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आज के वक्त में हर भारतीय रसोई की रीढ़ है ‘खाने का तेल’ (Cooking oil)। लेकिन अब ये रीढ़ हिलने लगी है। देश के हर घर में रसोई का काम चाहे जैसे चले, पर तेल के बिना चूल्हा अधूरा है। मगर पिछले कुछ समय से यह ज़रूरी सामान महंगा ही नहीं, बल्कि अनिश्चित भी होता जा रहा है। कारण? दुनिया के दूसरे छोर पर बढ़ते तनाव और भारत पर मंडराता कमज़ोर मानसून।
जब दुनिया लड़ती है, तो भारत की रसोई पर असर होता है
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव ने Strait of Hormuz जो दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्ता है को अनिश्चित बना दिया है। कभी रास्ता खुलता है, कभी बंद। SEA (Solvent Extractors’ Association of India) के मुताबिक, शिपिंग कंपनियां अब जहाज भेजने से पहले 10 बार सोचती हैं। फ्रेट चार्जेस 50 फीसदी तक बढ़ चुके हैं।
इसका सीधा असर? भारत जो अपनी खपत का 60 फीसदी से अधिक खाद्य तेल (Palm, Soybean, Sunflower) मलेशिया, इंडोनेशिया और अर्जेंटीना से मंगवाता है, अब वो तेल महंगा होकर आ रहा है।
सिर्फ तेल नहीं, पैकेट भी हुआ महंगा
ये संकट अकेला नहीं आया। तेल के साथ-साथ उसकी पैकेजिंग भी महंगी हो गई है। प्लास्टिक में इस्तेमाल होने वाले पॉलीएथिलीन और पॉलीप्रोपाइलीन के दाम 50-60 फीसदी उछल चुके हैं। यानी जब कंपनी तेल बनाती है, तो बोतल पर भी उतना ही खर्च आ रहा है जितना तेल पर। और ये खर्चा आख़िर आपकी जेब पर आता है।
मानसून का उलटा खेल
अब सबसे बड़ी चिंता है मानसून। मौसम विभाग के शुरुआती अनुमान के मुताबिक, इस साल बारिश सामान्य से कम, यानी सिर्फ 92 फीसदी रह सकती है।
- कम बारिश यानि कम फसल
- सरसों, मूंगफली, सोयाबीन का कम उत्पादन
- कम उत्पादन से देशी तेल महंगा
यानी एक तरफ आयातित तेल महंगा, दूसरी तरफ देशी तेल भी। दो तरफ से दबाव है
निर्यात ठप, कारोबारी परेशान
भारत से पश्चिम एशिया और यूरोप जाने वाला ऑयलमील (तेल की खली) का एक्सपोर्ट भी लड़खड़ा गया है। 65 फीसदी ऑयलमील तो फॉर ईस्ट देशों (वियतनाम, थाईलैंड, चीन) जाता है, लेकिन बाकी 35 प्रतिशत का रास्ता अब ख़तरनाक हो गया है। SEA ने चेतावनी दी है कि ‘अगर ये हालात रहे, तो लंबे समय तक असर रहेगा।’
नई उम्मीद, नए रास्ते
हालात बुरे हैं, लेकिन उद्योग ने हार नहीं मानी। SEA जुलाई 2026 में फॉर ईस्ट देशों के लिए एक बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भेजने की तैयारी कर रहा है। नए बाजार खोजे जा रहे हैं ताकि पश्चिम एशिया में हुए नुकसान की भरपाई हो सके।
आख़िर आम आदमी पर क्या असर?
सीधा-सा असर-हर महीने की रसोई का बजट बढ़ेगा।
जहां पहले 1 लीटर तेल 170–180 रुपये में मिलता था, वो अब 200-250 के पार जा सकता है। तलने-भूनने से लेकर सब्जी तक, हर चीज़ महंगी होगी।
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