HRMN-99 सेब के जनक हरिमन शर्मा से जानिए मैदानी इलाकों में क्रांति लाने वाली इस किस्म के अस्तित्व में आने की कहानी

मणिपुर, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर व्यवसायिक रूप से इसका उत्पादन हो रहा है। अब तक वो 28 राज्यों में 17 लाख पौधे लगा चुके हैं और 23 राज्यों में सफलतापूर्वक उत्पादन हो रहा है।

सेब आमतौर पर ठंडे प्रदेश की बागवानी फसल है, मगर हरिमन शर्मा ने इस थ्योरी को HRMN-99 सेब की किस्म से बदल दिया। उनके द्वारा विकसित की गई सेब की ये अनोखी किस्म 45 से 50 डिग्री सेल्सियस में भी फल दे रही है। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में जन्में हरिमन शर्मा ने एक ऐसे सपने को सच कर दिखाया, जिसके बारे में साल 2005 से पहले तक किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। किसे पता था हिमाचल और कश्मीर की शान सेब अब हरियाणा, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे गर्म प्रदेशों में भी उगाया जा सकता है। मगर हरमन शर्मा ने गर्म इलाकों में सेब की खेती के सपने को HRMN-99 किस्म से सच कर दिखाया है। बागवानी के क्षेत्र में हरिमन शर्मा के अद्वितीय योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार ने 2025 में पद्मश्री से सम्मानित किया। कैसे हुआ HRMN-99 किस्म का जन्म और कैसा था हरिमन शर्मा का बागवानी का सफ़र, इस बारे में उन्होंने विस्तार से बात की किसान ऑफ़ इंडिया के संवाददाता सर्वेश बुंदेली से।

कैसे हुई HRMN-99 की शुरुआत?

किसी ने सच ही कहा है आवश्यकता अविष्कार की जननी है। जब हमें ज़रूरत होती है तभी हम नई चीज़ों के बारे में सोचते हैं और उसे बनाते हैं। हरिमन शर्मा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। वो हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के रहने वाले हैं, जहां आम की खेती बहुत अधिक होती थी, मगर 1995 में आम की खेती को कोहरे से बहुत नुकसान हुआ, 50 साल पुराने पेड़ भी तबाह हो गए। बस उस घटना के बाद ही हरिमन शर्मा ने सेब को विकल्प के रूप में चुना और उनके नवाचार से HRMN-99 अस्तित्व में आया। हरिमन शर्मा कहते हैं कि दिसंबर और जनवरी में सेब सुप्त अवस्था में होता है तो इस पर कोहरे का ज़्यादा असर नहीं होता, इसलिए इस समय इसके पौधे लगाना उन्हें सही लगा। सबसे पहले उन्होंने एक बीज से पौधा तैयार किया और जब उसमें छोटे-छोटे फल आए तो, उसे जंगली पल्लम पर मल्टीप्लाई/ग्राफ्ट किया। ऐसा करने से फल की गुणवत्ता में थोड़ा सुधार हुआ, फिर उन्हें पता लगा कि सेब की सेब पर ग्राफ्टिंग होती है, तो वो शिमला से पेड़ के नीचे वाले पौधे यानी रूटस्टॉक लेकर आएं और उनपर ग्राफ्टिंग की। 2007 में उन्हें इस काम में सफ़लता मिली और इस तरह HRMN-99 अस्तित्व में आया।

23 राज्यों में हो रहा उत्पादन

हरिमन शर्मा कहते हैं कि मणिपुर, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर व्यवसायिक रूप से इसका उत्पादन हो रहा है। अब तक वो 28 राज्यों में 17 लाख पौधे लगा चुके हैं और 23 राज्यों में सफलतापूर्वक उत्पादन हो रहा है। इसके अलावा बांग्लादेश, जर्मनी और नेपाल में भी उनके पौधे लगे हुए है। वो 7 हजार पौधे ओमान भी भेज चुके हैं। हरिमन शर्मा की पहल यकीनन क्रांतिकारी है, वो सेब को बर्फीली पहाड़ियों से निकालकर मैदानी इलाकों में लेकर आएं।

कब करें पौध रोपण?

सेब की खेती मैदानी इलाकों के लिए नई है, ऐसे में उन्हें इसकी पूरी प्रक्रिया के बारे में पता होना चाहिए। हरिमन शर्मा बताते हैं कि सेब का पौधा जनवरी और दिसंबर में लगाया जाता है। नियम के मुताबिक, सितंबर-अक्टूबर में पौध रोपण के लिए गड्ढ़े खोदे जाते हैं। एक गड्ढ़े में 15/20 किलो गोबर की सड़ी-गली खाद और 250 ग्राम प्रति पौधा इफको NPK 123216 डाला जाता है। दीमक से जड़ों को नुकसान न पहुंचे इसके लिए प्रति पौधा 100/150 ग्राम फोरेट या थाइमेट मिट्टी में मिलाकर गड्ढ़े में डाल दें और फिर गड्ढ़े को भर दें। उसके बाद दिसबंर-जनवरी में सेब का पौधा लगाया जाता है। पौध रोपण के बाद हर तीसरे या चौथे दिन पानी देते रहें। पौध रोपाई के 15-20 दिन बाद इसमें नए पत्ते आने लगते हैं। आगे वो बताते हैं कि टिश्यू कल्चर वाले पौधे दूसरे साल में ही उत्पादन देने लगते हैं और जो बीज से उगे ग्राफ्टिंग वाले पौधे होते हैं वो तीसरे साल फल देते हैं, पहले कुछ साल उत्पादन बहुत अधिक नहीं होता है, मगर 6-7 साल बाद एक पौधे से 50-60 किलो फल मिलने लगता है।

कितनी रखें पौध में दूरी?

