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भारत इस वर्ष एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन की मेजबानी कर रहा है, जिसने पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र के बीज उद्योग में उत्साह भर दिया है। एशियन सीड कांग्रेस 2025 का आयोजन 17 से 21 नवंबर तक मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में किया जा रहा है। यह कार्यक्रम एशिया और पैसिफिक सीड अलायंस (APSA), नेशनल सीड एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NSAI) और फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (FSII) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है।
लगभग दस वर्ष बाद भारत में लौट रहा यह प्रतिष्ठित सम्मेलन न केवल कृषि तकनीक और नवाचार का मंच है, बल्कि यह भारत को वैश्विक बीज व्यापार के केंद्र में स्थापित करने का एक बड़ा अवसर भी है। इसलिए एशियन सीड कांग्रेस 2025 को भारत के कृषि-बीज क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है।
एशियन सीड कांग्रेस 2025 का महत्व: एशिया-प्रशांत का सबसे बड़ा बीज सम्मेलन
1994 में FAO और DANIDA के सहयोग से स्थापित APSA आज दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्रीय बीज संगठन है। इसके वार्षिक आयोजन — एशियन सीड कांग्रेस — में दुनिया भर से 1,200 से 1,800 प्रतिनिधि हिस्सा लेते हैं, जिनमें उद्योग विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, सरकारी अधिकारी और व्यापारिक संस्थान शामिल होते हैं।
नई दिल्ली, हैदराबाद, बैंगलोर, शंघाई, बाली, जकार्ता, सियोल, बैंकॉक और चिबा जैसे प्रमुख शहर इस कार्यक्रम की मेजबानी कर चुके हैं। अब एशियन सीड कांग्रेस 2025 फिर से भारत में आयोजित हो रही है, जो भारत की वैश्विक कृषि छवि को मजबूत करती है।
मुंबई में एशियन सीड कांग्रेस 2025: नए अवसरों का द्वार
मुंबई का जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर इस मेगा कार्यक्रम की मेजबानी कर रहा है। माना जा रहा है कि एशियन सीड कांग्रेस 2025 इस बार जुड़ाव, साझेदारी और तकनीकी सहयोग के नए मानक स्थापित करेगी।
यह सम्मेलन सिर्फ बैठकों का आयोजन नहीं, बल्कि एक पूर्ण अनुभव है जहां—
- तकनीकी सत्र
- उद्योग नेताओं के साथ नेटवर्किंग
- बिजनेस-टू-बिजनेस मीटिंग्स
- स्टार्टअप और इनोवेशन शोकेस
- कृषि क्षेत्र से जुड़े सांस्कृतिक और क्षेत्रीय भ्रमण
सब शामिल हैं।
इससे भारत में बीज उद्योग के लिए ज्ञान आदान-प्रदान और वैश्विक बाजारों में प्रवेश के नए अवसर खुलेंगे।
गुणवत्तापूर्ण बीजों के माध्यम से समृद्धि की बुवाई: कांग्रेस का मुख्य विषय
एशियन सीड कांग्रेस 2025 का विषय है—
“गुणवत्तापूर्ण बीज के माध्यम से समृद्धि की बुवाई”
इस थीम का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले बीजों के महत्व को रेखांकित करना है। बेहतर बीज न केवल उत्पादन बढ़ाते हैं, बल्कि—
- जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद करते हैं
- कृषि को अधिक टिकाऊ बनाते हैं
- किसानों की आय बढ़ाते हैं
- खाद्य सुरक्षा मजबूत करते हैं
कांग्रेस में पौध प्रजनन, जैव विविधता संरक्षण, बीज व्यापार के मानक, आधुनिक प्रौद्योगिकियाँ और स्थिरता जैसे विषयों पर गहन चर्चा होगी।
भारत को मिलने वाले संभावित लाभ
एशियन सीड कांग्रेस 2025 के आयोजन से भारत को कई स्तरों पर बड़े लाभ मिलेंगे—
1. वैश्विक बीज उद्योग में भारत की मजबूत स्थिति
भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बीज उत्पादन और अनुसंधान का उभरता केंद्र है। यह आयोजन भारत की नेतृत्व भूमिका को और मजबूत करेगा।
2. अनुसंधान एवं नवाचार में सहयोग
भारत के कृषि वैज्ञानिक और शोध संस्थान, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ मिलकर नई तकनीकों पर सहयोग कर सकेंगे।
3. निर्यात को बढ़ावा
भारत से बीज निर्यात पहले से ही कई देशों में हो रहा है। एशियन सीड कांग्रेस 2025 से नए बाजारों तक पहुंच आसान होगी।
4. किसानों तक नई तकनीक पहुंचने का अवसर
कांग्रेस में प्रदर्शित आधुनिक बीज प्रौद्योगिकियाँ और नवाचार किसानों तक जल्द पहुंच सकेंगे, जिससे उत्पादन और आय दोनों बढ़ेंगे।
5. वैश्विक निवेश के अवसर
भारतीय बीज कंपनियों को नई साझेदारियों, संयुक्त उद्यम और फंडिंग के अवसर मिलेंगे।
किसानों पर सीधा प्रभाव
हालाँकि कांग्रेस का मुख्य फोकस उद्योग और नीति स्तर पर होता है, लेकिन इसका अंतिम लाभ किसानों तक ही पहुंचता है।
एशियन सीड कांग्रेस 2025 के माध्यम से—
- बेहतर और उन्नत बीज किस्में उपलब्ध होंगी
- उत्पादन लागत में कमी आएगी
- जलवायु अनुकूल बीजों के कारण फसल जोखिम घटेगा
- अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की नई तकनीकें किसानों तक पहुंचेंगी
इससे किसानों की उत्पादकता और आय दोनों बढ़ेंगी।
भारत की ‘आत्मनिर्भर कृषि’ के लिए बड़ा कदम
बीज क्षेत्र कृषि का मूल आधार है। मजबूत बीज नीति और उन्नत प्रौद्योगिकियाँ आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। एशियन सीड कांग्रेस 2025 इस दिशा में भारत को एक बड़े मंच पर स्थापित करेगा, जहाँ से वैश्विक कृषि विकास के लिए नई रणनीतियों और सहयोग को दिशा मिलेगी।
निष्कर्ष
एशियन सीड कांग्रेस 2025 सिर्फ एक सम्मेलन नहीं, बल्कि भारत के लिए कृषि-बीज क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व स्थापित करने का एक ऐतिहासिक अवसर है। यह आयोजन न केवल अंतरराष्ट्रीय व्यापार, अनुसंधान और तकनीकी सहयोग को नई दिशा देगा, बल्कि किसानों और उद्योग दोनों को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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