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देश में यूरिया की बढ़ती मांग और आयात पर निर्भरता के बीच केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब किसान खेतों में एनहाइड्रस अमोनिया (Anhydrous Ammonia) का इस्तेमाल कर सकेंगे। ये फैसला 23 जुलाई 2026 को जारी अधिसूचना के साथ लागू हो गया है।
क्यों है ये फैसला ख़ास?
आंकड़े बताते हैं कि भारत करीब 100 लाख टन यूरिया का आयात करता है, जबकि देश में 300 लाख टन का प्रोडक्शन होता है। यूरिया में 46 फीसदी नाइट्रोजन होती है, जबकि एनहाइड्रस अमोनिया में 82 प्रतिशत नाइट्रोजन होती है। यानी ये यूरिया से लगभग दोगुना कारगर है।
क्या है एनहाइड्रस अमोनिया (Anhydrous Ammonia)?
ये गैस के रूप में होता है और इसे मिट्टी के अंदर इंजेक्ट करना पड़ता है। इसके लिए ख़ास उपकरण, भंडारण टैंक और परिवहन व्यवस्था की ज़रूरत होती है। एक्सपर्ट के मुताबिक, गैस रिसाव की संभावनाएं और सुरक्षा जोखिम इसकी सबसे बड़ी चुनौती हैं।
क्या है सरकारी स्कीम?
- तीन साल के लिए प्रोडक्शन की परमिशन
- यूरिया प्लांटों से निकलने वाले 2,000-6,000 टन एक्स्ट्रा अमोनिया का इस्तेमाल
- ICAR के 13 संस्थानों में रबी 2025-26 सीज़न में टेस्टिंग
- 1,200 टन क्षमता वाले ग्रीन अमोनिया प्लांट के लिए 13,000-15,000 करोड़ रुपये का निवेश
भारत बनेगा चौथा देश
अगर ये तकनीक सफल रही तो भारत अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के बाद अमोनिया का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा।
क्या है सरकार की बड़ी योजना?
सरकार ने कोयला गैसीफिकेशन (Coal Gasification) के लिए 37,500 करोड़ रुपये की योजना को मंज़ूरी दी है। इससे एलएनजी और यूरिया के आयात में कमी आएगी। 85 फीसदी यूरिया उत्पादन आयातित एलएनजी पर निर्भर है, जिसे घरेलू कोयले से बदला जा सकेगा।
किसानों के लिए फायदा
- किफायती विकल्प उपलब्ध होगा
- आयात पर निर्भरता घटेगी
- अधिक नाइट्रोजन से बेहतर फसल
- उर्वरक सब्सिडी का बोझ कम होगा
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