जहां तक पौध रोपण की बात है तो किसानों को ये भी पता होना चाहिए कि पौध से पौध और पंक्ति से पंक्ति के बीच कितनी दूरी रखी जाए। हरिमन शर्मा कहते हैं कि टिश्यू कल्चर वाले पौधे के लिए पंक्ति से पंक्ति के बीच 5X5 फीट की दूरी और पौधे से पौध के बीच भी इतनी ही दूरी रखी जानी चाहिए। जबकि बीज से तैयार पौधे जिसमें ग्राफ्टिंग की जाती है उसमें पंक्ति से पंक्ति और पौध से पौध के बीज 12 से 13 फीट की दूरी होनी चाहिए।

45 से 50 डिग्री तापमान सहने की क्षमता

बर्फीले पहाड़ों वाले सेब से HRMN-99 बिल्कुल अलग है, क्योंकि ये 45 से 50 डिग्री सेल्सियस में भी उत्पादन दे रहा है। हरिमन शर्मा का कहना है कि ये किस्म राजस्थान और हरियाणा में बहुत सफ़ल रही है। राजस्थान में कमर्शियल स्तर पर इसका उत्पादन हो रहा है। साथ ही वो बताते हैं कि अच्छे उत्पादन के लिए सेब के पौधों की प्रूनिंग करना बहुत ज़रूरी है। दिसंबर में इसकी प्रूनिंग की जाती है और जिस जगह पर प्रूनिंग की गई है उस जगह पर बने घाव पर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड को असली के तेल में मिलाकर लगाना चाहिए ताकि बारिश का पानी और कीट अंदर प्रवेश न करें। उनका कहना है कि पौधों की हर साल प्रूनिंग ज़रूरी है। इसमें ऊपर की सब टहनियों की छंटाई करनी पड़ती है और अंदर की तरफ की टहनियों को भी कांटना होता है यानी छाते के आकार में प्रूनिंग की जाती है।

अवॉर्ड और उपलब्धियां

जिस व्यक्ति ने स्कूली शिक्षा भी पूरी न की हो और उसे अपने काम की वजह से पीएचडी की उपाधि मिले तो इससे ज़्यादा गर्व की बात भला और क्या हो सकती है। आपको जानकर शायद हैरानी होगी कि HRMN-99 किस्म के जनक हरिमन शर्मा ने सिर्फ़ 9वीं तक की पढ़ाई की है, मगर बागवानी के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान की वजह से उन्हेंर पीएचडी की मानद उपाधि मिल चुकी है। इसके अलावा उनके नाम बहुत से अवॉर्ड और उपाधियां दर्ज हैं, जिससे उन्हें काम करने की प्रेरणा मिलती है। 2017 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के हाथों उन्हें भारत का द्वितीय राष्ट्रीय किसान पुरस्कार मिला। हाल ही में उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा उन्हें इनोवेटिव फार्मर अवॉर्ड, IAR फेलो अवॉर्ड, जगजीवन राम जोनल अवॉर्ड, जगजीवन राम राष्ट्रीय अवॉर्ड, मुंबई में फार्मर ऑफ़ द इंडिया अवॉर्ड, ऑर्टिस्ट एसोसियशन द्वारा भी अवॉर्ड मिल चुका है। 

HRMN-99 दूसरे सेब से कैसे अलग है?

हरिमन शर्मा कहते हैं कि सेब की ये किस्म मुलायम होती है और इसका रंग हल्का लाल होता है। इसके अलावा रिसर्च में शिमला के सेब से इसका TSS 2 पॉइंट अधिक पाया गया है और सबसे बड़ी बात ये कि ICAR की रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें शुगर 0.2 प्रतिशत है। इसमें मिठास कम होती है, ये हल्का खट्टा होता है, इसलिए शुगर के मरीजों के लिए ये फ़ायदेमंद है। इसकी एक और खासियत यह है कि जून-जुलाई में जब सेब का सीजन नहीं होता है, तब भी मैदानी क्षेत्रों में सेब की इस किस्म का उत्पादन होता है।

2022 में मिला पेटेंट

हरिमन शर्मा बताते हैं कि नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन की मदद से उन्होंने पेटेंट के लिए अप्लाई किया था और 2022 में उन्हें इस किस्म का पेटेंट मिल चुका है। वो किसानों को सलाह देते हैं कि असली HRMN-99 पौध के नाम पर कुछ नर्सरी वाले नकली पौधे ऊंची दरों पर बेच रहे हैं, ऐसे में किसान इधर-उधर भटकने की बजाय उनकी वेबसाइट (https://harimansharmaapplenursery.com/) पर दिए नंबर पर संपर्क करके पौध मंगा सकते हैं। उनकी नर्सरी में मात्र 100 रूपए में ही पौध मिलती है।

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सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुंचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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