FITMA: कून्नूर में National Tea Conference का आगाज़, ‘मिशन 1K’ से बदलेगी भारत की चाय पीने की तस्वीर!

National Tea Conference में FITMA की एक बड़ी मांग ये भी है कि चाय बोर्ड की नीति बनाने वाली बैठकों में असम, उत्तर बंगाल और नीलगिरी के प्रतिनिधि सीधे तौर पर शामिल हों। इससे हर क्षेत्र की असली समस्याएं और सुझाव सीधे नीति निर्माताओं तक पहुंचेंगे।

FITMA: कून्नूर में National Tea Conference का आगाज़, ‘मिशन 1K’ से बदलेगी भारत की चाय पीने की तस्वीर!

नीलगिरी की हरी-भरी पहाड़ियों और मनमोहक चाय बागानों के बीच, देश के चाय उद्योग का भविष्य तय करने के लिए एक ऐतिहासिक बैठक तैयार है। 29 जनवरी को कून्नूर (kunnoor) में हो रहा राष्ट्रीय चाय सम्मेलन (National Tea Conference) सिर्फ एक बैठक नहीं, बल्कि भारतीय चाय को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक बड़ा अभियान है। FITMA (Federation of Indian Tea Manufacturers Association) ये आयोजन कर रहा है। 

एक मंच पर चाय के तीन बड़े क्षेत्र

इस सम्मेलन की ख़ास बात ये है कि ये असम, उत्तर बंगाल और नीलगिरी (Assam, North Bengal and Nilgiris) जैसे देश के तीन प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्रों के Producers को एक साथ लाया है। अक्सर ये क्षेत्र अलग-अलग चुनौतियों से जूझते हैं, लेकिन इस बार सभी एक मंच पर आकर एकजुट हो रहे हैं। FITMA (Federation of Indian Tea Manufacturers Association) के आयोजन में एक शक्तिशाली राष्ट्रीय आवाज बनने की तैयारी में है।

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‘मिशन 1K’: हर भारतीय तक पहुंचेगी एक किलो चाय!

सम्मेलन का सबसे चर्चित और महत्वाकांक्षी एजेंडा है ‘मिशन 1K’। आंकड़े बताते हैं कि आज एक भारतीय साल में औसतन 860 ग्राम ही चाय पीता है। FITMA का टारगेट इसे बढ़ाकर 1,000 ग्राम (1 किलो) प्रति व्यक्ति करना है। ये सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि एक बड़ी सोच है।

इस मिशन के पीछे हैं कई गहरे मकसद-

स्वास्थ्य को बढ़ावा: चाय को एक प्राकृतिक, एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर और स्वस्थ पेय के रूप में पेश करना।

सांस्कृतिक जुड़ाव: चाय को केवल एक ड्रिंक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बनाना।

आत्मनिर्भरता बढ़ाना: घरेलू बाज़ार मज़बूत होगा तो चाय उत्पादकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव से ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।

नीति निर्माण में आव़ाज बनेगी मज़बूत

FITMA की एक बड़ी मांग ये भी है कि चाय बोर्ड की नीति बनाने वाली बैठकों में असम, उत्तर बंगाल और नीलगिरी के प्रतिनिधि सीधे तौर पर शामिल हों। इससे हर क्षेत्र की असली समस्याएं और सुझाव सीधे नीति निर्माताओं तक पहुंचेंगे। इसका मतलब है बेहतर quality standard, किसानों के हित में नियम और Tea ecosystem का टिकाऊ विकास।

क्यों है FITMA इतनी अहम?

FITMA कोई छोटी संस्था नहीं है। इसमें देश के 650 से अधिक बड़े चाय निर्माता सदस्य हैं, जो मिलकर हर साल 600 मिलियन किलो से ज़्यादा चाय का प्रोडक्शन करते हैं। ये देश के कुल चाय उत्पादन का लगभग 50 फीसदी है। यानी, FITMA की आव़ाज दरअसल आधे भारतीय चाय उद्योग की आवाज़ है।

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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