Sixth International Agronomy Congress 2025: ‘स्मार्ट खेती’ का ब्लूप्रिंट पेश, 357 मिलियन टन रिकॉर्ड उत्पादन के बाद तय हुआ अगला लक्ष्य!

23 नवंबर 2025 को दिल्ली के NASC कॉम्प्लेक्स के अग्नि हॉल में एक ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसने भारतीय […]

Sixth International Agronomy Congress 2025: 'स्मार्ट खेती' का ब्लूप्रिंट पेश, 357 मिलियन टन रिकॉर्ड उत्पादन के बाद तय हुआ अगला लक्ष्य!

23 नवंबर 2025 को दिल्ली के NASC कॉम्प्लेक्स के अग्नि हॉल में एक ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसने भारतीय कृषि के भविष्य की नई रूपरेखा तैयार करने का संकेत दिया। Sixth International Agronomy Congress (IAC) 2025 के curtain raiser में देश के शीर्ष कृषि वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों (Top agricultural scientists, policy makers and experts) ने हिस्सा लिया। ये कार्यक्रम आने वाले तीन दिवसीय महाकुंभ की झलक दिखाने वाला था, जो “री-एनविज़निंग एग्रोनॉमी फॉर स्मार्ट एग्री-फूड सिस्टम्स एंड एनवायरनमेंटल स्टीवर्डशिप” (Re-envisioning Agronomy for Smart Agri-Food Systems and Environmental Stewardship) थीम पर बेस्ड है।

क्या है Agronomy और क्यों है जरूरी?

आसान शब्दों में कहें तो एग्रोनॉमी वो विज्ञान है जो फसलों और पर्यावरण के बीच तालमेल बैठाती है। ये सिखाती है कि कम पानी, कम खर्च और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना कैसे अधिक और बेहतर पैदावार ली जा सकती है। जलवायु परिवर्तन और बढ़ती आबादी के इस दौर में ये विज्ञान और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

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देश के अन्नभंडार में भरा है दम, पर चुनौतियां भी हैं

डॉ. एम.एल जाट, सचिव, डेयर और महानिदेशक (Dr. M.L. Jat, Secretary, DARE and Director General), ICAR ने अपने मुख्य भाषण में देश की कृषि सफलता के झंडे गाड़े। उन्होंने बताया कि भारत ने 357.73 मिलियन टन का रिकॉर्ड food grain production हासिल किया है। ये आंकड़ा हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। इससे भी बड़ी उपलब्धि है फसल अवशेष जलाने (पराली जलाने) में 2020 के बाद से 95 फीसदी की भारी कमी। इससे न सिर्फ प्रदूषण कम हुआ है, बल्कि मिट्टी की सेहत में भी सुधार आया है।

क्या है आगे की राह?

डॉ. जाट ने भविष्य के लिए कई महत्वपूर्ण बातें रखीं:

1.सिस्टम एग्रोनॉमी: अब खेती को अलग-अलग टुकड़ों में न देखकर एक संपूर्ण सिस्टम के रूप में देखने की जरूरत है। जैसे, फसल, मिट्टी, पानी, जलवायु और बाजार सब आपस में जुड़े हुए हैं।

2.प्राकृतिक और बदलाव वाली कृषि: ऐसी खेती जो मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाए, जैव विविधता को बचाए और रसायनों पर निर्भरता घटाए।

3.डेटा और टेक्नोलॉजी का जादू: Artificial Intelligence (AI) और Internet of Things (IoT) जैसी तकनीकों से किसानों को सटीक जानकारी मिलेगी। ये पता चल सकेगा कि किस फसल को कब, कितना पानी और खाद चाहिए।

4.आत्मनिर्भरता: कृषि इनपुट (जैसे खाद के लिए कच्चा माल) के मामले में आयात पर निर्भरता कम करनी होगी। देशी संसाधनों को बढ़ावा देना होगा।

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वैज्ञानिक सहयोग और मीडिया की भूमिका

डॉ. एस.के. शर्मा, अध्यक्ष, Indian Society of Agronomy ने कहा कि ये कांग्रेस वैज्ञानिक सहयोग और नीतियों के बीच सेतु बनेगी। डॉ. एसएस. राठौर, आयोजन सचिव ने मीडिया से अपील की कि कांग्रेस के नतीजों को देश के कोने-कोने तक, हर किसान तक पहुंचाने में मदद करें।

ये कांग्रेस सिर्फ एक सम्मेलन नहीं, बल्कि भारतीय कृषि के सुनहरा भविष्य का आधार है। यहां होने वाली चर्चाएं और सिफारिशें आने वाले दिनों में देश की कृषि नीतियों का हिस्सा बनेंगी। इसका टारगेट साफ है – एक ऐसा स्मार्ट और टिकाऊ कृषि तंत्र बनाना जो किसान की आमदनी बढ़ाए, देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करे और हमारी धरती को हरा-भरा रखे। ये भारत को ‘अन्नदाता’ से ‘विश्व का अन्न भंडार’ बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हो सकता है।

 

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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