ICAR-DOGR Pune ने लॉन्च किया SSR Database, अब होगी बेहतर और रोगरोधी किस्मों की पहचान

ICAR–Directorate of Onion and Garlic Research (ICAR-DOGR Pune ), पुणे ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए SSR Database की ऑनलाइन शुरूआत की है।

अब प्याज की खेती सिर्फ अनुमानों पर नहीं, बल्कि विज्ञान के सटीक आंकड़ों पर तय होगी। ICAR–Directorate of Onion and Garlic Research (ICAR-DOGR Pune ), पुणे ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए SSR Database की ऑनलाइन शुरूआत की है। ये डेटाबेस प्याज की आनुवंशिकी (Genetics) को समझने और Advanced Breeding करने वाले वैज्ञानिकों के लिए वरदान साबित होगा।

क्या है ये SSR डेटाबेस?

SSR का पूरा नाम है Simple Sequence Repeat। इसे आसान भाषा में समझें तो यह प्याज के डीएनए पर मौजूद छोटे-छोटे निशानों की तरह है, जो हर किस्म में अलग होते हैं। इस डेटाबेस में प्याज के गुणसूत्रों (Chromosomes) के हिसाब से SSR मार्करों की पूरी जानकारी दी गई है, जैसे कि वे किस तरह के हैं, कहां मौजूद हैं, और उनमें कितना बदलाव (पॉलीमॉर्फिज्म) मौजूद है।

क्यों है ये अचीवमेंट बेहद अहम?

अब तक प्याज की बेहतर किस्म बनाने में पारंपरिक तरीकों में सालों लग जाते थे। अब इस डेटाबेस की मदद से वैज्ञानिक एक ही दिन में हजारों पौधों की आनुवंशिक जांच कर सकेंगे। इससे:

  • रोग प्रतिरोधी किस्में तेजी से विकसित की जा सकेंगी।
  • जलवायु परिवर्तन (सूखा, बाढ़, अत्यधिक गर्मी) सहने वाले प्याज की पहचान होगी।
  • नकली और असली बीजों में फर्क करना अब साइंटिफिक रूप से आसान हो जाएगा।

किसने किया उद्घाटन?

इस डेटाबेस का उद्घाटन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के उप-महानिदेशक (उद्यानिकी) डॉ. एस.के. सिंह ने किया। उन्होंने कहा -‘पारंपरिक प्रजनन के साथ आधुनिक आणविक तकनीकों का जुड़ाव ही भविष्य की प्याज किस्मों की ताकत होगा।’

Guest of Honour डॉ. सुधाकर पांडे ने इसे “चयन प्रक्रिया का सटीक नक्शा” बताया, जो भविष्य के प्रजनन कार्यक्रमों में क्रांति लाएगा।

वैज्ञानिकों की राय

डॉ. विजय महाजन (निदेशक, डीओजीआर) ने कहा कि ये डिजिटल संसाधन उद्यानिकी अनुसंधान को नई दिशा देगा। डेटाबेस के मुख्य डेवलपर ने बताया कि अब शोधकर्ता बिना किसी भटकाव के सीधे जरूरी आनुवंशिक जानकारी तक पहुंच सकेंगे।

क्या होगा इसका फायदा किसानों को?

हो सकता है कि ये डेटाबेस सीधे किसान के खेत में न दिखे, लेकिन इसके परिणाम साफ नजर आएंगे-

  1. कम लागत में ज्यादा उत्पादन : रोग न लगने से फसल बर्बाद नहीं होगी।
  2. स्थानीय जलवायु के अनुकूल बीज : हर क्षेत्र के लिए अलग किस्म।
  3. बीज की पहचान आसान : जाली बीजों से छुटकारा।

ऑनलाइन कार्यक्रम में भारी उत्साह

इस वर्चुअल लॉन्चिंग में देशभर के ICAR संस्थानों के निदेशक, प्याज प्रजनक और DOGR पुणे के सभी कर्मचारी शामिल हुए। सभी ने इसे “कृषि अनुसंधान का डिजिटल अवतार” बताया।

 

 

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