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इमेजिन, देश का कोई भी किसान मोबाइल पर एक क्लिक करे और उसे सरकारी सब्सिडी वाला खाद सीधे उसके खेत के पास मिल जाए। कोई भ्रष्टाचार नहीं, कोई देरी नहीं, और कोई पेपरवर्क का झंझट नहीं। ये सपना अब सच होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने उर्वरक सब्सिडी और खाद प्रबंधन को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है, जो भारतीय कृषि के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है।
केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा (Union Minister for Chemicals and Fertilizers Jagat Prakash Nadda) ने हाल ही में ‘E-bill system’ की शुरुआत की है। इस नई व्यवस्था से उर्वरक सब्सिडी के बिलों की प्रोसेसिंग पूरी तरह ऑनलाइन हो जाएगी। यानी, अब फाइलों के ढेर और फिज़िकल बिलों की आवाजाही ख़त्म हो जाएगी। यह बदलाव सिर्फ़ सब्सिडी तक नहीं है, बल्कि पूरे Manure Management को एक नई दिशा दे रहा है।
iFMS: इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम
सरकार का फ्लैगशिप प्लेटफॉर्म ‘Integrated Fertilizer Management System’ (iFMS) अब सिर्फ़ खाद की बिक्री का रिकॉर्ड रखने वाला प्लेटफॉर्म नहीं रहा। इसे प्रोडक्शन, आपूर्ति, किसान की खरीद और सब्सिडी भुगतान तक की पूरी व्यवस्था को जोड़ने वाले एक विशाल डिजिटल नेटवर्क के रूप में विकसित किया जा रहा है।
इस पर 14 करोड़ से ज़्यादा आधार-लिंक्ड खाद खरीदार, 2.5 लाख से ज्यादा रिटेलर और सालाना करीब 7 करोड़ मीट्रिक टन उर्वरक की बिक्री जुड़ी हुई है। सबसे बड़ी बात ये कि इसके ज़रिए सालाना लगभग 2 लाख करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी का ट्रांसपेरेंट मैनेजमेंट होगा।
नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) की मदद से तैयार किया गया यह प्लेटफॉर्म उर्वरक उत्पादन, आयात, डिस्पैच, परिवहन, स्टॉक, खुदरा बिक्री और सब्सिडी प्रोसेसिंग, सभी स्टेप को एक साथ जोड़ता है।
डिजिटल बुकिंग: आसानी का नया दौर
अब किसान एग्रीस्टैक आईडी के आधार पर मोबाइल ऐप के जरिए उर्वरक बुक कर सकता है। उसकी ज़रूरत, भूमि का विवरण और ओनरशिप की कन्फर्मेशन ऑनलाइन होगी। इसके बाद उसे एक QR कोड मिलेगा, जिसे PoS (प्वाइंट ऑफ सेल) मशीन पर स्कैन करके वह सब्सिडी वाला खाद खरीद सकता है।
वाहनों पर भी डिजिटल निगरानी
पहली बार, उर्वरक ढोने वाले वाहनों की लोकेशन भी ट्रैक की जाएगी। ‘Vehicle Location Tracking System’ (VLTS) से यह पता चलेगा कि खाद कहां से कहां जा रही है, रास्ते में कितनी देरी हो रही है, या कोई असामान्य आवाजाही तो नहीं हो रही। इससे ट्रांसपोर्टेशन के दौरान होने वाली चोरी-छिपे और गड़बड़ियों पर पूरी तरह रोक लगेगी।
ट्रांसपेरेंट सब्सिडी सिस्टम
1 जनवरी 2026 से सब्सिडी बिलों की इलेक्ट्रॉनिक प्रोसेसिंग को PFMS और ई-बिल प्रोसेसिंग से जोड़ दिया गया है। अब manual intervention कम होगा और दावों व भुगतान की पूरी ट्रेसिंग डिजिटल होगी। रैंडम वेरिफिकेशन और एनालिटिकल जांच से सब्सिडी दावों की जांच और मजबूत होगी। इससे पूरे प्रोसेस में ट्रांसपेरेंसी, जवाबदेही और डिजिटल ऑडिटिंग को बढ़ावा मिलेगा।
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