भारत और घाना के बीच कृषि सहयोग को नई दिशा, रिसर्च और तकनीक के साथ बढ़ेगा उत्पादन

भारत और घाना के MoU से टमाटर, कंद फ़सलों, कोल्ड स्टोरेज और कृषि तकनीक पर सहयोग बढ़ेगा।

भारत और घाना ने कृषि क्षेत्र में सहयोग को मज़बूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। दोनों देशों के बीच कृषि अनुसंधान, शिक्षा और तकनीक के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन यानी MoU पर हस्ताक्षर किए गए हैं। भारत और घाना के बीच ये समझौता कृषि तकनीकों को आगे बढ़ाने और उनके व्यावसायिक इस्तेमाल पर भी ज़ोर देता है।

ये MoU भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), नई दिल्ली और घाना के क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट (CSIR-CRI), अकरा के बीच हुआ है। समझौते के तहत भारत और घाना अगले पांच वर्षों तक कृषि अनुसंधान और तकनीकी सहयोग के लिए एक ढांचे के तहत काम करेंगे।

कृषि रिसर्च और तकनीक पर होगा सहयोग

भारत और घाना के इस समझौते में संयुक्त कृषि अनुसंधान, वैज्ञानिक और तकनीकी जानकारी का आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और कृषि तकनीकों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस सहयोग को घाना की Arima Farms Ltd. ने भी आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई है। उसे तय अनुसंधान और व्यावसायीकरण से जुड़ी गतिविधियों के लिए CSIR-CRI के व्यावसायिक साझेदार के रूप में मान्यता दी गई है।

समझौते के तहत भारत और घाना के वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ आपस में जानकारी साझा कर सकेंगे। इसमें वैज्ञानिक सूचनाओं, तकनीकी ज्ञान, कार्यप्रणाली, जर्मप्लाज्म और प्रजनन सामग्री का आदान-प्रदान भी शामिल है।

टमाटर उत्पादन बढ़ाने पर शुरुआती फ़ोकस

सहयोग के पहले चरण में सब्जी फ़सलों पर काम किया जाएगा। इसमें टमाटर अनुसंधान और विकास को ख़ास महत्व दिया गया है। ICAR घाना में पहले से साबित हो चुकी कृषि तकनीकों को बड़े स्तर पर अपनाने में सहयोग करेगा।

साथ ही, उपयुक्त अधिक उपज देने वाली टमाटर की लाइनों और क़िस्मों को वहां लाने में भी मदद की जाएगी। इसका उद्देश्य घाना में घरेलू टमाटर उत्पादन को मज़बूत करना है। इस तरह भारत और घाना के बीच कृषि सहयोग का शुरुआती फ़ोकस ऐसी तकनीकों और क़िस्मों पर रहेगा, जो स्थानीय कृषि उत्पादन को मज़बूत करने में मदद कर सकें।

भारत और घाना के बीच कृषि सहयोग को नई दिशा, रिसर्च और तकनीक के साथ बढ़ेगा उत्पादन

कंद वाली फ़सलों की प्रोसेसिंग पर भी ज़ोर

समझौते में कसावा, याम और दूसरी कंद फ़सलों की प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य कृषि से जुड़े मूल्य शृंखला को मज़बूत करना है।

इसके अलावा भारत और घाना के सहयोग में फ़सल कटाई के बाद होने वाले नुक़सान को कम करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए कोल्ड स्टोरेज, रेफ्रिजरेटेड परिवहन, फ़सल की छंटाई, ग्रेडिंग और प्रोसेसिंग से जुड़ी तकनीकों में तकनीकी सहायता और क्षमता निर्माण किया जाएगा।

वैज्ञानिक संस्थानों के बीच बढ़ेंगे संबंध

भारत और घाना के बीच ये साझेदारी केवल तकनीक तक सीमित नहीं रहेगी। दोनों देशों के संबंधित अनुसंधान संस्थानों और केंद्रों के बीच संस्थागत संबंध विकसित करने की भी योजना है। इसके तहत संयुक्त रिसर्च प्रोजेक्ट तैयार किए जाएंगे और उन्हें लागू किया जाएगा। वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के आदान-प्रदान से दोनों देशों के संस्थानों के बीच लगातार सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

इस पूरी साझेदारी की निगरानी ICAR और CSIR-CRI के प्रतिनिधियों वाले एक संयुक्त कार्य समूह के जरिए की जाएगी। ये समूह सहयोग की प्रगति की समीक्षा करेगा और इसके कार्यान्वयन को दिशा देगा। इसकी बैठकें समय-समय पर नई दिल्ली और अकरा में होंगी।

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कृषि तकनीक को बाज़ार से जोड़ने की कोशिश

भारत और घाना के बीच हुआ ये पांच साल का MoU कृषि अनुसंधान, तकनीक, प्रशिक्षण और व्यावसायिक इस्तेमाल को एक साथ जोड़ने की कोशिश है। इसका फ़ोकस ऐसी कृषि तकनीकों को आगे बढ़ाने पर है, जिन्हें घाना में अपनाया जा सके और उनका व्यावसायिक उपयोग भी हो।

समझौते से भारत और घाना के बीच कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक सहयोग को आगे बढ़ाने का रास्ता तैयार हुआ है। साथ ही, भारत और घाना की ये साझेदारी घाना में कृषि तकनीकों को अपनाने, उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों पर काम करने और किसानों की आजीविका को बेहतर बनाने में सहयोग की दिशा तय करती है।

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