Table of Contents
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू (Andhra Pradesh Chief Minister N. Chandrababu Naidu) ने 31 अगस्त 2026 को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए वेलिगोंडा सिंचाई परियोजना (Veligonda Irrigation Project) के पहले चरण का उद्घाटन किया। उन्होंने कृष्णा नदी के पानी को नल्लामाला सागर (Nallamala Sagar) में छोड़ा। यह सिर्फ पानी की एक बूंद नहीं है, बल्कि यह उन लाखों किसानों की तपती धरती और उनकी परेशानी को दूर करने वाली है। जिन्होंने दशकों से पानी के लिए तरसते हुए कर्ज और बेबसी की रातें गुजारी हैं।
सूखा, फ्लोराइड और बेरोज़गारी
प्रकाशम, नेल्लोर, मार्कापुरम और कडप्पा के इलाके लंबे अरसे से कम बारिश, लगातार गिरते भूजल स्तर और भयंकर फ्लोराइड प्रदूषण की त्रासदी झेल रहे थे। यहां के गांवों में पीने का पानी तक जहरीला हो गया था। जिसकी वजह से फसलें मुरझा जाती थीं और लोग रोज़गार की तलाश में पलायन को मजबूर थे। इस क्षेत्र के लिए वेलिगोंडा परियोजना किसी वरदान से कम नहीं है।
इंजीनियरिंग का चमत्कार
इस परियोजना की सबसे चुनौतीपूर्ण बात यह है कि पानी को सीधे श्रीशैलम जलाशय से ग्रैविटी के बल पर पहाड़ियों को काटकर बनी सुरंगों के ज़रिए नल्लामाला सागर तक पहुंचाया गया है। 18.8 किलोमीटर लंबी दो सुरंगें और 21.8 किलोमीटर की फीडर नहरें इस परियोजना का सबसे अहम हिस्सा हैं। नायडू ने इसे ‘भागीरथ प्रयास’ कहा, क्योंकि जिस तरह भगीरथ ने गंगा को धरती पर लाया, उसी तरह इस योजना ने कृष्णा के पानी को सूखी धरती से जोड़ा है।
क्या मिलेगा किसानों को?
पहले स्टेप में 10.70 टीएमसी पानी भेजा जाएगा, जिससे 1.19 लाख एकड़ ज़मीन को सिंचाई मिलेगी और करीब 4 लाख लोगों को शुद्ध पेयजल मिल पाएगा। पूरी परियोजना के बनने पर 4.47 लाख एकड़ में खेती होगी, जिसमें प्रकाशम की 3.36 लाख, नेल्लोर की 84 हजार और कडप्पा की 27 हजार एकड़ ज़मीन शामिल है। करीब 23 लाख लोगों को फ्लोराइड-फ्री पानी मिलेगा, जो इस इलाके की बड़ी बीमारी है।
खर्च हुए 10,200 करोड़ रुपये
इस विशाल परियोजना पर करीब 10,200 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसमें से पहले चरण के 7,983 करोड़ रुपये की लागत से काम पूरा किया गया। सरकार ने परियोजना से विस्थापित 6,206 परिवारों को मात्र 48 दिनों में 768 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया।
सिर्फ पानी नहीं, बदलाव की नींव
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सिर्फ सिंचाई परियोजना नहीं है, बल्कि किसानों के भविष्य की तस्वीर है। जब पानी आएगा, तो क्रॉप डाइवर्सिफिकेश बागवानी और एग्रीकल्चर प्रोसेसिंग बिज़नेस खुलेंगे, जिससे गांवों में ही रोज़गार पैदा होंगे और लोगों को पलायन नहीं करना पड़ेगा।
नई उम्मीद की सुबह
चंद्रबाबू नायडू ने सही कहा कि कृष्णा का पानी अब सूखे की जलन को हराएगा। यह परियोजना न सिर्फ खेतों को हरा-भरा करेगी, बल्कि करीब 23 लाख लोगों की जिंदगी में पानी की एक नई सुबह लेकर आएगी।
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।
ये भी पढ़ें- Carbosulfan पर बैन की तैयारी: सेहत के लिए राहत या किसानों के लिए संकट?

