाशक अधिनियम, 1968 के तहत ये फैसला लिया है, जिसके तहत इस केमिकल के नए रजिस्ट्रेशन पर तुरंत रोक लगा दी गई है और पहले से जारी सभी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट भी रद्द करने का फैसला किया गया है।

सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?

सरकार ने ये कदम एक्सपर्ट्स की सलाह और रजिस्ट्रेशन कमेटी से लंबी चर्चा के बाद उठाया है। रजिस्ट्रेशन समिति ने अपनी रिपोर्ट में साफ किया कि पैराक्वाट डाइक्लोराइड को दुनिया के 70 से ज़्यादा देशों में पहले ही प्रतिबंधित या गंभीर रूप से कंट्रोल किया जा चुका है। इसके Documented side effects, जहर के लगातार हो रहे मामलों, ख़तरनाक परिणामों और इसके जहर का कोई स्पेशल इलाज या एंटीडोट न होने के कारण पूरी तरह से बैन की सिफारिश की गई। सरकार ने पहले 13 जुलाई 2026 को इस फैसले का मसौदा जारी किया था और 30 दिन तक लोगों से सुझाव व आपत्तियां मांगी थीं। इस प्रोसेस के पूरा होने के बाद अब अंतिम फैसला लिया गया है।

पैराक्वाट डाइक्लोराइड कितना ख़तरनाक है?

ये केमिकल खेतों में अनचाही घास-पौधों को खत्म करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन ये इंसानों और जानवरों के लिए बेहद जहरीला है। इसकी थोड़ी मात्रा भी अगर गलती से शरीर में चली जाए तो जानलेवा साबित हो सकती है। पैराक्वाट का सबसे ज्यादा असर फेफड़ों और किडनी पर पड़ता है, और कई मामलों में ये फेफड़ों में ऐसी स्थिति बना सकता है जिससे सांस लेने में लगातार परेशानी होती है। भारतीय किसान संघ ने इसे कैंसरजनक केमिकल बताते हुए इस प्रतिबंध का स्वागत किया है। संगठन के अनुसार, हाल के दिनों में मूंग की फसल को कृत्रिम रूप से सुखाने के लिए इसका दुरुपयोग तेजी से बढ़ा था, जिससे मूंग के दानों में इस जहर के अंश रह जाते थे और आम उपभोक्ताओं का स्वास्थ्य ख़तरे में पड़ रहा था।

कीटनाशक से जुड़ी मौतों ने बढ़ाई चिंता

भारत में जहरीले कीटनाशकों के इस्तेमाल से होने वाली मौतें पहले भी चिंता का कारण रही हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में देश में कीटनाशक से जुड़ी 34,000 से ज्यादा मौतें दर्ज की गईं, जिनमें से 26,921 मौतें कीटनाशक खाने से हुई आत्महत्याओं से जुड़ी थीं, जबकि 7,821 मामले आकस्मिक ज़हर खाने के थे। इन आंकड़ों के बीच पैराक्वाट पर रोक को एक बड़े सुरक्षा कदम के रूप में देखा जा रहा है।

राज्य सरकारों की जिम्मेदारी

अब राज्य सरकारों को ये देखना होगा कि केंद्र के आदेश को जमीन पर लागू किया जाए। जो कंपनियां या सर्टिफिकेट धारक अपना रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट तीन महीने के भीतर वापस नहीं करते, उनके खिलाफ कीटनाशक कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है। इस फैसले के बाद भारत उन करीब 70 देशों की सूची में शामिल हो गया है जहां इस ख़तरनाक केमिकल के इस्तेमाल पर रोक या कड़े नियम लागू हैं।  

 

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