हिमाचल में किसानों को बड़ा तोहफा! बना State-Level Farmers’ Commission, अब बदलेगी खेती की तस्वीर

हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार (Himachal Pradesh's Sukhwinder Singh Sukhu government) ने राज्य स्तरीय किसान आयोग के गठन का बिल (Bill for the Constitution of a State-Level Farmers' Commission) पास कर दिया है।

हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार (Himachal Pradesh’s Sukhwinder Singh Sukhu government) ने बजट सत्र के आखिरी दिन विधानसभा में ऐतिहासिक फैसला लिया। किसानों के हिहिमाचलत में एक के बाद एक कई अहम बिल पास कर दिये हैं। इनमें सबसे चर्चित है, राज्य स्तरीय किसान आयोग के गठन का बिल (Bill for the Constitution of a State-Level Farmers’ Commission)।

क्यों जरूरी था ये आयोग?

हिमाचल की खेती आज कई संकटों से जूझ रही है। घटती आमदनी, छोटे-छोटे बंटे खेत, बदलता मौसम, बाजार की अनिश्चितता और संस्थागत मदद की कमी। ऐसे में किसानों को राहत देने के लिए ये आयोग एक सलाहकार संस्था के रूप में काम करेगा।

क्या होगा आयोग का काम?

आयोग का मुख्य फोकस होगा:

  • किसानों की आय बढ़ाना
  • आसान कर्ज दिलाना
  • बेहतर बाजार उपलब्ध कराना
  • किसानों की समस्याएं सुनना
  • नीतियों की समीक्षा कर सुझाव देना

आयोग में एक अध्यक्ष और अधिकतम तीन गैर-सरकारी सदस्य होंगे। इस पर एकमुश्त 50 लाख रुपये और हर साल करीब 85 लाख रुपये खर्च होंगे।

कौन बनेगा अध्यक्ष?  

कृषि मंत्री चंदर कुमार ने साफ किया है कि अध्यक्ष हिमाचल का ही प्रगतिशील और सक्रिय किसान होगा। उसकी योग्यता होगी-

  • कम से कम ग्रेजुएट
  • देश-विदेश की खेती की जानकारी
  • कृषि या संबंधित क्षेत्र में 5 साल का प्रशासनिक अनुभव

गैर-सरकारी सदस्य भी असली किसान होंगे। उनके पास पीएचडी डिग्री (कृषि, बागवानी, पशु चिकित्सा में) हो सकती है।

पंचायत चुनाव में भी बदलाव

दूसरा बड़ा बिल ये है कि गंभीर आरोपों वाले लोग पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। यानी अब गंभीर मामलों में आरोपी व्यक्ति गांव की सत्ता से दूर रहेगा।

बजट 2026 में किसानों को पहले ही मिला था गिफ्ट

सरकार ने इससे पहले बजट में भी किसानों को बड़ी सौगात दी थी:

  • अदरक को पहली बार MSP के दायरे में लाया- 30 रुपये प्रति किलो
  • दूध के दाम में 10 रुपये की बढ़ोतरी
  • गेहूं (प्राकृतिक खेती) का MSP 60 से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलो

प्राकृतिक खेती और पशुपालन को बढ़ावा देने पर ख़ासा जोर दिया गया है।

असली सवाल: क्या बदलेगा?

ये आयोग सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं है। ये किसानों और सरकार के बीच पुल का काम करेगा। जब कोई किसान परेशान होगा, तो उसे सीधे आयोग में अपनी बात रखने का मौका मिलेगा। आयोग तथ्यों के आधार पर सरकार को नीतियां सुझाएगा।

हिमाचल के किसान अब उम्मीद से देख रहे हैं। क्या ये आयोग सच में उनकी आय दोगुनी कर पाएगा? क्या छोटे किसानों की आवाज अब सुनी जाएगी? फिलहाल, सरकार ने दांव लगा दिया है। अब निगाहें इस आयोग के काम पर टिकी हैं।

बता दें कि ये आयोग पूरी तरह सलाहकार होगा, लेकिन अगर इसकी सिफारिशों पर अमल हुआ, तो हिमालय की इस खूबसूरत राज्य में खेती की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।

 

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

इसे भी पढ़िए: Strait Of Hormuz Crisis: रूस ने ग्लोबल साउथ को खाद और खेती में मदद का दिया भरोसा

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top