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दुनिया की खाद्य सुरक्षा (Food Security) एक बार फिर डगमगा गई है। पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से Global Supply Chain चरमरा गई है। इस बीच, रूस ने वैश्विक दक्षिण और पूर्व के देशों (Countries in the Global South and East) को बड़ी राहत की पेशकश की है। रूसी सुरक्षा परिषद के उप सचिव अलेक्जेंडर वेनेडिक्टोव ने साफ संकेत दिए हैं कि उनका देश ‘दोस्तों’ के लिए खाद्यान्न और उर्वरकों की आपूर्ति (Supply of Food Grains and Fertilizers) का संकट से बाहर निकलने का रास्ता बनाने को तैयार है।
हॉर्मुज़ में ताला,एशिया की कृषि पर संकट का पहरा
वेनेडिक्टोव ने राजधानी मॉस्को (Capital Moscow) में विदेशी राजनयिकों को संबोधित करते हुए कहा कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में दुश्मनी बढ़ने से Strait of Hormuz बंद हो गया है। ये सिर्फ एक जलमार्ग नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की ‘जान’ (The ‘Lifeblood’ of the Global Economy) है। उन्होंने चेतावनी दी, “लॉजिस्टिक्स, व्यापार, वैश्विक ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा अब चरमरा गई है।”
सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह रहा कि इस जलडमरूमध्य के बंद होने से दुनिया के लगभग 50 फीसदी उर्वरक (Fertilizer) एक्सपोर्ट पर रोक लग गई है। इसका सीधा असर एशिया में आगामी बुआई के मौसम (Sowing Season) पर पड़ेगा। अगर वक्त पर उर्वरक नहीं मिले, तो चावल, गेहूं और सब्जियों की पैदावार बुरी तरह प्रभावित हो सकती है, जिससे खाद्य मूल्यों में आसमान छूती बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
30 फीसदी बढ़ी कीमतें, किसानों पर दोहरी मार
इस संकट के कारण अकेले नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों (Nitrogen Additives) के दामों में 30 फीसदी की इज़ाफा हो चुका है। ग्लोबल लेवल पर जहां मुद्रास्फीति पहले से ही महामारी और युद्धों से जूझ रही थी, वहीं ईरान-इजरायल तनाव के चलते हॉर्मुज़ का बंद होना उस आग में घी का काम कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर दुनिया का 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी (LNG) गुजरता है। अब जब उर्वरकों की आपूर्ति भी ठप हो गई है, तो विकासशील देशों के लिए यह ‘परफेक्ट स्टॉर्म’ (Perfect Storm) जैसी स्थिति बन गई है।
रूस का ‘दोस्त’ वाला फॉर्मूला
जहां पश्चिमी देश इस संकट से निपटने में विफल दिख रहे हैं, वहीं रूस ने मोर्चा संभाल लिया है। वेनेडिक्टोव ने कहा, “इस अत्यंत चुनौतीपूर्ण स्थिति में, रूस ग्लोबल साउथ और ईस्ट के अपने दोस्त देशों के साथ समन्वय बनाकर काम करने के लिए तैयार है।” उन्होंने साफ किया कि रूस ‘मदद का हाथ’ बढ़ाने को तैयार है, जिसमें कृषि उत्पादों, उर्वरकों की आपूर्ति और बहु-क्षेत्रीय सहयोग विकसित करना शामिल है।
ये घोषणा ऐसे समय में आई है जब रूस खुद ग्लोबल फर्टिलाइज़र मार्केट में सबसे बड़े खिलाड़ियों में से एक है। यूक्रेन युद्ध के बाद वेस्टर्न प्रतिबंधों के बावजूद, रूस ने एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका को उर्वरक निर्यात में बड़ी वृद्धि की है। अब हॉर्मुज़ बंद होने से रूस की भौगोलिक स्थिति (ब्लैक सी और कैस्पियन सागर से जुड़े रास्ते) उसके लिए एक रणनीतिक लाभ बन गई है।
भारत और अन्य देशों पर क्या असर?
भारत जैसा कृषि प्रधान देश, जो दुनिया का सबसे बड़ा उर्वरक आयातक है, इस संकट से सीधे प्रभावित होगा। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) भारत के लिए ईरान और खाड़ी देशों से जुड़ा प्रमुख समुद्री रास्ता है। अगर ये बंद रहता है, तो भारत को रसायनिक उर्वरकों की आपूर्ति में देरी और महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में रूस का ये भरोसा भारत के लिए काफी अहमियत रखता है।
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