Green Hydrogen के रास्ते पर तेज़ी से दौड़ता यूपी: सालाना 25 लाख और 50 करोड़ की फंडिंग से बदलेगी तस्वीर

साधारण शब्दों में, ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) एक ऐसा स्वच्छ ईंधन है जो पानी (H2O) को बिजली से अलग करके बनाया जाता है। खास बात ये है कि इस प्रोसेस में इस्तेमाल होने वाली बिजली सौर या पवन ऊर्जा (Electricity from solar or wind energy) जैसे नवीकरणीय स्रोतों (Renewable sources) से आती है।

Green Hydrogen के रास्ते पर तेज़ी से दौड़ता यूपी: सालाना 25 लाख और 50 करोड़ की फंडिंग से बदलेगी तस्वीर

हरित ऊर्जा (Green Energy) की दुनिया में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) अब एक नई और ठोस पहचान बनाने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) के नेतृत्व में राज्य सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) को लेकर एक महत्वाकांक्षी एक्शन प्लान पर काम शुरू कर दिया है। ये केवल एक नीति दस्तावेज नहीं, बल्कि भविष्य की ऊर्जा (Future Energy) के लिए एक क्रांतिकारी रोडमैप है, जिसका टारगेट उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी हब (Major Green Energy Technology Hub) बनाना है।

क्या है Green Hydrogen और क्यों है ज़रूरी?

साधारण शब्दों में, ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) एक ऐसा स्वच्छ ईंधन है जो पानी (H2O) को बिजली से अलग करके बनाया जाता है। खास बात ये है कि इस प्रोसेस में इस्तेमाल होने वाली बिजली सौर या पवन ऊर्जा (Electricity from solar or wind energy) जैसे नवीकरणीय स्रोतों (Renewable sources) से आती है। इसलिए इसके प्रोडक्शन  में ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन होता है। ये तेल, कोयला और प्राकृतिक गैस जैसे प्रदूषण फैलाने वाले ईंधनों का शानदार ऑप्शन है। भारत ने 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन का जो लक्ष्य रखा है, उसमें ग्रीन हाइड्रोजन एक ‘गेम-चेंजर’ साबित हो सकता है।

kisan of india instagram

 रिसर्च, इनोवेशन और स्टार्टअप

उत्तर प्रदेश की नीति सिर्फ प्लांट लगाने तक सीमित नहीं है। इसकी नज़र पूरे इकोसिस्टम – शोध, नवाचार और उद्यमिता (Ecosystem – Research, Innovation and Entrepreneurship) को मज़बूत करने पर है। इसके तहत दो बड़े कदम उठाए जाएंगे:

1.दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (Centres of Excellence):  राज्य में दो शीर्ष स्तर के शोध केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जो देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े होंगे। इनका मुख्य काम ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण, ढुलाई और इस्तेमाल से जुड़ी तकनीक विकसित करना होगा, ताकि इसकी लागत कम की जा सके। इन केंद्रों को सरकार 50 करोड़ रुपये तक की पूरी वित्तीय मदद देगी, ताकि अत्याधुनिक लैब और परीक्षण सुविधाएं बन सकें।

2.स्टार्टअप्स को मज़बूती: नीति का सबसे रोमांचक पहलू है युवा उद्यमियों और स्टार्टअप्स के लिए समर्थन। ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े स्टार्टअप्स को लगातार 5 साल तक, हर साल 25 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता मिलेगी। शर्त सिर्फ इतनी है कि स्टार्टअप किसी मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान के इनक्यूबेटर से जुड़ा हो। इससे युवाओं को रिसर्च-आधारित व्यवसाय शुरू करने का मौका मिलेगा और उद्योग जगत को नई तकनीकें भी।

गोरखपुर का पहला प्लांट और भविष्य की योजनाएं

यूपी ने इस दिशा में पहला ठोस कदम भी बढ़ा दिया है। गोरखपुर में प्रदेश के पहले ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (The green hydrogen plant was inaugurated by Chief Minister Yogi Adityanath) ने किया है। अनुमान है कि ये प्लांट हर साल 500 टन कार्बन उत्सर्जन को कम करेगा। ये सिर्फ शुरुआत है। राज्य सरकार की योजना इस तरह के और भी प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने की है।

Green Revolution का नया चैप्टर

साफ है कि उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन क्रांति (Uttar Pradesh Green Hydrogen Revolution) में अगुआई करने के लिए तैयार है। ये योजना दीर्घकालिक सोच (Long-term thinking) पर आधारित है, जो ‘स्वदेशी तकनीक’ के विकास पर ज़ोर देती है। रिसर्च सेंटर्स और स्टार्टअप्स को मिलने वाला भारी निवेश एक मज़बूत इनोवेशन इकोसिस्टम खड़ा करेगा। इससे न सिर्फ पर्यावरण को फायदा होगा, बल्कि हज़ारों नए रोज़गार भी पैदा होंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। 

 

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

इसे भी पढ़िए: Climate Crisis: भारत का किसान प्रकृति के प्रकोप के सामने क्यों हार रहा? बाढ़, सूखा और बादल फटना बना नई ख़तरनाक ‘सामान्य’ स्थिति 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top