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देश को उर्वरकों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक अहम पहल की गई है। नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज यानी NAAS द्वारा आयोजित एक विशेष ब्रेनस्टॉर्मिंग सत्र में इस दिशा में ठोस रोडमैप तैयार करने पर चर्चा हुई। इस बैठक में सरकार, वैज्ञानिक संस्थानों, उद्योग और किसानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
इस मौके पर डॉ मांगी लाल जाट ने देश की कृषि व्यवस्था और उर्वरकों के भविष्य को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें साझा कीं।
आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में कृषि की भूमिका
प्रेस वार्ता के दौरान डॉ मांगी लाल जाट ने कहा कि भारत ने 2047 तक आत्मनिर्भर भारत बनने का लक्ष्य तय किया है और इसमें कृषि क्षेत्र की भूमिका बेहद अहम होगी।
उन्होंने बताया कि हरित क्रांति के समय उर्वरकों ने उत्पादन बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई, लेकिन अब सबसे बड़ी चुनौती उर्वरकों के असंतुलित और अधिक उपयोग की है। NAAS की इस पहल का उद्देश्य इसी समस्या का समाधान ढूंढना है।
उर्वरकों पर आयात निर्भरता चिंता का विषय
डॉ मांगी लाल जाट ने बताया कि देश में हर साल करीब 33 मिलियन टन उर्वरकों की खपत होती है, जिसमें से बड़ी मात्रा आयात पर निर्भर है।
इस वजह से देश पर आर्थिक बोझ भी बढ़ता है। NAAS की बैठक में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि उर्वरकों के आयात को कम करना अब समय की ज़रूरत बन चुका है।
संतुलित उपयोग और मिट्टी की सेहत पर ज़ोर
बैठक में यह बात सामने आई कि केवल उर्वरकों का अधिक उपयोग समाधान नहीं है, बल्कि उनका सही और संतुलित उपयोग ज़रूरी है।
डॉ मांगी लाल जाट ने कहा कि मिट्टी की सेहत सुधारने और Soil Health Card जैसी योजनाओं को मज़बूत करने की ज़रूरत है। इसके साथ ही किसानों को जागरूक करना भी उतना ही ज़रूरी है। NAAS ने इस दिशा में व्यापक अभियान चलाने की बात कही।
नई तकनीकों से बदलेगा उर्वरक उपयोग
डॉ मांगी लाल जाट ने बताया कि अब खेती में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाना होगा। उन्होंने AI, सेंसर आधारित सिस्टम और प्रिसिजन न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट जैसी तकनीकों के उपयोग पर ज़ोर दिया।
NAAS की इस बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि तकनीक के जरिए उर्वरकों के सही उपयोग को बढ़ावा दिया जाए, जिससे लागत कम हो और उत्पादन बेहतर हो।
जैविक और वैकल्पिक विकल्पों को बढ़ावा
उर्वरकों की निर्भरता कम करने के लिए डॉ मांगी लाल जाट ने जैविक विकल्पों को अपनाने की बात कही।
उन्होंने कहा कि वेस्ट टू वेल्थ जैसे अभियानों के जरिए जैविक खाद का उपयोग बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही दालों और तिलहन फ़सलों को बढ़ावा देने से भी उर्वरकों की ज़रूरत कम होगी। NAAS ने भी इस दिशा में ठोस रणनीति बनाने पर ज़ोर दिया।
INSAM मिशन का प्रस्ताव
बैठक में एक महत्वपूर्ण सुझाव यह भी दिया गया कि Integrated Nutrient Supply and Management यानी INSAM मिशन को लागू किया जाए।
इस मिशन का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में कम से कम 25 प्रतिशत रासायनिक उर्वरकों की जगह जैविक खाद का उपयोग बढ़ाना है। डॉ मांगी लाल जाट ने इस पहल को भविष्य के लिए ज़रूरी बताया।
उर्वरक नीति में बदलाव की ज़रूरत
NAAS की इस बैठक में यह भी माना गया कि मौजूदा उर्वरक नीतियों में बदलाव ज़रूरी है। डॉ मांगी लाल जाट ने सुझाव दिया कि यूरिया को न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी के दायरे में लाना चाहिए। साथ ही सब्सिडी को किसानों के खाते में सीधे ट्रांसफर करने पर भी विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सस्ती यूरिया की उपलब्धता के कारण उसका अधिक उपयोग हो रहा है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है।
हरित क्रांति से अब नई दिशा की ज़रूरत
भारत ने हरित क्रांति के बाद खाद्यान्न उत्पादन में बड़ी सफलता हासिल की है। लेकिन अब नई चुनौतियां सामने हैं, जैसे मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट, जल संसाधनों पर दबाव और बढ़ती लागत।
डॉ मांगी लाल जाट ने कहा कि अब समय है कि हम नई तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों के जरिए कृषि को नई दिशा दें। NAAS का यह प्रयास इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
वैज्ञानिक शोध और नीतियों का तालमेल ज़रूरी
बैठक में यह बात भी सामने आई कि केवल शोध या केवल नीति से काम नहीं चलेगा। दोनों के बीच बेहतर तालमेल ज़रूरी है।
डॉ मांगी लाल जाट ने कहा कि सरकार, वैज्ञानिक संस्थान और किसान मिलकर ही इस लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं। NAAS ने इस दिशा में एक मज़बूत रोडमैप तैयार करने की बात कही।
निष्कर्ष
यह ब्रेनस्टॉर्मिंग सत्र यह दिखाता है कि भारत अब उर्वरकों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में गंभीरता से काम कर रहा है। डॉ मांगी लाल जाट के नेतृत्व में किए जा रहे ये प्रयास किसानों की लागत कम करने, उत्पादन बढ़ाने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाएंगे।
आने वाले समय में अगर इन सुझावों को ज़मीन पर सही तरीके से लागू किया जाता है, तो देश की कृषि व्यवस्था और भी मज़बूत और टिकाऊ बन सकती है।
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