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अमेरिका, दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (America, the world’s largest economy), ने अपने आयात शुल्क (Tariff ) नियमों में एक बड़ा बदलाव किया है। इस कदम से भारतीय कृषि क्षेत्र, ख़ासतौर से हमारे किसानों, को एक ज़रूरी फायदा (American Market) मिलने की उम्मीद जगी है। व्हाइट हाउस की ओर से 12 नवंबर 2025 को जारी एक Executive Order के बाद कई कृषि उत्पादों को पारस्परिक आयात शुल्क (”Reciprocal Tariff” ) की लिस्ट से बाहर कर दिया गया है। ये बदलाव 13 नवंबर से लागू हो चुका है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (Global Trade Research Initiative) की एक ताजा रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि इससे भारत को हल्का लेकिन ‘महत्वपूर्ण’ फायदा हो सकता है।
क्या है अमेरिका का नया नियम और किन उत्पादों को मिली छूट?
अमेरिका ने माना है कि कुछ उत्पादों का या तो उसके यहां प्रोडक्शन कम होता है या फिर उन्हें उगाने के लिए जलवायु अनुकूल नहीं है। इसी आधार पर उसने निम्नलिखित वस्तुओं पर लगने वाले भारी आयात शुल्क को हटाने का फैसला किया है-
1.Beverage: कॉफी, चाय, फलों का रस
2.Fruits: उष्णकटिबंधीय फल, केला, संतरा
3.Vegetables: टमाटर
4.spices and other: कोको, मसाले, बीफ और कुछ उर्वरक
सीधे शब्दों में कहें तो, अब इन वस्तुओं को अमेरिका में सस्ते दाम पर बेचना भारतीय निर्यातकों के लिए आसान हो गया है।
भारतीय किसानों के लिए एक सुनहरा मौका, लेकिन चुनौती भरा
GTRI की रिपोर्ट एक दिलचस्प फैक्ट्स सामने लाती है। टैरिफ-मुक्त हुई इन वस्तुओं का अमेरिका सालाना करीब 50.6 अरब डॉलर का आयात करता है। लेकिन, इस बड़े बाज़ार में भारत की हिस्सेदारी महज 54.8 करोड़ डॉलर (548 मिलियन) की है, यानी बेहद कम ।
फिलहाल, भारत का निर्यात कुछ चुनिंदा उत्पादों तक सीमित है:
- काली मिर्च और लाल मिर्च के प्रॉसेस्ड उत्पाद (18.1 करोड़ डॉलर)
- अदरक, हल्दी, करी पाउडर जैसे मसाले (8.4 करोड़ डॉलर)
- सौंफ और जीरा (8.5 करोड़ डॉलर)
- चाय (6.8 करोड़ डॉलर)
यहां सबसे बड़ी चुनौती यह है कि भारत उन बड़ी Categories में लगभग ना के बराबर है, जहां अमेरिका सबसे ज्यादा आयात करता है। जैसे टमाटर, खट्टे फल (संतरा वगैरह), तरबूज-खरबूजा, केला और फलों के रस का बाज़ार। इन उत्पादों पर भारत की पकड़ अभी बहुत कमज़ोर है।
किन किसानों को मिलेगा तुरंत फायदा?
तुरंत फायदा उन किसानों और एक्सपोर्टर्स को मिलने की संभावना है जो पहले से ही इन उत्पादों का अमेरिका को निर्यात कर रहे हैं। इनमें शामिल हैं:
मसाला किसान: दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के राज्यों के किसान, जो काली मिर्च, अदरक, हल्दी, जीरा आदि की खेती करते हैं।
चाय उत्पादक: असम, दार्जिलिंग, नीलगिरi जैसे क्षेत्रों के चाय बागान।
कोको और नारियल किसान: सीमित स्तर पर कोको और नारियल किसान।
टैरिफ हटने से इन उत्पादों की कीमत अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी हो जाएगी, जिससे मांग बढ़ने की उम्मीद है।
फायदा कैसे उठाए भारत?
GTRI स्पष्ट करता है कि इस अवसर का पूरा लाभ उठाने के लिए भारत को अपनी कृषि नीति और ढांचे में बदलाव की जरूरत है। असली विजेता वे देश बनेंगे जो बड़े पैमाने पर उत्पादन और कुशल सप्लाई चेन मैनेज कर सकते हैं, जैसे लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और आसियन देश।
भारत के लिए सफलता इन बातों पर निर्भर करेगी-
उत्पादन का पैमाना बढ़ाना: छोटे-छोटे खेतों के बजाय बड़े पैमाने पर उत्पादन पर ध्यान देना होगा।
कोल्ड-चेन और भंडारण में निवेश: फलों और सब्जियों को खराब होने से बचाने के लिए मजबूत कोल्ड-चेन और वेयरहाउसिंग सिस्टम जरूरी है।
फसल विविधीकरण: अमेरिकी बाजार की मांग के अनुसार नई फसलों जैसे एवोकाडो, कीवी, विशेष प्रकार के टमाटर आदि को बढ़ावा देना।
गुणवत्ता और मानकों पर खरा उतरना: अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों (जैसे USDA ऑर्गेनिक) का पालन सुनिश्चित करना।
अमेरिका का ये कदम Indian agricultural exports के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ की तरह है। यह एक छोटी शुरुआत है, लेकिन इसके पीछे छिपी संभावनाएं विशाल हैं। यह समय है कि भारत का किसान, उद्योग और सरकार मिलकर इस अवसर को हकीकत में बदलने के लिए काम करे।
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