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केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Union Agriculture Minister Shivraj Singh Chauhan) ने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा है कि भारत और यूरोपियन यूनियन (India and the European Union) के बीच हुआ Free Trade Agreement (FTA) सिर्फ एक व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि भारत के बढ़ते वैश्विक दबदबे का प्रतीक है। रायपुर में दिए अपने बयान में कृषि मंत्री ने इस सौदे को ‘ऐतिहासिक मील का पत्थर’ बताया, जो भारतीय किसानों और कृषि उत्पादों के लिए यूरोप के बाजार के दरवाज़े खोल देगा।
किन उत्पादों को मिलेगा फायदा?
इस समझौते का सीधा फायदा भारत के कुछ प्रमुख कृषि निर्यातों को मिलेगा। यूरोप के बाज़ार में अब आसानी से पहुंच बनाने वाले उत्पादों में शामिल हैं-
- चाय और कॉफी
- मसाले
- टेबल अंगूर, खीरा और अचार वाले खीरा
- सूखे प्याज और मीठा मक्का
- चुनिंदा फल-सब्जियां और प्रोसेस्ड फूड
इसका मतलब है कि अब भारतीय किसान की मेहनत से पैदा हुई चाय या मसाले यूरोप के देशों में कम टैरिफ और कम रुकावटों के साथ पहुंचेंगे, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिल सकेगा।
संतुलन और सुरक्षा का समझौता
कृषि मंत्री ने जोर देकर कहा कि ये समझौता एकतरफा नहीं है। इसमें दोनों पक्षों की संवेदनशीलताओं का ख्याल रखा गया है। भारत ने भी अपने कुछ संवेदनशील कृषि क्षेत्रों की सुरक्षा का ध्यान रखा है। इस तरह, ये सौदा निर्यात बढ़ाने और घरेलू हितों के बीच एक स्वस्थ संतुलन कायम करता है और दोनों तरफ के किसानों के फायदे का ख्याल रखता है।
कृषि क्षेत्र की मजबूती का आधार
मंत्री ने भारतीय कृषि की चौंकाने वाली उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि आज भारत चावल उत्पादन में दुनिया में नंबर एक पर है और हमारी कृषि विकास दर ने हरित क्रांति के रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिए हैं। ये FTA इस मजबूती को ग्लोबल मार्केट में नई ऊंचाई देगा। इससे फूड प्रोसेसिंग, निवेश और ग्रामीण रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे, जो आत्मनिर्भर और विकसित भारत के सपने को साकार करने में मददगार होंगे।
किसानों की सुरक्षा के लिए नए कानून
शिवराज सिंह चौहान ने ये भी साफ किया कि किसानों के हित सबसे ऊपर हैं। ख़राब कीटनाशक और नकली बीजों से किसानों को बचाने के लिए सरकार जल्द ही एक सख्त पेस्टिसाइड अधिनियम और नया बीज अधिनियम लाने जा रही है। इससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज और कीटनाशक मिल सकेंगे और उनकी आय व भविष्य सुरक्षित होगा।
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