हिमाचल प्रदेश सरकार (Government of Himachal Pradesh) ने राज्य के बागवानों को बड़ी राहत देते हुए साल 2026 के लिए मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (Market Intervention Scheme 2026) को मंज़ूरी दे दी है। इस MIS योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाना और बाजार में कीमतें गिरने पर उनको आर्थिक मदद प्रदान करना है।
सरकार इस योजना के तहत प्रोसेसिंग ग्रेड के आम, खट्टे फल और सी-ग्रेड सेब को निर्धारित समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदेगी। फलों की ख़रीद एचपी हॉर्टिकल्चरल प्रोड्यूस मार्केटिंग एंड प्रोसेसिंग कॉरपोरेशन (HP Horticultural Produce Marketing and Processing Corporation) के ज़रीये से की जाएगी और जरूरत पड़ने पर सेब की ख़रीद में हिमफेड (HIMFED) की भी मदद ली जाएगी।
42 फल संग्रह केंद्र होंगे स्थापित
किसानों की सुविधा के लिए राज्यभर में 42 फल संग्रह केंद्र (Fruit Collection Center) बनाए गए हैं। यहां किसान अपनी फसल बेच सकेंगे। पारदर्शिता के लिए इस बार ख़रीद प्रोसेस को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किया जाएगा। किसानों को एचपीएमसी के एमआईएस पोर्टल पर रजिट्रेशन करना अनिवार्य होगा। रजिस्ट्रेशन के दौरान उन्हें आधार, भूमि रिकॉर्ड और बैंक खाते की जानकारी देनी होगी। इससे पहले सरकार ने किसानों के लंबित भुगतान को साफ करने के लिए 45 करोड़ रुपये भी जारी किए थे।
कितने में खरीदे जाएंगे फल?
आम: 15 जुलाई से 31 अगस्त 2026 तक प्रोसेसिंग ग्रेड के सीडलिंग, ग्राफ्टेड और कच्चे अचारी किस्म के आम 12 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदे जाएंगे। आमों की खरीद 20 किलोग्राम क्षमता वाले दोबारा से इस्तेमाल करने वाले प्लास्टिक क्रेट में होगी।
खट्टे फल: किन्नू, माल्टा और संतरा 12 रुपये प्रति किलो और गलगल 10 रुपये प्रति किलो की दर से ख़रीदा जाएगा। खट्टे फलों की ख़रीद 21 नवंबर 2026 से 15 फरवरी 2027 तक होगी। पैकिंग के मानक भी अलग-अलग हैं: किन्नू-माल्टा-संतरा 15 किलो के क्रेट में और गलगल 40 किलो की जूट की बोरियों में खरीदे जाएंगे।
सी-ग्रेड सेब: 1 अगस्त से 31 अक्टूबर 2026 तक अधिकतम 1.50 लाख मीट्रिक टन सी-ग्रेड सेब 12 रुपये प्रति किलो की दर पर ख़रीदे जाएंगे। सेब की खरीद 35 किलोग्राम की जूट की बोरियों में होगी, जबकि जहां संभव होगा, वहां 16 किलोग्राम क्षमता वाले दोबारा से इस्तेमाल करने वाले प्लास्टिक क्रेट को प्रायोरिटी दी जाएगी।
क्वालिटी मानक भी तय
सरकार ने गुणवत्ता को लेकर सख्त नियम बनाए हैं। केवल 51 मिमी से ज़्यादा आकार वाले और तय गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरने वाले सी-ग्रेड सेब ही खरीदे जाएंगे। सड़े-गले, हवा से गिरे हुए, पक्षियों द्वारा क्षतिग्रस्त, कीटग्रस्त या एथेफोन (Ethephon) रसायन से पकाए गए फल इस योजना के तहत नहीं खरीदे जाएंगे। साथ ही, किसानों को ख़रीद के दौरान 2.5 फीसदी अतिरिक्त फल वाष्पीकरण और सांस लेने की नैचुरल प्रोसेस के नुकसान की भरपाई के लिए देना होगा।
ये योजना हिमाचल के बागवानों के लिए एक बड़ी राहत है, ख़ासकर जब बाजार में कीमतें अस्थिर होती हैं. डिजिटल प्रक्रिया से पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को समय पर भुगतान मिल सकेगा। अगर आप भी एक रजिस्टर्ड किसान हैं, तो नजदीकी संग्रह केंद्र पर जाकर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
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