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जहां एक तरफ पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, बढ़ती आबादी और खाद्य संकट जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, वहीं भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स देशों का एक अहम कृषि सम्मेलन मध्य प्रदेश के इंदौर (BRICS Agriculture Conference in Indore, Madhya Pradesh) में चल रहा है। ये पांच दिवसीय सम्मेलन 9 जून से शुरू हुआ, जो 13 जून तक चलेगा। इसमें दुनिया की करीब आधी आबादी (लगभग 400 करोड़ लोगों) के खाने-पीने और भविष्य पर फैसले लिए जा रहे हैं।
क्यों ख़ास है ये सम्मेलन?
ब्रिक्स में अब 11 देश हो गए हैं- ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई और इंडोनेशिया। ये सभी देश मिलकर दुनिया की आधी से ज्यादा खाद्य ज़रूरतें पूरी करते हैं।
इसलिए जब ये देश इंदौर में बैठे हैं, तो यहां सिर्फ बातें नहीं हो रहीं बल्कि वैश्विक कृषि का नया नक्शा बन रहा है।
तीन दिन अधिकारी, फिर मंत्री
- 9-11 जून: ब्रिक्स कृषि कार्य समूह की बैठक (अधिकारी स्तर)
- 12-13 जून: ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक
भारत के कृषि सचिव अतिश चंद्र ने पहले दिन की शुरुआत की। वहीं कृषि विभाग के संयुक्त सचिव अजीत कुमार साहू ने कहा कि
‘ब्रिक्स देशों में दुनिया की आधी आबादी रहती है, इसलिए इनकी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना हम सबकी साझा ज़िम्मेदारी है।’
किन मुद्दों पर हो रही गहन चर्चा?
ये सम्मेलन महज एक औपचारिकता नहीं है। इसमें हर उस मुद्दे पर रिसर्च-आधारित बातचीत हो रही है, जो आज के किसान और कल की दुनिया को प्रभावित करता है-
1. खाद्य सुरक्षा और पोषण
दुनिया में अब भी लाखों लोग भूखे सोते हैं। ब्रिक्स देशों ने तय किया है कि अनाज का उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पोषण सुरक्षा भी तय की जाएगी।
2. AI और स्मार्ट फार्मिंग
अब खेती में रोबोट, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग (Robots, drones, artificial intelligence, and machine learning) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इस सम्मेलन में तय किया जा रहा है कि कैसे छोटे किसानों तक ये तकनीकें पहुंचें, ताकि लागत घटे और उत्पादन बढ़े।
3.जलवायु-अनुकूल खेती
सूखा, बाढ़, लू और पानी का संकट, ये सब अब किसानों की रोज़मर्रा की चुनौती बन चुके हैं। इस सम्मेलन में क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर (Climate-Resilient Agriculture), प्राकृतिक खेती, जैविक उत्पादन और मिट्टी के स्वास्थ्य पर जोर दिया जा रहा है।
4. कृषि व्यापार और सप्लाई चेन
ब्रिक्स देशों के बीच कृषि उत्पादों का व्यापार आसान बनाने, सप्लाई चेन को मजबूत करने और निर्यात बढ़ाने पर भी चर्चा हो रही है।
मध्य प्रदेश को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय मंच
इस सम्मेलन से सबसे ज्यादा फायदा मध्य प्रदेश को होने वाला है। यहां के ख़ास उत्पाद हैं-
- झाबुआ का सफेद मक्का
- नरसिंहपुर का गुड़
- मंडला के मिलेट्स (मोटे अनाज)
- छिंदवाड़ा की चिरौंजी
- बुरहानपुर के केले से बने उत्पाद
अब वैश्विक बाजारों में पहचान बना सकते हैं। यही नहीं, मध्य प्रदेश सरकार ने 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ घोषित किया है।
Joint Declaration क्यों अहम है?
बैठक के आख़िर में सभी 11 देशों के कृषि मंत्री एक संयुक्त घोषणा-पत्र जारी करेंगे। इसमें तय होगा कि
- अगले 5 साल में ब्रिक्स देश कृषि में कितना निवेश करेंगे
- तकनीक कैसे साझा करेंगे
- जलवायु संकट से निपटने की क्या रणनीति होगी
ये घोषणा-पत्र आने वाले सालों की ग्लोबल कृषि नीतियों को दिशा देगा।
भारत क्यों है इस सम्मेलन का केंद्र?
भारत आज दूध उत्पादन में दुनिया में पहले स्थान पर है। खाद्यान्न उत्पादन लगातार रिकॉर्ड तोड़ रहा है। डिजिटल कृषि, ई-नाम (e-NAM), प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी योजनाएं पूरी दुनिया के लिए उदाहरण हैं।
इसलिए ब्रिक्स देश चाहते हैं कि भारत के अनुभवों से वे भी सीखें। और इंदौर जैसा शहर, जो भारत का सबसे स्वच्छ शहर भी है, इस वैश्विक कूटनीति का गवाह बन रहा है। ये अपने आप में ऐतिहासिक है।
ये सम्मेलन सिर्फ ब्रिक्स देशों के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए मील का पत्थर है। यहां जो फैसले होंगे, वे यह तय करेंगे कि आने वाले दशकों में किसान कैसे खेती करेगा, उसे क्या तकनीक मिलेगी, और दुनिया की थाली में खाना कैसे पहुंचेगा।

