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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार (Yogi Adityanath government of Uttar Pradesh) ने कृषि क्षेत्र में एक क्रांतिकारी और स्त्री-सशक्तिकरण (women empowerment) से जुड़ा मॉडल पेश किया है – ‘कृषि सखी’ (‘Krishi Sakhi’)। हाल ही में जारी किए गए आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि ये योजना न सिर्फ ज़मीन पर उतर रही है, बल्कि गांव-गांव में आर्थिक और सामाजिक बदलाव की नई इबारत भी लिख रही है।
क्या है ‘कृषि सखी’ मॉडल?
‘कृषि सखी’ (‘Krishi Sakhi’) योजना का आइडिया सीधा और प्रभावशाली है। इसके तहत ग्रामीण महिलाओं को कृषि से जुड़े नए-युग के कामों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। ये महिलाएं अब सिर्फ खेत में मजदूरी करने वाली हाथ नहीं रह गईं, बल्कि ‘कृषि सखी’ के रूप में वे गांव के किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने में मदद करने वाली ‘Agriculture Expert’ बन गई हैं।
सरकार के आंकड़े बोलते हैं
योगी सरकार की ओर से जारी ताजा आंकड़े इस स्कीम की सफलता का डंका बजा रहे हैं-
- प्रदेश के 75 जिलों में इस मॉडल को लागू किया जा चुका है।
- हजारों ग्रामीण महिलाओं को ‘कृषि सखी’ के रूप में ट्रेनिंग के साथ जोड़ा गया है, जिससे उन्हें न सिर्फ रोजगार मिला है, बल्कि समाज में एक नई पहचान भी मिली है।
- इन कृषि सखियों ने लाखों किसान परिवारों तक सीधी पहुंच बनाई है और उन्हें आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ा है।
क्या-क्या काम करती हैं ‘कृषि सखी’?
एक कृषि सखी का काम सिर्फ सलाह देना भर नहीं है। वह एक ‘One-Stop Solution’ की तरह काम करती हैं:
1.वह किसानों को नई फसलों, बेहतर बीजों, जैविक खाद के इस्तेमाल और कीट प्रबंधन की जानकारी देती हैं।
2.कृषि सखी सरकारी योजनाओं, सब्सिडी और बैंक लोन जैसी सुविधाओं तक किसानों की पहुंच आसान बनाती हैं।
3.कई जगहों पर वे गुणवत्ता वाले बीज और छोटे कृषि उपकरणों के वितरण का भी केंद्र बन रही हैं।
सामाजिक बदलाव की बयार
इस योजना का असर सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि गहरा सामाजिक है। ग्रामीण महिलाएं, जो पहले घर की चारदीवारी तक सीमित थीं, आज ‘कृषि सखी’ बनकर न सिर्ब आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि पूरे गांव के लिए ‘मास्टर ट्रेनर’ का रोल अदा कर रही हैं। इससे महिला सशक्तिकरण को एक नई दिशा मिली है। दूसरी ओर, किसानों को अपने ही गांव में, अपनी ही बोली में कृषि विशेषज्ञ मिल गए हैं, जिससे उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान संभव हो पा रहा है।
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