बिहार में खाद खरीदने का तरीका पूरी तरह बदलने जा रहा है। राज्य के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने साफ कर दिया है कि 2 अक्टूबर से पूरे प्रदेश में डिजिटल उर्वरक बिक्री व्यवस्था लागू हो जाएगी। इसके तहत किसान QR Code के जरिए ही ऑथराइज्ड दुकानों से खाद खरीद सकेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य कालाबाजारी पर पूरी तरह रोक लगाना और हर किसान तक सही मात्रा में खाद पहुंचाना है।
QR Code कैसे करेगा काम?
इस नई प्रणाली को समझना बहुत आसान है। जिन किसानों की जमीन Farmer Registry में दर्ज है, उनकी सारी जानकारी Farmer ID से खुद निकल जाएगी। दूसरे किसान FSAS पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवा सकेंगे। इसके लिए उन्हें खेत का खाता, खसरा, रकबा और फसल की जानकारी देनी होगी।
ICAR की सिफारिश के अनुसार हर किसान की खाद की ज़रूरत निकाली जाएगी और उसे एक QR Code मिलेगा। यह कोड सिर्फ तीन दिनों के लिए वैलिड रहेगा। उसी कोड के आधार पर किसान निर्धारित अधिकृत विक्रेता से भुगतान कर खाद ले सकेगा। इससे ये होगा कि एक किसान अपनी ज़रूरत से अधिक खाद न खरीद सके और कोई दूसरा वंचित न रहे।
पायलट से पूरे राज्य तक का सफ़र
ये सिस्टम पहले वैशाली और शेखपुरा जिले में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाई गई थी। वहां बेहतर नतीजे आने के बाद इसे 1 सितंबर 2026 से 19 जिलों में लागू किया गया। अब 2 अक्टूबर से यह पूरे बिहार में लागू हो जाएगी।
कालाबाज़ारी पर लगेगी पूरी तरह लगाम
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब खाद की कालाबाजारी करना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। हर बिक्री की डिजिटल एंट्री होगी। कोई भी विक्रेता निर्धारित दाम से ज़्यादा नहीं ले पाएगा। अगर कोई शिकायत आती है तो तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
विभाग ने FSAS, iFMS और AgriStack को आपस में जोड़ दिया है। इससे खरीद-बिक्री का पूरा हिसाब-किताब डिजिटल रूप से उपलब्ध रहेगा। स्टॉक और बिक्री, दोनों की निगरानी बहुत आसान हो जाएगी।
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