Indian Agricultural Sector: Q1 2026-27 में मिला-जुला प्रदर्शन, कृषि क्षेत्र ने दिखाई मज़बूती,धीमी रफ़्तार के भी संकेत

MoSPI  की ओर से जारी Q1 FY2026-27 के GDP अनुमान के मुताबिक कृषि क्षेत्र ने एक बार फिर अपनी मज़बूती दिखाई है, लेकिन कुछ संकेत ऐसे भी हैं जो आने वाले दिनों में चिंता बढ़ा सकते हैं।

Ministry of Statistics and Programme Implementation (MoSPI) ने वित्तीय वर्ष (FY) 2026-27 की पहली तिमाही (Q1, अप्रैल-जून) के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के तिमाही अनुमान जारी कर दिये हैं। इसमें स्थिर (2022-23) और मौजूदा कीमतों, दोनों पर इसके खर्च के घटक भी शामिल हैं।

MoSPI  की ओर से जारी Q1 FY2026-27 के GDP अनुमान के मुताबिक कृषि क्षेत्र ने एक बार फिर अपनी मज़बूती दिखाई है, लेकिन कुछ संकेत ऐसे भी हैं जो आने वाले दिनों में चिंता बढ़ा सकते हैं। आइए इस रिपोर्ट को गहराई से समझते हैं।

कृषि की रफ़्तार: कितनी तेज़,कितनी धीमी?

स्थिर कीमतों (Real Growth) पर कृषि, पशुपालन, वानिकी और मत्स्य पालन क्षेत्र ने 3.6 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की है। पिछले साल ये  4.4 फीसदी थी। मतलब ग्रोथ में थोड़ी कमी आई है। हालांकि, चालू कीमतों (Nominal Growth) पर यही क्षेत्र 7.5 फीसदी बढ़ा है, जो पिछले साल 4.7 फीसदी था। यह बड़ा उछाल दिखाता है कि किसानों को इस बार अपनी उपज के बेहतर दाम मिले हैं।

आंकड़ों में कहानी

स्थिर कीमतों पर कृषि क्षेत्र का कुल मूल्य बढ़कर 12,40,612 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं चालू कीमतों पर ये आंकड़ा  13,99,639 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यानी किसानों की जेब में पिछले साल से लगभग 98,000 करोड़ रुपये ज़्यादा आए हैं।

गेहूं-चावल की घटती रफ्तार

सबसे बड़ी चिंता की बात ये है कि 

1.कुल खाद्यान्न उत्पादन बढ़ोतरी 5.0 प्रतिशत से घटकर 4.8 प्रतिशत हो गई।

2.चावल उत्पादन में भारी गिरावट है, 10.6 फीसदी से सीधे 6.2 फीसदी पर आ गया।

3.गेहूं उत्पादन की स्थिति और भी गंभीर है जो 3.1 फीसदी से घटकर मात्र 0.5 प्रतिशत रह गया। 

4.गेहूं की यह स्थिति लगभग ज़ीरो इज़ाफा के बराबर है, जो देश की फूड सेफ्टी के लिए चेतावनी है।

उर्वरक सब्सिडी में बड़ा उछाल

किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने उर्वरक सब्सिडी में जबरदस्त बढ़ोतरी की है। 47.4 फीसदी से बढ़ाकर 57.6 फीसदी कर दी गई। यह कदम किसानों की इनपुट लागत को कम करने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता दिखाता है।

PPI: उत्पादकों के लिए खुशख़बरी

Agricultural Producer Price Index (PPI) में नाटकीय बदलाव आया है। निगेटिव -1.3 फीसदी से पॉजिटिव  +4.98 फीसदी हो गया। यानी किसानों को इस बार उनकी फसल के बेहतर दाम मिल रहे हैं, जो पिछले साल नहीं थे।

सावधानी ज़रूरी

यह रिपोर्ट एक मिला-जुला संकेत देती है कि 

 पॉजिटिव पहलू:

  • कृषि में 3.6 फीसदी की ठोस वास्तविक बढ़ोतरी 
  • कीमतों में बढ़ोतरी से किसानों को बेहतर लाभ
  • उर्वरक सब्सिडी में बड़ा इज़ाफा
  • PPI पॉजिटिव होना

  चिंताजनक पहलू:

  • गेहूं इज़ाफा दर 0.5 प्रतिशत पर आना
  • चावल उत्पादन में तेज गिरावट
  • समग्र खाद्यान्न बढ़ोतरी में कमी
  • खनन क्षेत्र की निगेटिव वृद्धि

भारतीय कृषि ने इस तिमाही में अपनी मज़बूती दिखाई है, लेकिन गेहूं और चावल जैसी प्रमुख फसलों में आई गिरावट आगे की चुनौतियों का संकेत देती है। सरकार को इन संकेतों पर गंभीरता से ध्यान देना होगा, ख़ासकर आगामी रबी सीजन की तैयारियों में। किसानों को बेहतर दाम मिलने और सब्सिडी बढ़ने से राहत तो मिली है, लेकिन उत्पादन बढ़ोतरी को बनाए रखना लंबे वक्त के लिए फूड सेफ्टी के लिए काफी अहम है।

Q1 FY2026-27 GDP अनुमानों के आधार पर

 

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